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अलवर के इन लोगों के हाथ खाली

यूआईटी ने करीब 8 माह पहले नगर निगम को 15 कॉलोनियां हस्तांतरित की थी लेकिन अब तक इन क्षेत्रों के लोगों को निगम की ओर से समुचित व्यवस्था नहीं मिल पा रही हैं। कहीं पर सड़कें टूटी हुई हैं तो कहीं पर सफाई व्यवस्था बेहाल है। जनता कहना है कि निगम में शामिल होने का कोई ज्यादा फायदा नहीं हुआ। हालात कॉलोनियों के पहले जैसे ही हैं।

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अलवर

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susheel kumar

Mar 12, 2024

अलवर के इन लोगों के हाथ खाली

अलवर के इन लोगों के हाथ खाली

यूआईटी ने कागजों में निगम को हस्तांतरित की कॉलोनियां...नहीं बढ़ रही हैं सुविधाएं
- करीब 8 माह पहले 15 कॉलोनियां हस्तांतरित की गई थी, लेकिन रेकॉर्ड निगम को नहीं मिला
- शिवाजी पार्क, केशव नगर, रणजीत नगर, वीर सावरकर नगर आदि कॉलोनियां इस कड़ी में

यूआईटी ने करीब 8 माह पहले नगर निगम को 15 कॉलोनियां हस्तांतरित की थी लेकिन अब तक इन क्षेत्रों के लोगों को निगम की ओर से समुचित व्यवस्था नहीं मिल पा रही हैं। कहीं पर सड़कें टूटी हुई हैं तो कहीं पर सफाई व्यवस्था बेहाल है। जनता कहना है कि निगम में शामिल होने का कोई ज्यादा फायदा नहीं हुआ। हालात कॉलोनियों के पहले जैसे ही हैं। निगम के एक अधिकारी का कहना है कि यूआईटी की ओर से इन कॉलोनियों के अभिलेख अभी पूरे नहीं मिले, फिर भी सुविधाएं कॉलोनियों में दी जा रही हैं।

25 हजार लोगों को बंधी थी सुविधाओं की उम्मीदेंयूआईटी ने शिवाजी पार्क, केशव नगर, रणजीत नगर, नरु मार्ग व्यवसायिक, श्योलालपुरा स्कीम नंबर 9, शिवाजी पार्क विस्तार, वीर सावरकर नगर, अशोक विहार, सुभाष नगर एनईबी, राजेंद्र नगर स्कीम नंबर 4, मालवीय नगर, शांतिकुंज, स्कीम नंबर 10बी, नेहरू नगर, तेज मंडी कॉलोनी नगर निगम को हस्तांतरित की थी। जैसे ही ये प्रस्ताव पास हुआ तो इन कॉलोनियों के 25 हजार से ज्यादा लोगों को उम्मीद थी कि अब तक उनका एरिया साफ-सुथरा होगा। सड़कें बनेंगी। पानी की किल्लत दूर होगी। सीवर लाइन डलेंगी। नालियों की सफाई होगी लेकिन ये कार्य अधिकांश कॉलोनियों में नहीं हो पा रहे हैं।

पार्षद बोले- निगम जल्द सुविधाएं दे

पार्षद अशोक पाठक कहते हैं कि शिवाजी पार्क कॉलोनी यूआईटी ने निगम को हस्तांतरित कर दी लेकिन कहीं न कहीं प्रक्रिया अटकी है, तभी समुचित कार्य नहीं हो पा रहे। इस प्रक्रिया को निगम जल्द पूरी करे। पार्षद सतीश यादव का कहना है कि निगम से जनता को उम्मीदें होती हैं। ऐसे में सुविधाएं मुहैया करानी चाहिए। कंट्रोल रूम हो या फिर अफसरों के पास आने वाली शिकायतें, उनका समाधान होना चाहिए। सफाई व्यवस्था में सुधार होना चाहिए।