
अलवर में जश्न ए आजादी के अब बचे हैं केवल तीन गवाह, इन स्वतंत्रता सेनानियों ने लड़ी थी आजादी की लड़ाई
किस तरह से हमने स्वतंत्रता की लड़ाई, कैसे अंग्रेजों से लोहा लिया और किन हालातों में भूखे प्यासे रहकर हमने आजादी पाई है। इन सब बातों को हमें बताने वाला जिला मुख्यालय पर कोई भी स्वतंत्रता सेनानी अब हमारे बीच जीवित नहीं है। अब तो उनकी बताई बातें ही हमारे लिए इतिहास बन गई है। कभी इन स्वतंत्रता सेनानियों के नाम से अलवर की धरती गूंजा करती थी, लेकिन अब उनकी यादें ही हमारे लिए शेष बची है। 15 अगस्त और 26 जनवरी जैसे राष्ट्रीय दिवस पर हमें ये स्वतंत्रता सेनानी सदैव याद आते रहेंगे। अलवर जिले में हमारे तीन स्वतंत्रता सेनानी आज भी जीवित होना हमारा सौभाग्य है।
जिला प्रशासन से मिली सूचना के अनुसार अलवर जिले में 26 स्वतंत्रता सेनानी थे, जिन्होंने स्वतंत्रता की लड़ाई में किसी ना किसी स्तर पर अपनी भूमिका निभाई। इनमें से केवल 3 स्वतंत्रता सेनानी ही अब जीवित हैं। इसमें गोविदंगढ़ के स्वामी जी की बगीची निवासी जगन प्रसाद स्वामी, अलवर के समीप जमालपुर निवासी भंवर सिंह और खैरथल निवासी दाताराम गुप्ता है जो हमारे लिए गर्व की बात है।
23 स्वतंत्रता सेनानियों के आश्रितों को मिल रही है पेंशन
जिले में 23 स्वतंत्रता सेनानियों के आश्रित आज भी सरकार से पेंशन प्राप्त कर रहे हैं। स्वतंत्रता सेनानी मामचंद की पत्नी श्रवण देवी, गिरधारी लाल की पत्नी फुली देवी, बिहारी लाल की पत्नी भगवती देवी, भोलानाथ शर्मा की पत्नी पुष्पा देवी, जंगली राम की पत्नी विमला शर्मा, शिवलाल की पत्नी धुंधा देवी, हीराचंद की पत्नी कृष्णा देवी, श्योनारायण की पत्नी मुठरी देवी, सोनाराम की पत्नी किताबो देवी, किशनचंद शर्मा की पत्नी विमला देवी, भवानी शाह की पत्नी मूर्तिदेवी, शंभुदयाल की पत्नी धन्नी देवी, रणजीत सिंह की पत्नी मूर्ति देवी , रोहताश की पत्नी मुन्नी देवी, नंदीराम की पत्नी ग्यासरी देवी, किशनलाल की पत्नी विद्या देवी, छाजूराम की पत्नी भोली देवी, नंदराम की पत्नी भूलन देवी, जयनारायण की पत्नी बादामी देवी, देवकरण की पत्नी सोनारी देवी, रूपाराम की पत्नी शांति देवी, रामजीलाल की पत्नी ङ्क्षगंदोली देवी, बिहारी लाल की पत्नी भगवती देवी पेंशन प्राप्त कर रही है।
Published on:
14 Aug 2018 10:34 am
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