
application for fruit and ganga water in court
अलवर.
एसीजेएम संख्या तीन के न्यायाधीश प्रवीण कुमार मिश्रा ने सोमवार को फलाहारी बाबा को केन्द्रीय जेल अलवर में गंगाजल व फल उपलब्ध कराने के प्रार्थना पर सुनवाई कर पहले जेल अधीक्षक के समक्ष प्रार्थना पत्र प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।
एडवोकेट अशोक कुमार शर्मा ने न्यायिक अभिरक्षा के दौरान फलाहारी बाबा को केन्द्रीय जेल में फल व गंगाजल उपलब्ध कराने के लिए एसीजेएम संख्या तीन में प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया गया था। इस पर न्यायाधीश प्रवीण कुमार मिश्रा ने प्रार्थना पत्र पहले जेल अधीक्षक को प्रस्तुत करने के निर्देश देते हुए कहा कि वे अपने विवेक से इस मामले में निणर््य लेने में सक्षम हैं। यदि जेल अधीक्षक के निर्णय से वे संतुष्ट नहीं हो, तो न्यायालय में प्रार्थना पत्र दे सकते हैं।
एडवोकेट शर्मा ने कहा कि राजस्थान प्रिजंस 1951 के नियम 223 के तहत विचाराधीन कैदी निजी तौर पर अपने भोजन व बिस्तर की व्यवस्था कर सकता है। नियमानुसार खाद्य पदार्थ स्वास्थ्य के लिए हानिकारक नहीं होने चाहिए। कैदी को उपलब्ध कराए जाने वाले खाद्य पदार्थ व सामान की जांच जेल प्रशासन की ओर से की जाएगी।
इलेक्ट्रोनिक उपकरण जांच को भेजे
यौन शोषण प्रकरण की जांच के दौरान पुलिस को फलहारी बाबा के आश्रम से मिले इलेक्ट्रोनिक उपकरणों को जांच के लिए लैब में भेजा गया है। पुलिस को बाबा के आश्रम से मोबाइल फोन, लैपटॉप व अन्य इलेक्ट्रोनिक उपकरण मिले थे, जिन्हें जांच को लैब में भेजा गया है।
नमूने जांच को भेजे
मेडिकल बोर्ड ने स्वास्थ्य जांच के दौरान फलाहारी बाबा के लिए गए सैम्पलों को भी जांच के लिए लैब भेजा गया है। केन्द्रीय जेल में बाबा को पूरी तरह स्वस्थ बताया गया है। जेल में फलाहारी बाबा अन्य बंदियों के साथ रह रहे हैं। हालांकि वे अब भी भोजन नहीं ले रहे हैं। जेल प्रशासन ने फलाहारी बाबा को जेल मैन्युअल के मुताबिक भोजन लेने को कहा, लेकिन उन्होंने मना कर दिया।
खाने में फल व पानी की जगह गंगाजल पीने वाले फलाहारी बाबा को अब गंगाजल की जगह जेल का पानी पीना पड़ रहा है। यौन शोषण के आरोप में न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेजे गए फलाहारी का केन्द्रीय कारागार में पहला दिन काफी कष्टप्रद निकला। फलाहारी के गंगाजल मांगने पर जेल प्रशासन ने उन्हें जेल मैन्युअल का हवाला देकर लोटा थमा दिया। शनिवार शाम 4 बजकर 25 मिनट पर जेल में प्रवेश करने के बाद जेल प्रशासन ने वैसे तो सुरक्षा की दृष्टि से बाबा को जेल के वार्ड नम्बर-1 की बैरक में ठहराया, लेकिन इस बैरक में पूरी रात बाबा करवटें बदलते रहे।
लग्जरी गाड़ी, मोटे-मोटे गद्दों एवं आलीशान कमरों में रहने व सोने वाले बाबा को जेल में रात बिताने के लिए धरती और सिर छिपाने के लिए कम्बल मिला। जेल में पूरी रात बाबा कभी बैरक की दीवारों तो कभी दरवाजे को निहारते रहे। सोने का प्रयास किया तो मच्छर दुश्मन बन गए। जैसे-तैसे रात करीब 11.30 बजे बाबा ने कम्बल ओढ़ सोने का प्रयास किया तो गर्मी व हिचकोले खाते पंखें से नींद नहीं आई और पूरी रात बाबा ने करवटें बदल-बदल कर काटी।
साथी बंदियों ने खिलाए दो केले
