
5 arcades together in garu village
अलवर.
शिवाजी पार्क में एक ही परिवार के पांच जनों की नृशंस हत्या के बाद मंगलवार दोपहर पुलिस ने सभी मृतकों का पोस्टमार्टम करा शव परिजनों को सौंप दिया। परिजन सभी शवों को लेकर अपने पैतृक गांव गारू (कठूमर) पहुंचे। गांव में एक साथ पांच शवों के पहुंचते ही हर कोई शोक में डूब गया। शाम करीब पांच बजे सभी पांचों मृतकों की अर्थियां बनाई गई। मासूमों के शवों को देख गांव की महिलाओं का रुदन फूट पड़ा।
ग्रामीणों की आंखें आंसूओं से नम हो गई। श्मशान में पांचों अर्थियों को एक चिता पर लिटाया गया। मृतक बनवारी के छोटे भाई मुकेश के बेटे विनय ने सभी मृतकों को मुखाग्नि दी। इस दौरान सभी ग्रामीणों की जुबां पर एक ही बात थी कि एेसी अनहोनी क्षेत्र में पहली बार हुई है।
परिवार में सबसे बड़े थे बनवारी के पिता
मृतक बनवारी उर्फ बबली शर्मा के पिता व चाचा कुल चार भाई हैं, जिनमें मुरारी शर्मा सबसे बड़े तथा विशना शर्मा, बाबू शर्मा व कैलाश शर्मा उनसे छोटे है। इनमें से बाबू अपने विवाहोपरान्त से ही अपनी ससुराल में जाकर बस गया। जिसे आज तक ग्रामवासियों ने भी नही देखा। चारों भाई में सबसे छोटे भाई कैलाश को छोडकर बाकि तीनो भाई जमीदारा कर अपना भरण पोषण करते थे। जबकि कैलाश रोडवेज में चालक के पद पर कार्यरत था। चारों भाइयों की गांव में जमीन भी थी, जिसमें से चारो भाइयों के पक्के बीघा की कुल तीन-तीन बीघा जमीन हिस्से में आई हुई थी।
चारों भाइयों में जमीन का बंटवारा आपसी समझाइश से हुआ था। जबकि कागजो में कोई बंटवारा नहीं था। चूंकि बाबू के गांव में नही रहने के कारण उसने अपनी जमीन को बडे भाई बिशना को बट पर दे दिया। गारू में मुरारी, बिशना व कैलाश तीनों भाइयों के दो घर है जिनमें से मुरारी व बिशना एक घर में रहते है, वहीं कैलाश उनके मकान से करीब दो सौ फीट की दूरी पर अपने घर में रहता है। मुरारी शर्मा का बड़े बेटे बनवारी उर्फ बबली व छोटे बेटे मुकेश की १९९४ में राजगढ़ तहसील स्थित रैणी थाना के ग्राम डेरा निवासी संतोष व कविता के साथ शादी हुई। बनवारी करीब १३-१४ साल पहले पत्नी संतोष व बच्चों के साथ अलवर आ गया और एक निजी कंपनी में कार्य करने लगा। इसके बाद करीब ४-५ साल बाद उसके पिता, माता व छोटा भाई मुकेश एवं उसकी पत्नी तथा बच्चे भी अलवर आ गए। छोटा भाई मुकेश हारमोनियम व ढोलक वादक था।
कठूमर थाने तक पहुंचा जमीन का विवाद
बनवारी के पिता मुरारी ने अलवर आने पर अपने हिस्से की जमीन छोटे भाई कैलाश को बट पर दे दी। इसके बाद मुरारी व उसके परिवार के सदस्य कभी कभार ही गांव आते थे। करीब दो साल पहले बनवारी की पत्नी ने जमीन के बंटवारे की बात कही। इसे लेकर उसकी चाचा बिशना व कैलाश से कहासुनी भी हुई। बाद में संतोष जमीन के बंटवारे व मारपीट की रिपोर्ट दर्ज कराने कठूमर थाने भी पहुंची। लेकिन बाद में ग्रामीणों ने दोनों पक्षों से समझाइश कर मामला शांत करा दिया।
घरवाले एेसा नहीं कर सकते
ग्रामीण जमीनी विवाद में हत्या के अंदेशे को सिरे से नकार रहे हैं। ग्रामीणों के अनुसार बनवारी के परिवारीजन जमीन को लेकर इतने घटिया स्तर तक नहीं उतर सकते। ग्राम के सरपंच रमेश चंद व जिला पार्षद हरिओम कटारा ने बताया कि मृतक के पिता व उसका परिवार पिछले कई सालो से गांव में नही रहत, जबकि उसके दोनो चाचा बिशना व कैलाश यहीं रहते थे। उनका स्वभाव व चाल चलन सही है। वो इस तरह की कोई भी घटना को अंजाम नही दे सकते। कई मर्डर खोलने वाला किलो भी हुआ फेल घटना के खुलासे के लिए पुलिस ने सीआईडी सीबी का डॉग कीलो बुलाया। बेल्जियम शैफर्ड यह डॉग अब तक मर्डर की कई वारदातें खोल चुका है, लेकिन मंगलवार को कीलो भी फेल हो गया। कीलो घटनास्थल के आस-पास घूम वापस उसी घर में लौट आया। कीलो के फेल होने पर पुलिस ने इसे वापस भेज दिया।
Published on:
04 Oct 2017 06:12 pm
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