27 मई 2026,

बुधवार

Patrika Logo
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

विवि की लापरवाही: हिंदी की परीक्षा देने गए परीक्षार्थियों के पेपर देखते ही उड़े होश

शिक्षा विभाग... स्नातक प्रथम सेमेस्टर परीक्षा में हुई चूक, कई लोग आ गए कठघरे में

2 min read
Google source verification

अलवर

image

mohit bawaliya

Feb 14, 2024

विवि की लापरवाही: हिंदी की परीक्षा देने गए परीक्षार्थियों के पेपर देखते ही उड़े होश

अलवर. परीक्षा के दौरान अंग्रेजी माध्यम में पेपर।

राजर्षि भर्तृहरि मत्स्य विश्वविद्यालय की ओर से आयोजित स्नातक प्रथम सेमेस्टर परीक्षा में एक बार फिर चूक हुई है। ङ्क्षहदी माध्यम के विद्यार्थियों को अंग्रेजी माध्यम का पेपर थमा दिए गए। ये मामला विश्वविद्यालय तक पहुंचा तो कई लोग कठघरे में आ गए।
मंगलवार को विद्यार्थियों की कंप्यूटर परीक्षा का पेपर अंग्रेजी माध्यम में मिला। इसे देखकर सभी विद्यार्थी चौंक गए। पेपर हल करने में विद्यार्थियों के पसीने आ गए। क्योंकि विद्यार्थियों की ओर से ङ्क्षहदी माध्यम में दाखिला लिया गया था और परीक्षा के दौरान पेपर अंग्रेजी माध्यम में मिला। बताया जाता है विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से आयोजित सेमेस्टर परीक्षा के दौरान ये विश्वविद्यालय की दूसरी गलती सामने आई है। इससे पहले विश्वविद्यालय ने जारी किए एडमिट कार्ड में परीक्षा का समय गलत ङ्क्षप्रट किया था और अब कम्प्यूटर परीक्षा में केवल एक माध्यम में पेपर को देकर सभी विद्यार्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया है। इसको विश्वविद्यालय के अधिकारियों ने स्वीकारा। पेपर दोनों माध्यमों (ङ्क्षहदी और अंग्रेजी) में होना चाहिए था, लेकिन पेपर केवल अंग्रेजी माध्यम में ही ङ्क्षप्रट हुआ है। परीक्षा को लेकर छात्र नेताओं ने बताया कि विश्वविद्यालय प्रशासन विद्यार्थियों का भविष्य खराब करने पर तुला हुआ है। विश्वविद्यालय के अधिकारियों की गलती विद्यार्थियों को भुगतनी पड़ती है। इसमें स्नातक से लेकर पीएचडी करने वाले विद्यार्थी शामिल हैं।

दोबारा हो सकती है परीक्षा
विश्वविद्यालय गडबडियों को लेकर लगातार चर्चाओं में रहता है। अब स्नातक प्रथम सेमेस्टर परीक्षाओं को लेकर विवादों में आ गया है। ङ्क्षहदी माध्यम के विद्यार्थियों को अंग्रेजी माध्यम पेपर थमाने के बाद विश्वविद्यालय के अधिकारी विद्यार्थियों की कुंडली खंगालने में जुट गए हैं। इसमें विद्यार्थियों की गिनती लगाई जा रही है कि प्रथम सेमेस्टर के दौरान कितने विद्यार्थियों ने ङ्क्षहदी में व कितने विद्यार्थियों ने अंग्रेजी में दाखिला लिया है। बताया जाता है कि विश्वविद्यालय प्रशासन ङ्क्षहदी माध्यम वाले विद्यार्थियों की दोबारा परीक्षा करवा सकता है। इसमें अंग्रेजी माध्यम से दाखिला लेने वाले विद्यार्थियों को दोबारा मौका नहीं दिया जाएगा।

विश्वविद्यालय की ओर से परीक्षा के दौरान चूक हुई है। अगर विद्यार्थी लिखित में विश्वविद्यालय को शिकायत देते हैं तो ङ्क्षहदी माध्यम वाले विद्यार्थियों की परीक्षा दोबारा हो सकती है।
प्रो. शील ङ्क्षसधु पांडेय, कुलपति, मत्स्य विश्वविद्यालय।