7 जून 2026,

रविवार

Patrika Logo
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

साढे़ सात वर्ष से चल रहा काम, अभी दो से तीन साल और लगेंगे

राजर्षि भर्तृहरि मत्स्य विश्वविद्यालय के नए भवन का निर्माण अब तक नहीं हो पाया। दो सरकारों को पूरा कार्यकाल बीत गया। तीसरी सरकार आ गई। अभी निर्माण पूरा होने में करीब दो से तीन साल और लगने की संभावना है। ऐसे में समय पर निर्माण न होने से विद्यार्थियों की कक्षाएं यहां नहीं लग पाईं। हैरत की बात ये है कि इस भवन की लागत बढ़ती रही लेकिन काम आगे बढ़ता नजर नहीं आ रहा। गुणवत्ता पर भी तमाम सवाल खड़े हुए। दरारें कई भवनों में पड़ी थीं। इसको लेकर भी कार्यदायी संस्था पर कार्रवाई नजर नहीं आई।

2 min read
Google source verification

अलवर

image

jitendra kumar

Dec 09, 2023

साढे़ सात वर्ष से चल रहा काम, अभी दो से तीन साल और लगेंगे

साढे़ सात वर्ष से चल रहा काम, अभी दो से तीन साल और लगेंगे

राजर्षि भर्तृहरि मत्स्य विश्वविद्यालय के नए भवन का निर्माण अब तक नहीं हो पाया। दो सरकारों को पूरा कार्यकाल बीत गया। तीसरी सरकार आ गई। अभी निर्माण पूरा होने में करीब दो से तीन साल और लगने की संभावना है। ऐसे में समय पर निर्माण न होने से विद्यार्थियों की कक्षाएं यहां नहीं लग पाईं। हैरत की बात ये है कि इस भवन की लागत बढ़ती रही लेकिन काम आगे बढ़ता नजर नहीं आ रहा। गुणवत्ता पर भी तमाम सवाल खड़े हुए। दरारें कई भवनों में पड़ी थीं। इसको लेकर भी कार्यदायी संस्था पर कार्रवाई नजर नहीं आई।

कई वाइस चांसलर, रजिस्ट्रार यहां तैनात हुए, लागत निर्माण की बढ़ती रही, लेकिन काम रेंगता रहा

विश्वविद्यालय 2013-14 में मंजूर हुआ था। अब 2023 चल रही है। यानी 10 साल बीत गए। भाजपा की सरकार फिर आ गई। कुछ ही निर्माण इसका पूरा हो पाया है। अब तक 27 करोड़ खपा दिए गए हैं। 70 करोड़ से अधिक की लागत भवन निर्माण में और आएगी। जानकारों का कहना है कि जितना लंबा काम जाएगा उतनी रकम बढ़ती जाएगी। सरकारी खजाने से पैसे निकल रहे हैं। लागत बढ़ रही है लेकिन विश्वविद्यालय समय पर काम नहीं करवा पा रहा है। कई विश्वविद्यालय के वीसी व रजिस्ट्रार बदल गए। वह भी इसकी समुचित मॉनिटरिंग नहीं कर पा रहे हैं। नेताओं ने भी राजनीति के चलते इसमें दिलचस्पी नहीं दिखाई।

ये काम हो चुके पूर्ण

विश्वविद्यालय के नए भवन में 27करोड़ की लागत से कई काम हो चुके हैं। इसमें संविधान पार्क, सडकों का काम, बिजली के पोल, चारदीवारी, प्रशासनिक भवन व परीक्षा हॉल बनाए जा चुके हैं।

छह कुलपति बदले, 11 बार हुआ रजिस्ट्रारों का तबादला: विश्वविद्यालय में अफसरों के तबादले का सिलसिला जारी है। भवन निर्माण का कार्य जब से शुरू हुआ है, तब से लेकर दिसम्बर 2023 तक छह कुलपतियों का तबादला हो चुका है। इसमें एमआर सैनी, भारत सिंह, मुक्तानंद अग्रवाल, अश्वनी बसंल, जेपी यादव, कार्यवाहक सीआर चौधरी आदि हैं। वर्तमान में प्रो. शील सिंधु पांड़ेय वीसी हैं। 11 रजिस्ट्रारों का भी तबादला हो चुका है। इसमें अनिल कुमार, जितेन्द्र नरुका दो बार, रमेश भारद्वाज, कार्यवाहक, अनूप सिंह, सरोज गुप्ता, नीलिमा तक्षक, ज्योति मीणा, रोहिताश यादव, योगेश डागुर आदि शामिल हैं। इतने अधिकारी आए और गए लेकिन निर्माण पूरा नहीं करवा पाए। वर्तमान में रजिस्ट्रार पद पर कार्यवाहक रितु जैन हैं।

फैक्ट फाइल

विश्वविद्यालय भवन : हल्दीना

कार्यदायी एजेंसी: आरएसआरडीसी

निर्माण कार्य चल रहा है: आठ साल

पूरा होगा: दो से तीन साल

आकार: 200 बीघा

अब तक लागत: 27

दो गेट : नहीं लगाए गए

नियत तिथि तक हो सकता है काम पूरा

विश्वविद्यालय के नए भवन में निर्माण कार्य में कोई अडचन नहीं आई तो दो से तीन साल में कार्य पूरा हो जाएगा। अब भवन निर्माण कार्य में गति आएगी।

मनोज श्रीवास्तव, आरएसआरडीसी प्रोजेक्ट डायरेक्टर, यूनिट अलवर।