1 जनवरी 2026,

गुरुवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

मेरी खबर

icon

प्लस

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

Video : जगन्नाथ रथयात्रा महोत्सव : आज इंद्र विमान में जाएंगे भगवान जगन्नाथ

आज गाजे बाजे के साथ शाम 7 बजे पुराना कटला स्थित जगन्नाथ मंदिर से रवाना होगी। शहर के मुख्य रास्तों से होते हुए रूपबास स्थित रूप हरि मंदिर में पहुंचेगी। तीन दिनों तक रूपबास में मेला भरेगा। चार जुलाई को जानकी जी के साथ उनका विवाह होगा। हजारों लोग बाराती बनेंगे व रूपबास क्षेत्र व शहर के हजारों लोग जानक

7 min read
Google source verification

image

aniket soni

Jul 02, 2017

जगन्नाथपुरी के बाद देश में अपना अलग स्थान रखने वाले अलवर के भगवान जगन्नाथ की शोभायात्रा रविवार को गाजे बाजे के साथ शाम 7 बजे पुराना कटला स्थित जगन्नाथ मंदिर से रवाना होगी। शहर के मुख्य रास्तों से होते हुए रूपबास स्थित रूप हरि मंदिर में पहुंचेगी। तीन दिनों तक रूपबास में मेला भरेगा।

चार जुलाई को जानकी जी के साथ उनका विवाह होगा। हजारों लोग बाराती बनेंगे व रूपबास क्षेत्र व शहर के हजारों लोग जानकी जी का कन्यादान करेंगे। अलवर में सालों से यह परम्परा चली आ रही है। पहले अलवर के राजा खुद पूजा करते थे। छोटे रथ में हाथी व घोड़ों के साथ सवारी निकली थी। अब उसका स्वरूप बदल गया है।

इंद्र विमान में जाएंगे भगवान जगन्नाथ

भगवान जगन्नाथ की सवारी इंद्र विमान में निकालेगी। लकड़ी के चार पहियों का विशाल आकार वाले इंद्रविमान पर मखमली कपडे़ आदि से सजावट की गई है। रंग बिरंगी बिजली की रोशनी और रथ में चारों ओर हरे भरे पौधे वाले गमले रथ का विशेष आकर्षण होंगे। इंद्रविमान की रेलिंग के चारों तरफ सुंदर सजावट की गई है। रथ में ऊपर जाने के लिए पहले व दूसरे मंजिल पर सीढि़या बनी हुई है।

विवाह की अन्य रस्में भी होंगी

विवाह से पहले भगवान के विवाह की अन्य रस्में अदा की जाएगी। भगवान जगन्नाथ की रथ पुराना कटला स्थित जगन्नाथ मंदिर से शाही लवाजमें के साथ रवाना होगा। जिला कलक्टर व एसपी मंदिर में आरती करेंगे, उसके बाद प्रतिमा को रथ में रखा जाएगा। इस दौरान बूढ़े जगन्नाथ की प्रतिमा मंदिर में रखी जाती है।

पहले छोटे रथ में जाते थे भगवान जगन्नाथ

अलवर निवासी 85 वर्षीय गिर्राज प्रसाद जांगिड बताते हैं कि पहले भगवान जगन्नाथ की शोभायात्रा करीब दो दशक पुरानी है। पहले भगवान जानकी मैया वाले रथ में विराजमान होकर रूपबास जाया करते थे। यह रथ मंदिर को दे दिया गया। अब छोटे रथ में जानकी मैया की सवारी निकलती है और बडे़ रथ में भगवान जगन्नाथ जाते हैं।

उन्होंने बताया कि राजगढ़ में भी भगवान जगन्नाथ की सवारी निकलती है। इसके लिए पहले अलवर से ही रथ जाया करते था। वहां से रथयात्रा खत्म होने पर अलवर में अष्टमी को रथ वापस आता था। इसके बाद नवमी को इसमें भगवान जगन्नाथ की सवारी निकलती थी।

विभिन्न स्वरूपों की झांकी होगी शामिल

शोभायात्रा में पानी की प्याऊ, भगवान के विभिन्न स्वरूपों की झांकियां शामिल होगी। विशेष आकर्षण एस्कॉन मंडली रहेगी जो हरे रामा हरे कृष्णा का गान करते हुए चलेगी। साथ में ही राजस्थानी संस्कृति और लोक संगीत से जुड़ी झांकियां शामिल होंगी। मेले में विभिन्न समाजों के अखाडे़ रथयात्रा में सीने पर पत्थर तोडऩा, कुंडल चलाना, बनेठी चलाना आदि का प्रदर्शन करेंगे।

मार्ग के 55 मंदिरों में होगी आरती

रथयात्रा के दौरान मार्ग में आने वाले प्रत्येक मंदिर में भगवान जगन्नाथ की आरती की जाएगी। मंदिरों के पुजारी भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा का बड़ी बेसब्री से इंतजार करते हैं। जैसे ही भगवान का रथ मंदिर के पास पहुंचता है, तो पूजा अर्चना की जाती है। इसके लिए पूजारी देर रात तक जागते रहते हैं। रथयात्रा मार्ग के दौरान पुराना कटला सुभाष चौक, त्रिपोलिया, होपसर्कस, मन्नी का बड़, कंपनी बाग, नंगली चौराहा से होता हुई एसएमडी सर्किल, मोती डूंगरी से भवानी तोप होते हुए रूपबास स्थित मंदिर पर पहुंचेगी।

