
प्रधानमंत्री मोदी भी हैं ऊषा चौमर के कायल, बंधवा चुके हैं राखी, स्वच्छता के लिए भी किया सम्मानित
अलवर. Usha Chaumar Padma Shri : अलवर जिले की ( Usha Chaumar ) ऊषा चौमर को इस साल देश का चौथा सर्वोच्च नागरिक सम्मान ( Usha Chaumar padma Shri ) पद्मश्री मिलने जा रहा है। ( Usha Chaumar ) ऊषा चौमर पहले मैला ढोती थी, लेकिन बाद में वो स्वच्छता की राह पर चल पड़ी और परिवार में इस काम को बंद कराया। इस कार्य को बंद कराने के बाद वे स्वच्छता को बढ़ावा देने में जुट गई। इस कार्य के बाद वे अमरीका, पेरिस, दक्षिण अफ्रीका और लंदन की यात्रा कर चुकी है। प्रधानमंत्री मोदी ऊषा को वर्ष 2015 में स्वच्छता के लिए सम्मानित भी कर चुके हैं। इसके बाद उन्होंने वेदों की रचनाएं सीखी और प्रधानमंत्री के समक्ष वेदों का पाठ भी किया।
कभी सपने में भी नहीं सोचा
पत्रिका से बातचीत के दौरान ऊषा ने कहा कि उन्होंने कभी सपने में भी नहीं सोचा कि उन्हें यह सम्मान मिल पाएगा। ऊषा चौमर अपने जीवन में बदलाव के साथ कई महिलाओं के जीवन में बदलाव ला चुकी हैं। अब वो मैला ढोने को छोड़कर आचार, जूट के थेले, पापड़ आदि बनाने का कार्य करती हैं। इससे कई महिलाओं को रोजगार भी मिल रहा है।
10 साल की उम्र में हो गई थी ऊषा की शादी
ऊषा चौमर का विवाह 10 साल की उम्र में हुआ था। मैला ढोने के कारण उन्हें अछूत के तौर पर देखा जाता था। ऊषा की जिंदगी में यह बदलाव तब आया जब वे वर्ष 2003 में सुलभ इंटरनेशनल संस्था से जुड़ीं। सुलभ इंटरनेशनल से जुडकऱ उन्होंने न केवल मैला ढोने के कार्य का विरोध उसे छोड़ा, बल्कि लोगों को स्वच्छता के लिए प्रेरित भी किया। उन्हें ब्रिटिश एसोसिएशन ऑफ साउथ एशियन स्टडीज (बीएएसएएस) के सालाना सम्मेलन में स्वच्छता और भारत में महिला अधिकार विषय पर संबोधित करने के लिए आमंत्रित किया गया था।
Published on:
26 Jan 2020 03:19 pm
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