हर बार आरती के बाद श्रद्धालुओं को बदल-बदल कर प्रसाद देने वाले फलाहारी को जेल में बंदियों से मांगकर केले खाने पड़े। सूत्रों के अनुसार जेल में शनिवार शाम को बाबा ने खाना नहीं खाया। जेल प्रशासन के अनुरोध के बाद भी बाबा के खाना नहीं खाने पर जेल में नवरात्र कर रहे बंदियों ने बाबा को केले दिए। पहले तो बाबा ने मना कर दिया, लेकिन बाद में एक बंदी से दो केले लेकर खा लिए।
सुबह गिनती में शामिल हुए बाबा
रविवार सुबह 4 बजे ही बाबा जाग गए। बैरक का दरवाजा नहीं खुलने पर वे लेटे-लेटे ही कभी छत तो कभी दरवाजे की ओर झांकते रहे। इस दौरान उनके कुछ साथी बंदी भी जाग गए, जिनसे बाबा ने पूछा कि जेल (बैरक) कब खुलेगी? इस पर साथी बंदियों ने बताया कि सुबह करीब ६ बजे गिनती के समय दरवाजा खुलेगा। सुबह गिनती में बाबा भी अन्य बंदियों के साथ शामिल हुए।
बाबा ने भी कटवाई कैंटीन की पर्ची
जेल में कैदियों की सुविधा के लिए खोली गई कैंटीन की रविवार को बाबा ने भी पर्ची कटवाई। बाबा के एक कथित भतीजे ने जेल पहुंच कैंटीन से सामान खरीद के लिए १४०० रुपए जमा कराए। गौरतलब है कि जेल कैंटीन से बंदी एक माह में अधिकतम 1400 रुपए का सामान खरीद सकता है। इसमें दूध, छाछ, साबुन, सर्फ, कोल्डड्रिंक, बिस्कुट, नमकीन आदि शामिल हैं।
अब ७ दिन तक करना पड़ेगा इंतजार
बाबा से जेल में अब सात दिन तक कोई भी भक्त या शिष्य नहीं मिल सकेगा और न ही कोई खाद्य सामग्री पहुंचा सकेगा। जेल नियमों के अनुसार विचाराधीन बंदी से उसके परिजन अथवा सगे-संबंधी सात दिवस में केवल एक बार मिल सकते हैं। इसमें भी अधिकतम तीन लोगों के मिलने का प्रावधान है। वहीं, सजायाफ्ता बंदी से 15 दिवस में एक बार मिलान का प्रावधान है। बाबा से रविवार को दो लोगों के मिलान के बाद अब अगले सात दिन तक कोई भी भक्त या शिष्य उनसे नहीं मिल सकेगा।
जेल में खेल- बाहर से पहुंच रहा सामान
नियमानुसार किसी भी जेल में बाहर से खाने-पीने का कोई सामान नहीं पहुंच सकता, लेकिन बात जब अलवर जेल की आती है तो यहां सब कुछ चलता है। केन्द्रीय कारागार अलवर में बंदियों से मिलने आने वाले परिजन सेब, अनार सहित थैला भर-भरकर सामान लाते हैं। मिलान के बहाने यह सामान भी बिना जांचे-परखे बंदियों तक पहुंच रहा है। केन्द्रीय कारागार में वैसे तो बंदियों से मिलने आने वालों की जांच के लिए आरएसी तैनात है। जूते-चप्पल, कच्छा, बनियान आदि के अलावा जेल में खाने-पीने की वस्तुएं नहीं ले जाने का प्रावधान भी है, लेकिन यहां सब कुछ चलता है।
रविवार को जेल प्रशासन ने जेल नियमों का हवाला देकर ना मीडिया से बात की और न जेल में बंद बाबा से मीडियाकर्मियों को मिलने दिया, लेकिन बाबा से मिलने आने वालों सहित अन्य बंदियों के परिजनों को थैला भर-भरकर सामान सहित अन्दर जाने दिया। जांच के नाम पर इनसे केवल यह पूछा गया कि थैले-थैलियों में क्या है? फल-फ्रूट आदि बताने पर कहा-अच्छा जाओ। फलाहारी बाबा से मिलने पहुंचे भक्त भी अनार, सेब आदि भरकर लाए। इन्हें किसी ने रोकना-टोकना मुनासिफ नहीं समझा। डॉक्टर के लिखने या मजिस्ट्रेट के आदेश पर ही बंदियों को जेल मैन्युअल से पृथक सामान मिलता है। इस सामान को भी जेल की कैन्टीन से लेने का प्रावधान है।
दिल्ली से मिलने आया भक्त
फलाहारी बाबा से जेल में मिलने रविवार को दिल्ली के रमापार्क किशनगंज पदमनगर निवासी व्यापारी सुनील दत्त पुत्र सूरजभान यादव व 2/476 कालाकुआं हाउसिंग बोर्ड अलवर निवासी देवी प्रसाद गुप्ता पुत्र लक्खी राम जेल पहुंचे। वे अपने साथ सेब, अनार, धोती, नारियल आदि लाए। जेल प्रशासन ने इनमें से जेल मैन्युअल का हवाला देकर नारियल को गेट पर रखवा दिया।
इस केस में क्या होता है?
