
बाघिन एसटी-9 की टैरिटरी सरिस्का बाघ परियोजना के सघन जंगल में होने से फिलहाल बाघिन को ट्रंक्यूलाइज नहीं किया जा सका है। बाघिन को ट्रंक्यूलाइज कर पूंछ का इलाज किया जाना है।
इसके लिए वन्यजीव चिकित्सक कई दिन पूर्व ही सरिस्का पहुंच चुके हैं। वहीं राजगढ़ वन क्षेत्र में घूम रहे एसटी-13 को टं्रक्यूलाइज कर वापस सरिस्का लाने के प्रयास भी जारी हैं।
सरिस्का बाघ परियोजना के डीएफओ बालाजी करी ने बताया कि बाघिन एसटी-9 की मॉनिटरिंग की जा रही है। बाघिन फिलहाल सघन जंगल में है, यहां वाहनों व पिंजरे का पहुंच पाना संभव नहीं है। इस कारण बाघिन के सघन जंगल से बाहर आने का इंतजार किया जा रहा है।
सघन जंगल से बाहर आने पर बाघिन एसटी-9 को ट्रंक्यूलाइज कर पूंछ का इलाज किया जाएगा। इलाज के लिए वन्यजीव चिकित्सक सरिस्का में मौजूद है। उल्लेखनीय है कि बाघिन एसटी-9 की पूंछ में पिछले दिनों चोट लगने से इंफेक्शन हो गया था।
बाघिन को ट्रंक्यूलाइज करने के लिए सरिस्का प्रशासन ने दो स्थानों पर बकरे बांधे हैं तथा पिंजरा भी लगाया है।
वहीं राजगढ़ वन क्षेत्र में बाघ एसटी-13 को ट्रंक्यूलाइज करने के लिए भी सरिस्का की टीम रविवार को पहुंची, लेकिन बाघ के सघन जंगल में होने से वह ट्रंक्यूलाइज नहीं हो सका। वन्यजीव विशेषज्ञों की टीम बाघ को टं्रक्यूलाइज करने को फिर राजगढ़ वन क्षेत्र में जाएगी।
Published on:
26 Jun 2017 04:49 pm
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