बर्डोद. एक तरफ प्रदेश सरकार अपनी जनकल्याणकारी योजनाओं से जुडऩे और आमजन योजनाओं से लाभान्वित के लिए विभिन्न तरह से योजनाओं का प्रचार प्रसार कर रही है। ताकि प्रदेश और प्रदेश के लोग निरोगी रहे। लेकिन कस्बा बर्डोद में स्थित अलवर जिले का सबसे बड़ा और पुराना सेठ रूडमल रघुनाथ दास महावर राजकीय रैफरल चिकित्सालय विभागीय अधिकारियों की अनदेखी और राजनैतिक
उपेक्षा के कारण वर्तमान समय में अपनी बदहाल स्थिति पर आंसू बहा रहा है।
स्वास्थ्य विभाग और उनके अधिकारियों की अनदेखी और राजनैतिक उपेक्षा के कारण चिकित्सालय मात्र शो पीस बनकर रह गया है। आपको बता दें कि उक्त चिकित्सालय का निर्माण कस्बे के ही भामाशाह सेठ रूडमल ने करवाया था। जिसका उद्घाटन भारत देश के प्रथम राष्ट्राति डॉ राजेन्द्र प्रसाद ने विधिवत रूप से किया था। वर्षों तक तो भामाशाह ने अपनी निजी आय से चिकित्सालय का सफल संचालन करवाया। लेकिन व्यवसाय में व्यस्तता के कारण सरकार को जनकल्याण के लिए सुपुर्द कर दिया। सरकार को सौंपने के बाद कुछ वर्षों तक विभागीय अधिकारियों एवं चिकित्सालय में अच्छे चिकित्सकों के कारण क्षेत्र के मरीजों को बेहतर उपचार मिला। लेकिन स्वास्थ विभाग की अनदेखी और राजनैतिक उपेक्षा के कारण बदहाल हुए चिकित्सालय से अब ग्रामीण लोग मुंह मोड़ रहे हैं।
बीते दिनों उक्त चिकित्सालय में व्याप्त समस्याओं के समाधान के लिए क्षेत्रीय ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन भी किया जो कि १७ दिनों तक चला। धरना प्रदर्शन की सूचना जिले तक पहुंची। तो प्रदेश की राजनीति में अपना वर्चस्व रखने वाले पूर्व केंद्रीय मंत्री भंवर जितेंद्र सिंह, श्रम मंत्री टिकाराम जूली, जिला प्रमुख बलबीर छिल्लर, क्षेत्र में दौरे के दौरान बर्डोद धरना प्रदर्शन स्थल पर पहुंचकर ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों को समस्या समाधान के लिए आश्वस्त कर धरना प्रदर्शन समाप्त करवाया। शीर्ष नेताओं के निर्देश पर जिला मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ श्रीराम शर्मा ने भी दूसरे ही दिन बर्डोद पहुंचकर व्याप्त समस्याओं की जानकारी लेकर प्रभारी को आवश्यक दिशा निर्देश देते हुए संघर्ष समिति के लोगों से वार्ता के दौरान जल्द ही समस्याओं के समाधान का आश्वासन दिया । लेकिन स्थिति वो ही ज्यों की त्यों बनी हुई है।
तलोगों में रोष
धरना प्रदर्शन संघर्ष समिति के पूर्व सरपंच रामौतार सैनी, एडवोकेट राकेश मीणा, सुबेसिंह चौहान, रामनिवास सैनी, पूर्व सरपंच सुरेन्द्र चौधरी सहित अन्य जनप्रतिनिधियों एव ग्रामीणों ने बताया जनप्रतिनिधियों के खिलाफ रोष जताया है।
ये समस्याएं प्रमुख
चिकित्सालय की मोर्चरी, पावर हाउस, चारदीवारी पर अतिक्रमण, वर्षों से खराब पड़ी एक्सरे मशीन, चिकित्सकों की कमी, चिकित्सालय में जर्जर जननी वार्ड, वर्षों से बंद पड़ा ऑपरेशन थियेटर, बदहाल पार्क, सहित अन्य समस्याएं हैं।
दर्जनों गांवों का है
से जुड़ाव
इस चिकित्सालय से कांकरा बर्डोद, ढीस, कारोडा, अजमेरीपुर, बाटखानी , कोलिला, सोड़ावास, शामदा, भुनगडा अहीर, जाट बहरोड़, बधीन, भजनावास, सहित अन्य दर्जनों गांवों का जुड़ाव है।