सुबह बाबा चिंतित मुद्रा में कुछ देर वार्ड के चबूतरे व उसके आस-पास भी घूमे। इस दौरान उन्होंने साथी बंदियों से पूछा कि इस केस में क्या होता है? इस पर बंदियों ने बताया कि ऐसे केस में आजीवन कारावास की सजा भी हो सकती है। इतना सुनते ही बाबा फिर से चिंतामग्न हो गए।
न नहाए और न की पूजा-अर्चना
आमतौर पर बिना स्नान व पूजा-पाठ के कोई भी कार्य नहीं करने वाले फलाहारी बाबा जेल में अपनी पहली सुबह पर न नहाए और न ही पूजा-अर्चना की। पूरे दिन वे कम्बल ओढ़ लेटे रहे। कभी-कभार कम्बल से मुंह बाहर निकाल वे इधर-उधर देख लेते थे। जेल में सुबह नाश्ते में उन्हें अन्य बंदियों की भांति मीठा दलिया दिया गया, जिसे बाबा ने नहीं खाया। दोपहर में उनके दो अनुयायी सेब, अनार, धोती आदि लेकर जेल पहुंचे, जिन्हें जेल प्रशासन ने बाबा तक पहुंचा दिया।
दो बार हुई जांच, लगी ग्लूकोज की बोतल
जेल में दो बार डॉक्टरों ने फलाहारी बाबा के स्वास्थ्य की जांच की। इसमें एक बार शनिवार को जेल में प्रवेश करते ही बीपी सहित अन्य छोटी जांच हुई। वहीं रविवार सुबह ब्लड शूगर सहित अन्य जांच हुई। सभी जांच सामान्य पाई गई। बाबा जेल में भी भूखे रहे। इसलिए दोपहर में उन्हें ग्लूकोज की बोतल लगानी पड़ी। इस दौरान उन्हें बैरक के पास अलग कमरे में ले जाया गया। ग्लूकोज बोतल हटाने के बाद बाबा को फिर से उनकी बैरक में लाया गया।
कैसे होगा क्रॉस मैच?
मेडिकल बोर्ड ने स्वास्थ्य जांच के दौरान बाबा के ब्लड व थूक का सैम्पल लिया। इसका पीडि़ता के सैम्पल से मिलान करने की बात कही गई है, लेकिन पीडि़ता की बिलासपुर में स्वास्थ्य जांच के दौरान क्या सैम्पल लिया गया, इसकी चिकित्सा विभाग के पास कोई जानकारी नहीं है।
जेल अधिकारी बात करने को तैयार नहीं
फलाहारी बाबा को न्यायिक अभिरक्षा में भेजे जाने के बाद जेल अधिकारियों ने फोन उठाने बंद कर दिए। अधिकारियों ने मोबाइल स्विच ऑफ कर लिए तथा बेसिक फोन पर भी बात नहीं की। वहीं र िववार को मीडिया को जेल परिसर में प्रवेश की अनुमति नहीं दी गई तथा कोई अधिकारी बात करने को भी तैयार नहीं हुआ। जबकि रविवार को बंदियों से मिलने का दिन था।
ये है जेल का मैन्यू
जेल में सभी बंदियों को सुबह ६ बजे चाय।
७ बजे रोज बदल-बदल कर नाश्ता (पोहे, उबले चने, मौठ, मंूग, मीठा दलिया, नमकीन दलिया आदि)।
सुबह १० बजे खाना (दाल, सब्जी तथा 550 ग्राम आटे की रोटियां विचाराधीन को तथा दाल, सब्जी तथा ६०० ग्राम आटे की रोटियां सजायाफ्ता को)।
दोपहर 3 बजे फिर से चाय तथा शाम 5 बजे खाना।
Updated on:
25 Sept 2017 07:09 pm
Published on:
25 Sept 2017 06:28 pm
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