हिमांशु शर्मा
अलवर. भाप के इंजनों की सरताज 'फेयरी क्वीन' एक बार फिर से पटरी पर लौटेगी। दुनिया में सबसे पुराने संचालित भाप के इंजन के तौर पर फेयरी क्वीन का नाम गिनीज बुक ऑफ रिकॉडर्स में नाम दर्ज है। बार-बार खराबी के बाद 161 साल पुराने फेयरी क्वीन इंजन को रेलवे ने वर्ष 2014 में विदा कर दिया था, लेकिन अब इंजीनियरों ने इसे फिर पुनर्जीवित कर दिया है। इस साल अक्टूबर से फेयरी क्वीन रेलगाड़ी दिल्ली से अलवर आएगी।
वर्ष 1998 से पटरी पर दौड़ रहे फेयरी क्वीन इंजन को करीब दो साल पहले रेलवे ने बार-बार रास्ते में खराब होने के कारण हटा लिया था। इसके बाद टे्रन का नाम बदलकर स्टीम एक्सप्रेस कर दिया गया। यह टे्रन हर पर्यटन सीजन में सैलानियों को पुरानी दिल्ली से लेकर अलवर पहुंचती है। टे्रन को फिलहाल पुराने स्टीम इंजन अकबर के माध्यम से चलाया जा रहा है। अब पुन: फेयरी क्वीन इंजन के साथ यह टे्रन अलवर से दिल्ली के बीच चलेगी।
अलग है फेयरी क्वीन की सीटी
फेयरी क्वीन इंजन की सीटी लोगों को सबसे ज्यादा पसंद है। टे्रन जब अलवर के महाराजा जंक्शन पहुंचती है या रवाना होती है तो लोगों की भीड़ इसे सुनने व इंजन देखने पहुंचती है।
बायलर किया जा रहा दुरुस्त
फेयरी क्वीन का दुरुस्त बायलर चेन्नई से दिल्ली पहुंच चुका है। इंजन को रेवाड़ी से दिल्ली शकूर बस्ती रेलवे वर्क शॉप में ले जाया गया है। वहां बायलर बदलने का काम चल रहा है। इंजीनियर इसकी पानी स्टोरेज क्षमता भी बढ़ा रहे हैं। रेलवे सूत्रों के मुताबिक दो हफ्ते बाद इसका ट्रायल किया जाएगा और छोटी-मोटी खामियों को दूर करने के बाद यह सफर के लिए तैयार हो जाएगा।
फेयरी क्वीन : एक नजर
1855 में निर्मित व संचालित
1909 में रेलवे से रिटायर
1972 में हेरिटेज का दर्जा, राष्ट्रीय रेल संग्रहालय में रखा गया
1997 में पुन: सेवा में शामिल
2014 में सेवा से हटाया
फेयरी क्वीन इंजन को ठीक करने का काम चल रहा है। नए पर्यटक सीजन से इंजन को चलाया जाएगा। उसका जो पाट्र्स खराब था, वह आ चुका है। पाट्र्स नहीं मिल रहा था, इसलिए थोड़ी देरी हो रही थी। नीरज शर्मा, जनसम्पर्क अधिकारी, उत्तर रेलवे