
फर्जी डिग्रियों का जाल, कई राज्यों के लोग हुए निहाल, अब हो रही जांच
अलवर ञ्च पत्रिका. जिले की एक गैर सरकारी विश्वविद्यालय की ओर से फर्जी डिग्री देने का जाल कई राज्यों में फैला हुआ था। इस विश्वविद्यालय की फर्जी डिग्री से कई राज्यों के युवाओं के सरकारी नौकरी और पदोन्नति पा ली। ऐसे कई डिग्रियों की जांच के लिए टीम अलवर आई हैं।
अलवर में पिछले दिनों एनईबी पुलिस थाने ने एक ऐसे गिरोह का पर्दाफाश किया था जो कार में ही इस अवैध कारोबार को चला रहे थे। इनके पास अलवर की सनराइज यूनिवर्सिटी के भी कागजात मिले थे। बाद में विश्वविद्यालय संचालकों ने वहां के एक कर्मचारी के खिलाफ फर्जी अंक तालिका जारी करने का पुलिस में मामला दर्ज करा दिया था। इस पर्दाफाश के बाद हरियाणा में उच्च शिक्षा विभाग ने सनराइज यूनिवॢसटी सहित राजस्थान के अन्य चार विश्वविद्यालयों की डिग्री के सत्यापन के आदेश दिए हैं। इस सत्यापन के लिए वहां से टीमें आएंगी। अलवर जिले की निजी विश्वविद्यालय की डिग्रियों की जांच करने की राज्य का उच्च शिक्षा विभाग तैयारी कर रहा है। जिन जिलों में विश्वविद्यालय है, उनमें वहां के विवि को जांच करने के लिए अधिकृत किया जाएगा।
जांच ही नहीं होती : गैर सरकारी बीएड सहित कई कॉलेजों में युवा फर्जी पीएचडी की डिग्री लगाकर पदोन्नति प्राप्त करते हैं जिनकी डिग्रियों की जांच तक नहीं की जाती है। इससे फर्जी डिग्री लेने वाले सामने तक नही आ पाते हैं। इस बारे में मत्स्य विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. जे. पी. यादव का कहना है कि अब सभी महाविद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों के डिग्री प्रमाण पत्रों की जांच करवाई जाएगी जिसमें किसी को नहीं बख्शा जाएगा।
विद्युत निगम के ग्राम पंचायतों पर 611 लाख रुपए बाकी
अलवर ग्रामीण ञ्च पत्रिका. विद्युत वितरण निगम मालाखेड़ा के ग्राम पंचायतों से बकाया बिजली का बिल वसूलने में पसीने छूट रहे हैं। लाखों रुपए ग्राम पंचायत की तरफ बकाया होने पर कनेक्शन काटने की कार्रवाई करने पर लोग अधिकारियों पर दबाव बनाकर जुड़वाने में लग जाते हैं।
ऐसे में मार्च के महीने तक पंचायत समिति मालाखेड़ा तथा पंचायत समिति उमरैण की ग्राम पंचायतों से शत-प्रतिशत वसूली होना मुश्किल है। जिसका खमियाजा सहायक अभियंता, कनिष्ठ अभियंता तथा तकनीकी सहायक को भुगतना पड़ेगा। मालाखेड़ा विद्युत निगम की 25 ग्राम पंचायतों में 333 बिजली कनेक्शन ट्यूबवेल के दे रखे हैं, जिनके ऊपर 611 लाख 62 हजार 641 बकाया चल रहे हैं। सहायक अभियंता मालाखेड़ा राजीव वीराना का कहना है कि पिछले वित्तीय वर्ष में भी ग्राम पंचायतों ने पूरे बिल नहीं जमा कराए। इस वर्ष तक 25 ग्राम पंचायतों पर 6 करोड़ 11 लाख 62 हजार 641 रुपए का बिजली बिल बकाया चल रहा है। पंचायतों के सरपंच समय रहते बिल जमा नहीं करा रहे हैं।
सरपंच की उदासीनता ग्रामीणों को परेशानी का कारण बन सकती है। गौरतलब है कि ग्राम पंचायत के खाते में राज्य वित्त आयोग तथा केंद्र के 15वें वित्त आयोग के खाते में राशि जमा होती है उसमें से जनहित के लिए जन सेवा करते हुए पेयजल के लगे ट्यूबवेल का भुगतान करने का नियम है लेकिन सरपंच बिल जमा कराने के बजाय उस राशि से विकास कार्य कराते हैं जिसमें उनका निजी हित रहता है।
जमालपुर के सरपंच पति भारत का कहना है पुराने सरपंचों के समय का बिल भी बकाया चल रहा है, उसकी पूर्ति कैसे कर सकते हैं ।
Published on:
22 Feb 2022 09:54 pm
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