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Patrika Interview: पानी की लड़ाई जनप्रतिनिधियों को मिलकर लड़नी होगी – नेता प्रतिपक्ष टिकाराम जूली

नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली से पत्रिका रिपोर्टर सुजीत कुमार की बातचीत प्रमुख अंश

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अलवर

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Suman Saurabh

Jun 15, 2024

Tikaram Jully Interview with Patrika News

अलवर। पूरा जिला इन दिनों भीषण पेयजल संकट का सामना कर रहा है। लोग स्थानीय जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों से नाराज हैं, क्योंकि वे इस समस्या का ठोस समाधान नहीं निकाल पा रहे। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष व अलवर ग्रामीण विधायक टीकाराम जूली इसके लिए राज्य सरकार को दोषी ठहरा रहे हैं। जूली का कहना है कि सिलीसेढ़ में धरने पर बैठने या नटनी का बारां में जलकुंभी निकालने से काम नहीं चलेगा। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली से पत्रिका रिपोर्टर सुजीत कुमार की बातचीत के प्रमुख अंश:-

अलवर शहर विधायक एवं वन मंत्री संजय शर्मा ने सिलीसेढ़ के पानी को अलवर लाने के लिए आंदोलन किया था। इस दौरान आरोप लगे थे कि आप सिलीसेढ़ के पानी को अलवर नहीं आने दे रहे ?

मैं यह चैलेंज करना चाहता हूं मंत्री को कि वे पिछले पांच साल की पूरी स्वीकृति निकलवा लें, एक स्वीकृति का लेटर वो बता दें, जो सिलीसेढ़ से पानी लाने का लेटर निकला हो या पानी लाने की योजना बनी हो, पैसे मंजूर हुए हो या स्वीकृति आई हो। सिर्फ लोगों को भ्रमित करने के लिए वे सिलीसेढ़ के अंदर धरने पर बैठे। नटनी का बारां जाकर जलकुंभी निकालने लगे। जलकुंभी निकालने से पानी आता है क्या? मैंने हमेशा विकास के लिए काम किया। कांग्रेस के पार्षद और नेता लगातार पानी की समस्या को उठा रहे हैं। यह जरूर है कि बड़े स्तर पर मुद्दा नहीं उठाया गया।

पानी की समस्या पर सरकार के जनप्रतिनिधि ध्यान नहीं दे रहे। विपक्ष की भूमिका भी कमजोर नजर आ रही है। इस बारे में आपका क्या कहना है?

A मौजूदा राज्य सरकार की ओर से इस संबंध में कोई कारगार योजना नहीं बनाई गई है। जब मैं पहली बार विधायक बना था, तब चम्बल का पानी अलवर लाने की योजना राजस्थान के बजट में मंजूर कराई थी। नटनी का बारां पर स्पर का निर्माण कराया। नटनी का बारां से जयसमंद बांध तक पूरी बारा बीयर को खुदवाने का काम किया, ताकि पानी का व्यवस्था सुचारू रूप से हो सके। तत्कालीन वसुंधरा सरकार ने अलवर समेत 13 जिलों को जोड़ते हुए इसकी 39 हजार करोड़ रुपए की ईआरसीपी परियोजना बनाकर भारत सरकार को भेजी। प्रधानमंत्री अजमेर और जयपुर में इसकी घोषणा करके गए, लेकिन फिर भी सरकार ने इस योजना पर रोक लगा दी।

फिर प्रदेश की कांग्रेस सरकार ने बजट में इसकी घोषणा की और 15 हजार करोड़ रुपए स्वीकृत किए, जिसमें साढ़े 8 हजार करोड़ की लागत से ईसरदा और नवनेरा दो बांध बनाए। पहली भूमिका हमारी सरकार ने पूरी कर दी। अब भाजपा सरकार को इसे आगे बढ़ाए। पानी के मुद्दे पर विपक्ष की जो भूमिका होती है वो हम निभाएंगे। बजट सत्र में अलवर की समस्या को राजस्थान विधानसभा उठाएंगे। सदन में भाजपा सरकार को पानी के मुद्दे पर घेरेंगे। अलवर के सभी जनप्रतिनिधियों को मिलकर यह लड़ाई लड़नी होगी। सिलीसेढ़ या नटनी का बारां जाकर बैठने से काम नहीं चलेगा। हमें ठोस योजना बनानी होगी। वाटर रिचार्ज के लिए काम करना होगा। दोनों बांध ईसरदा और नवनेरा से पाइप लाइन बिछाकर पानी अलवर में पानी लाना होगा।

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लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की हार के क्या कारण रहे?

A जो कमियां रही हैं, उनका मानने में ऐतराज नहीं है। पिछले लोकसभा चुनाव में हम लगभग साढ़े तीन लाख वोटों से हारे थे। इस बार 50 हजार तक भी भाजपा की जीत नहीं पहुंच पाई। भाजपा नेता 5 लाख से अधिक वोटों से जीत का दावा कर रहे थे। जीतने के लिए इन्होंने क्या नहीं किया। साम-दाम-दंड-भेद। जितना भी सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग ये लोग कर सकते थे, इन्होंने किया। हम चुनाव हार गए, लेकिन हार का जो अंतर है वो बहुत कम रहा है। हमारी टीम ने अच्छा काम किया। जो कमियां रही, उन्हें दूर करेंगे।

सरिस्का के आसपास होटल-रिसॉर्ट बन गए। इनमें कुछ तो वन विभाग के अफसरों और नेताओं के हैं। सरकार इस मुद्दे पर कार्रवाई के मामले में मौन है। नेता प्रतिपक्ष होने के आप क्या प्रयास रहेंगे?

इस मुद्दे को हम विधानसभा में उठाएंगे। अलवर के सांसद और विधायक दोनों वन विभाग के मंत्री हैं। इस मामले में भाई-भतीजावाद नहीं होना चाहिए। दोषियों पर कार्रवाई होनी चाहिए। टूरिज्म को प्रमोट करने के लिए गैरकानूनी गतिवधियां बंद करनी होंगी। यहां के स्थानीय लोगों को रोजगार का साधन मिलेगा। लोगों की आय बढ़ेगी और जीवन स्तर सुधरेगा।