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सरिस्का के दो भालुओं को रास आ रही बीलवाड़ी घाटी

चौथा भालू लाया था रणथंभौर अभयारण्य से, वही भालू नहीं आ रहा नजरतीन भालुओं के ही लगा है रेडियो कॉलर, पर्यटकों को कई माह से नहीं हुई साइटिंग

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सरिस्का के दो भालुओं को रास आ रही बीलवाड़ी घाटी

सरिस्का के दो भालुओं को रास आ रही बीलवाड़ी घाटी

सरिस्का के दो भालुओं को बीलवाड़ी घाटी इस कदर भा गई कि वहां से भालू वापस पर्यटक जोन में आने का नाम ही नहीं ले रहे। तीसरा भालू भी पर्यटक जोन से बाहर है लेकिन चौथा भालू नजर नहीं आ रहा है। सरिस्का के पर्यटकों के अलावा गाइड आदि को भी ये भालू नहीं दिख रहा है। हालांकि सरिस्का प्रशासन का कहना है कि चौथा भालू भी सरिस्का रेंज में ही है।
इस तरह लाए गए भालू
साल 2005 में सबसे पहले रणथम्भौर से बाघों को सरिस्का में शिफ्ट किया गया था। उसके बाद पहली बार भालुओं को माउंट आबू और सिरोही के जंगलों से सरिस्का में शिफ्ट किया गया था।
पहली बार में दो भालू आए और उसके बाद एक और लाया गया। शुरूआत से ही ये भालू मुख्य सरिस्का के जंगल की जगह चट्टानों की ओर जाने लगे। वन कर्मियों पर हमला भी किया था। सबसे आखिर में एक साल पहले एक और भालू रणथंभौर अभयारण्य से लाया गया।


यहां जमाया ढेरा
शुरू में लाए गए भालुओं ने अपना एरिया विराटनगर के पास गणेश मंदिर के आसपास को चुना है। यहीं पर बीलवाड़ी घाटी है। यहां से ये भालू नीचे नहीं आ रहे हैं। तीसरे नंबर का भालू दिसंबर माह में दौसा की रेंज तक चला गया था लेकिन बाद में आ गया। चौथे नंबर का भालू किसी को नजर नहीं आ रहा है। बताते हैं कि तीन भालुओं के रेडियो कॉलर लगा है, जिससे उनकी मॉनिटङ्क्षरग आसानी से हो रही है लेकिन चौथे भालू के रेडियो कॉलर नहीं लगा। ऐसे में मॉनिटङ्क्षरग में बाधा आ रही है। सरिस्का प्रशासन दिन में बाइक सवार वनकर्मियों से निगरानी करवा रहा है और रात में जिप्सी से निगरानी हो रही है। उप वन संरक्षक सरिस्का महेंद्र शर्मा से संपर्क करना चाहा लेकिन नहीं हो सका।