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जानिए क्यों डाकू उंगलीमाल लोगों की काट लेता था उंगली… नाटक ने दर्शकों को दिखाई सच्चाई

अलवर. रंग संस्कार थियेटर ग्रुप की ओर से आयोजित अलवररंगम थियेटर फेस्टिवल में सोमवार को द्रोपदी एक आवाज कालामंच, गाजियाबाद की ओर से अदिति उन्मुक्त का लिखा एवं निर्देशित नाटक ' एक था डाकू उंगलीमाल ' का मंचन हरूमल तोलानी रंगमंच पर किया गया।

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अलवर

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Jyoti Sharma

Feb 14, 2023

जानिए क्यों डाकू उंगलीमाल लोगों की काट लेता था उंगली... नाटक ने दर्शकों को दिखाई सच्चाई

जानिए क्यों डाकू उंगलीमाल लोगों की काट लेता था उंगली... नाटक ने दर्शकों को दिखाई सच्चाई

डाकू उंगलीमाल लोगों की उंगली काट लेता था लेकिन बाद में वह सुधर गया। गौतम बुद्ध ने दिया था ज्ञान, तब सही मार्ग पर आया उंगलीमाल।

इस नाटक में प्राचीन इतिहास के चर्चित पात्र डाकू उंगलीमाल की कहानी को प्रस्तुत किया गया था। । उंगलीमाल एक ऐसा डाकू था जो लोगों की उंगलियां काट लिया करता था। इस नाटक में उंगलिमाल से संबंधित कई सवालों की पड़ताल की गई है। क्या उंगलीमाल शुरू से डाकू था? उंगलीमाल के डाकू बनने के पीछे क्या वजह थी? उंगलीमाल के जीवन के दौरान ऐसी क्या घटनाएं घटी जिन परिस्थितियों ने उसे डाकू

बनने पर मजबूर कर दिया? लगभग 12 अभिनेताओं के नाट्य दल ने अपने शानदार अभिनय से नाटक के कथानक को जीवंत कर दिया। नाटक में बताया गया कि उंगलीमाल डाकूएक राजा के पुरोहित का बेटा था, पुरोहित के 11 साल बाद पहली संतान हुई थी लेकिन उसके जन्म के समय ही पंडितों ने भविष्यवाणी कर दी गई थी कि वह हिंसक मनुष्य बनेगा, लेकिन इसके बाद ज्योतिष् ने सलाह दी कि इसका नाम अहिंसक रखो तो यह बुरे कार्य से दूर रहेगा। माता पिता ने उसका युवा होने तक हर तरह से संभाला वह बहुत अच्छा इंसान था लेकिन जब उसे शिक्षा लेने गुरू के पास भेजा तो वहां गुरु की बेटी उसको प्रेम करने लगी। वह सभी शिष्यों से अधिक बुदि्धमान था, शिष्य उससे जलने लगे और गुरु को अंहिसंक और उसकी बेटी के प्रेम के बारे में गलत जानकारी देकर भडकाया। जब गुरू दक्षिणा देने का समय आया तो गुरु ने उससे गुरु दक्षिणा में एक हजार कटी हुई अंगुलियां मांगी। गुरु दक्षिणा देने के लिए उसने लोगों की अंगुलियां काटी और जब 999 अगुुलियां हुई तो वह मां की अंगुली भी काटने को तैयार हो गया लेकिन लोगों ने इसे रोक दिया। वह कटी हुई अंगुलियों को लेकर गुरु के पास पहुंचा और गुरु की भी अंगुली काटकर एक हजार अंगुलियां पूरी की। तब गोतम बुद्ध उनके जीवन में आए और उनके बताए मार्ग से वह फिर से अच्छा इंसान बन गया।