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अलवर में इतने खतरनाक श्वान…अब ऐसे होगा इनका इलाज

केंद्र सरकार ने श्वानों की खूंखार प्रजातियों को पालने, खरीद व बिक्री पर रोक लगा दी है। इसी को देखते हुए पशुपालन विभाग ने भी तैयारी शुरू कर दी है। पशुपालन विभाग ने कह दिया है कि बैन प्रजातियों के श्वानों के रजिस्ट्रेशन नहीं किए जाएंगे और न ही उनका इलाज किया जाएगा। ऐसे में डॉग लवर अपने स्तर से िस्थतियां देखें। सरकार के आदेश का पशुपालन विभाग पूरी तरह पालन कराएगा।

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अलवर

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susheel kumar

Mar 15, 2024

अलवर में इतने खतरनाक श्वान...अब ऐसे होगा इनका इलाज

अलवर में इतने खतरनाक श्वान...अब ऐसे होगा इनका इलाज

केंद्र सरकार ने श्वानों की खूंखार प्रजातियों को पालने, खरीद व बिक्री पर रोक लगा दी है। इसी को देखते हुए पशुपालन विभाग ने भी तैयारी शुरू कर दी है। पशुपालन विभाग ने कह दिया है कि बैन प्रजातियों के श्वानों के रजिस्ट्रेशन नहीं किए जाएंगे और न ही उनका इलाज किया जाएगा। ऐसे में डॉग लवर अपने स्तर से िस्थतियां देखें। सरकार के आदेश का पशुपालन विभाग पूरी तरह पालन कराएगा।
जिलेभर में पिटबुल, बुलडॉग, रॉटविलर समेत कई खूंखार श्वानों की प्रजातियां हैं। दर्जनों की संख्या में लोगों ने ये पाले हुए हैं। हैरत ये है कि इनके खूंखार होने के बाद भी लोगों के बचाव के इंतजाम न तो विभागों के पास हैं और न डॉग लवर्स के पास। नगर निगम में श्वानों के रजिस्ट्रेशन की कोई व्यवस्था नहीं है जबकि जयपुर से लेकर अन्य नगर निगमों में रजिस्ट्रेशन श्वानों के हो रहे हैं। श्वानों के हमले के लिए जिम्मेदार कौन होगा? ये तय नहीं है।

ये प्रजातियां हैं बैन...विदेशों में भी पालने पर पाबंदी

रॉटविलर, अमरीकन बुलडॉग, पिटबुल टैरियर, वोल्फ डॉग, मास्को गार्ड, केन कार्सो, जैपनीज टोसा, अकीता समेत 23 विदेशी नस्ल के श्वानों पर बैन लगाया गया है। जर्मनी, डेनमार्क, स्पेन, ग्रेट ब्रिटेन, आयरलैंड, रोमानिया, कनाड़ा, इटली व फ्रांस में भी पिटबुल के पालने पर रोक है। ये बेहद ताकतवर होता है। गुस्सा आने पर ये अपने जबड़ों से जिस भी चीज को पकड़ता है फिर उसे छुड़ाना आसान नहीं है।
पशुपालन विभाग ऐसे लगाएगा अंकुश

- खतरनाक श्वानों की ब्रिडिंग नहीं होने देगा।
- बीमार आदि होने पर इलाज मुहैया नहीं कराया जाएगा।

- बिना पंजीकरण के शहर में चल रहे डॉग क्लीनिक पर कार्रवाई होगी।
- इन श्वानों का वैक्सीनेशन नहीं किया जाएगा।

केंद्र सरकार के आदेशों का पालन करवाया जाएगा। श्वानों की खूंखार प्रजातियों का वैक्सीनेशन नहीं करेंगे। साथ ही इलाज भी मुहैया नहीं हो पाएगा।
- डॉ. राजेश गुप्ता, संयुक्त निदेशक, पशुपालन विभाग