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‘भिक्षा देदे मैया पिंगला’ के मार्मिक दृश्य का किया मंचन

महाराज भर्तृहरि के भक्त दर्शक आंसू पोंछते आए नजर

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अलवर

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mohit bawaliya

Oct 15, 2024

अलवर. युवराज प्रताप श्री रामलीला ट्रस्ट शिवाजी पार्क में अलवर की तपोभूमि के लोक देवता महाराजा भर्तृहरि के महान ऐतिहासिक,धार्मिक व सामाजिक नाटक का दो दिवसीय नि:शुल्क मंचन हजारों श्रद्धालु दर्शकों की उपस्थिति में हुआ।
प्रवक्ता शिवचरण कमल ने बताया महाराजा भर्तृहरि के नीति शतक, श्रंगार शतक व वैराग्य शतक को दो दिवस में प्रस्तुत किया गया। माया मत्स्येंद्रनाथ की आज्ञा से गोरखनाथ महाराजा भर्तृहरि को वैराग्य की प्रेरणा के लिए आज्ञा देते हैं। जहां राजा उज्जैन में बहुत प्रवीण माध्यम से न्याय और अपने राज्य की शान्ति व सुख हेतु अपनी कार्यप्रणाली पर परस्पर ध्यान रखते हुए दिखते हैं साथ ही अपनी प्रिय पत्नी के प्रेम का आदर्श भी स्थापित करते नजर आते हैं तभी उनके राज्य की घुडसाल का प्रधान सेनापति जब मल्लयुद्ध में अन्य राज्य के पहलवानों को परास्त कर देता है तो रानी पिंगला उस पर मोहित हो जाती है। उधर क्रूर सिंह चन्द्रशेखर शास्त्री की पुत्री मोहिनी से प्रेम करता है । रानी पिंगला और क्रूर सिंह का प्रेम परवान चढऩे लगता है । राजा भर्तृहरि के दरबार मेें एक सन्त आकर उन्हें अमरफल भेंट करता है जिसे राजा भर्तृहरि अपनी प्रियतमा पत्नी रानी पिंगला को दे देते हैं। उस अमरफल को रानी पिंगला अपने प्रेमी प्रधान सेनापति क्रूरसिंह को दे देती है। उधर महाराजा भर्तृहरि के छोटे भाई विक्रम को जब इस प्रेम प्रसंग पता चलता है तो वह क्रूरसिंह को मारने दौड़ता है किंतु इसी बीच विक्रम के गले की माला रानी पिंगला के हाथ लग जाती है । क्रूरसिंह पिंगला द्वारा दिए गए अमरफल को वैश्यावृत्ति में लिप्त अपनी प्रेमिका मोहिनी को दे देता है।


उधर विक्रम अपने अग्रज महाराजा भर्तृहरि को क्रूरसिंह व पिंगला के प्रेम प्रसंग के बारे में बताता है जिस पर पिंगला विक्रम पर ही खुद पर कुदृष्टि डालने का लांछन लगाती है । महाराजा भर्तृहरि गृह क्लेश में उलझ कर अपनी प्रियतमा पत्नी के विक्रम पर लगाए आरोप के कारण विक्रम को राज्य की सीमा से बाहर जाने का आदेश देते हैं । तदुपरान्त राजा भर्तृहरि के दरबार मे मोहिनी उन्हें वह अमरफल प्रदान करती है व पूरा वृतान्त बताती है । महाराजा भर्तृहरि प्रेम में धोखा खाने पर विक्रम को राज्य सौंप कर वैराग्य धारण कर लेते हैं। "भिक्षा देदे मैया पिंगला" के उस मार्मिक दृश्य को देख उपस्थित हजारों भर्तृहरि के भक्त दर्शक आंसू पोंछते नजर आते हैं । अंत में महाराजा भर्तृहरि अरावली की श्रंखला में स्थित अलवर की तपोभूमि सरिस्का में समाधिस्थ हो जाते हैं।

इधर नाटक मंचन से पूर्व अतिथियों का स्वागत रामलीला अध्यक्ष श्याम शर्मा, संस्थापक अध्यक्ष सुरेश तिवाडी,राजेश तिवाडी, खेमचंद सैन, सुभाष स्वामी,राजेन्द्र शर्मा, अखिलेश गर्ग, तीरथ शर्मा,दीपक सोनी,दीपक खंडेलवाल,मंगतू राम,देवकी सैनी, गोविंद सैनी,राजेश गौड, विजय शर्मा व अन्य सदस्यों ने किया ।

नाटक मंचन टीम में ये रहे शामिल
राजा भर्तृहरि की भूमिका समीर तिवाडी, मत्स्येन्द्र नाथ सौरभ खंडेलवाल,विक्रम की भूमिका मोहन शर्मा, गोरखनाथ की भूमिका बाबूलाल सैनी, पिंगला की भूमिका मीनाक्षी चौहान, मोहिनी की भूमिका नंदिनी, विद्यासागर की भूमिका केशवदेव,मायादास की भूमिका अशोक शर्मा,तेली की भूमिका गजेंद्र उपाध्याय,चंद्रशेखर शास्त्री की भूमिका,केशव सिंह,फरियादी की भूमिका संजय खुराना ने निभाई। इसके अलावा नाटक में विशेष आकर्षण चलता-फिरता सिंहासन और घूमता हुआ मंच व बेताल के दृश्य ने सभी दर्शकों का ध्यान खींचा। गायन दीपक खंडेलवाल व दीपा सैनी का रहा। जबकि मंच संचालन शिवचरण कमल ने किया।