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यूआईटी ये काम नहीं कर पाई

शहर के चारों ओर तेजी से गगनचुंबी इमारतें बन रही हैं। कई बनकर तैयार हैं। कई बिल्डर प्लाटिंग कर रहे हैं। उनको ग्राहक भी खूब मिल रहे हैं लेकिन यूआईटी अपनी योजनाओं को पूरी तरह सफल नहीं कर पाई। कॉलोनियों में 400 से ज्यादा भूखंड खाली हैं। करीब एक माह से भूखंडों की बिक्री भी नहीं हो रही है। इससे सवाल खड़े हो रहे हैं कि आखिर यूआईटी के पास इतने संसाधन होने के बाद भी भूखंडों की बिक्री समुचित क्यों नहीं हो पाई?

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अलवर

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susheel kumar

Feb 14, 2024

यूआईटी ये काम नहीं कर पाई

यूआईटी ये काम नहीं कर पाई

शहर के चारों ओर बिल्डरों ने बना दी गगनचुंबी इमारतें...यूआईटी योजनाओं में भूखंड नहीं बेच पाई
- अंबेडकर नगर, विज्ञान नगर, शालीमार में 400 से ज्यादा भूखंड खाली
- इन कॉलोनियों का रकबा है 300 हेक्टेयर से ज्यादा, एक माह से बिक्री थी बंद

शहर के चारों ओर तेजी से गगनचुंबी इमारतें बन रही हैं। कई बनकर तैयार हैं। कई बिल्डर प्लाटिंग कर रहे हैं। उनको ग्राहक भी खूब मिल रहे हैं लेकिन यूआईटी अपनी योजनाओं को पूरी तरह सफल नहीं कर पाई। कॉलोनियों में 400 से ज्यादा भूखंड खाली हैं। करीब एक माह से भूखंडों की बिक्री भी नहीं हो रही है। इससे सवाल खड़े हो रहे हैं कि आखिर यूआईटी के पास इतने संसाधन होने के बाद भी भूखंडों की बिक्री समुचित क्यों नहीं हो पाई?

यूआईटी ने अंबेडकर नगर की नीव करीब 15 साल पहले रखी थी। 150 हेक्टेयर से ज्यादा रकबा इस कॉलोनी का है। कॉलोनी में अभी तक 60 फीसदी ही भूखंड बिक पाए। बाकी 40 फीसदी भूखंड बचे हैं। जयपुर मार्ग पर ये कॉलोनी है। प्राइम लॉकेशन के बाद भी भूखंड पूरे नहीं बिक पाए। हालांकि अप्रेल 2023 से लेकर अक्टूबर 2023 तक करीब 60 करोड़ के भूखंडों की बिक्री जरूर की है। इसी तरह शालीमार व विज्ञान नगर कॉलोनियां एक दशक पुरानी हैं। इनका भी रकबा 55 फीसदी से ज्यादा खाली है। भूखंडों की समुचित बिक्री यहां भी नहीं हो पाई। एक्सपर्ट धर्मेंद्र शर्मा का कहना है कि ग्राहक तभी आते है जब कॉलोनियों में सड़क, बिजली, पानी, पार्क से लेकर अन्य सुविधाएं हों। यूआईटी ने अब जाकर इन पर ध्यान दिया है जबकि ये बेसिक जरूरत थी। इस पर काम करना जरूरी था, जो कमी रही। यूआईटी के एक अधिकारी का कहना है कि भूखंडों की बिक्री लगातार बढ़ रही है। लोग भूखंड खरीद रहे हैं।

ये कॉलोनियां आबाद हुईं
यूआईटी की सूर्य नगर, बुद्ध विहार कॉलोनी, हसन खां मेवात नगर लगभग आबाद हो गई हैं। यहां पूरी बसावट हो गई है। बताते हैं कि इन कॉलोनियां में भी बुनियादी जरूरतों को बाद में ही यूआईटी ने ध्यान दिया।