
उम्र के अंतिम पड़ाव पर बीमार माता-पिता को अस्पताल में भर्ती करा मुंह फेर रहे अपने
बुजुर्ग माता-पिता को जिस वक्त सबसे अधिक सहारे की जरुरत पड़ती है। तभी उन्हें बेसहारा छोड़ दिया जाता है। जीवन के अंतिम पड़ाव पर पहुंचे, ऐसे बुजुर्गों की आंखें अपनों का इंतजार करते-करते थक जाती है, लेकिन उन्हें लेने कोई नहीं आता है। वहीं, अलवर के जिला अस्पताल में भी करीब 2 प्रतिशत मामले ऐसे आ रहे हैं। जिनमें परिजन बुजुर्गों को अस्पताल में भर्ती करने के बाद लेने नहीं आते। इन बुजुर्गों के स्वस्थ होने के बाद भी जब कोई लेने नहीं आता तो आखिर में बुजुर्ग खुद ही छुट्टी लेकर चले जाते हैं। जबकि कुछ बुजुर्गों को वृद्धाश्रम भेज दिया जाता है।
लावारिस बुुजुर्गों को वृद्धाश्रम में भेज रहे
जिला अस्पताल में 60 साल से अधिक आयु के बुजुर्गों की देखभाल के लिए अलग से वृद्धावस्था वार्ड बनाया हुआ है। इसमें हर 4-5 माह में 2-3 ऐसे बुजुर्ग आते हैं, जो या तो अनाथ होते हैं अथवा उनकी बीमारी के कारण परिजन उन्हें छोड़ देते हैं। ऐसी अवस्था में पुलिस अथवा स्वयंसेवी संस्था की ओर से उन्हें उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया जाता है। वहीं, स्वस्थ होने पर उन्हें वापस स्वयंसेवी संस्थाओं के जरिए वृद्धाश्रम में भिजवा दिया जाता है।
अभी 17 बुजुर्ग वार्ड में भर्ती
अस्पताल की ऊपरी मंजिल पर बुजुर्गों के लिए अलग से 17 बेड का वृद्धावस्था वार्ड बनाया हुआ है। फिलहाल इसके सभी बेड पर मरीज भर्ती हैं। इसमें से अधिकांश बुजुर्ग सांस व हार्ट संबंधी परेशानी और लकवा से पीडि़त हैं।
Published on:
18 Nov 2023 06:26 pm