राजाओं की सवारी रहा है इंद्र विमान

इतिहासकार हरिशंकर गोयल बताते हैं कि सन 1845 में तिजारा महाराजा बलवंत सिंह के निसंतान स्वर्गवासी होने पर तिजारा का अलवर राज्य में विलय कर दिया गया था। तिजारा राज्य 1826 से 1845 तक अस्तित्व में रहा। वर्ष 1826 से पूर्व तथा 1845 के बाद वह अलवर का हिस्सा रहा। तब तिजारा से भवानी तोप और इंद्र विमान को अलवर लाया गया। इंद्र विमान के अलवर में आने पर इसमें महाराजा विनय सिंह, श्योदान सिंह, मंगल सिंह तथा जयसिंह के राजशाही सवारी की शोभायात्रा में था। इन राजाआें ने इंद्रविमान में अपनी अनेक राजकीय यात्राएं की थी।

जौनार के लिए एडवांस बुकिंग

हिंदू रीति रिवाजों में शादी विवाह के दौरान शादी वाले घर में जौनार चलती है। इसमें सबको भोजन करवाया जाता है। इसी के अनुसार जगन्नाथ भगवान व जानकी मैया के विवाह पर भक्तों की ओर से जौनार दी जाती है। रथयात्रा के शुरू होने से लेकर रथयात्रा के वापस लौटने तक रूपबास स्थित मंदिर में प्रतिदिन जौनार का आयोजन किया जाता है।

मेला स्थल पर रहेगी 24 घंटे व्यवस्था

मेला स्थल पर 24 घंटे लोगों के इलाज की सुविधा मिलेगी। स्वास्थ्य विभाग की तरफ से मेला स्थल पर डॉक्टरों की टीम लगाई गई है। जो लोगों को स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराएगी। इसके अलावा मरीजों को अस्पताल लाने के लिए एम्बुलेंस की व्यवस्था रहेगी। सामान्य अस्पताल में मेले को देखते हुए खास इंतजाम रखे गए हैं। जिससे मरीजों को तुरंत इलाज मिल सके।

ट्रै्रेफिक रहेगा डायवर्ट

जगन्नाथ रथ यात्रा के दौरान शहर में ट्रेफिक डायवर्ड रहेगा। पुलिस उपाधीक्षक यातायात सुरेश यादव ने बताया कि 2 जुलाई को जगन्नाथ रथयात्रा के दौरान शाम 6 बजे से अशोका टॉकीज से त्रिपोलिया तथा होपसर्कस से त्रिपोलिया जाने वाले मार्ग पर यातायात बंद रहेगा।

यात्रा के होपसर्कस पहुंचने पर कंट्रोल रूम, चर्च रोड व कांशीराम चौराहा की ओर से होपसर्कस आने वाले यातायात को रोका जाएगा। यात्रा के कम्पनी बाग के आस-पास पहुंचने पर बिजलीघर से नंगली सर्किल आने वाले ट्रेफिक को डायवर्ड कर रेलवे स्टेशन होते हुए निकाला जाएगा। वहीं, एसएमडी की ओर से आने वाले ट्रेफिक को अन्वेषण भवन के पास रोक डायवर्ड किया जाएगा।

यात्रा के भवानी तोप पहुंचने से पहले रूपबास, कालीमोरी सहित अन्य मार्गों से आने वाले ट्रेफिक को भूगोर व घोड़ाफेर चौराहा सहित अन्य मार्गों से डायवर्ट किया जाएगा। उन्होंने बताया कि जैसे-जैसे रथयात्रा आगे बढ़ती जाएगी। ट्रेफिक सामान्य होता जाएगा। जगन्नाथ यात्रा के लौटने पर भी यहीं व्यवस्था रहेगी। उन्होंने बताया कि जगन्नाथ मेले के दौरान भवानी तोप से रूपबास एवं कटीघाटी से रूपबास आने वाले मार्ग पर प्रवेश पूर्णतया निषेघ रहेगा।

भगवान को दिया जाता है गॉर्ड ऑफ ऑनर

जिस तरह से अलवर में आने वाले विशेष सरकारी मेहमान को प्रशासन की ओर से विशेष सलामी उसी तरह से भगवान जगन्नाथ को विशेष सरकारी मेहमान का दर्जा प्राप्त है। इसी तरह से भगवान जगन्नाथ को रथयात्रा के दौरान मंदिर से बाहर आते ही, उन्हें पुलिस की ओर से गॉर्ड ऑफ ऑनर की सलामी दी जाती है। माता जानकी व भगवान सीताराम जी को भी गार्ड ऑफ ऑनर दिया जाएगा।

चार को रहेगा सार्वजनिक अवकाश

जगन्नाथ रथयात्रा के दौरान जिला प्रशासन की ओर से प्रतिवर्ष सार्वजनिक अवकाश घोषित किया जाता है। इस बार 4 जुलाई को जिला कलक्टर की ओर से सार्वजनिक अवकाश की घोषणा की गई है। इसदिन बड़ी संख्या में लोग मेला स्थल पर पहुंचकर भगवान जगन्नाथ के दर्शन करते हैं।

बूढ़े जगन्नाथ के होंगे दर्शन

पुराना कटला स्थित जगन्नाथ मंदिर में भगवान जगन्नाथ की दो प्रतिमाएं विराजमान है। एक बूढे़ जगन्नाथ जी की प्रतिमा है जो अचल प्रतिमा है और दूसरी चंदन की लकड़ी से बनी प्रतिमा हैं। रथयात्रा के दौरान लकड़ी की प्रतिमा को रथयात्रा में विराजमान करवाया जाता है। जबकि चल प्रतिमा मंदिर में ही रहती है। जब भगवान जगन्नाथ रूपबास चले जाते हैं तो मंदिर में भक्त बूढे़ जगन्नाथ जी के दर्शन के लिए जाते हैं। साल में एक बार ही बूढे़ जगन्नाथ जी के दर्शन होते हैं।

रथ यात्रा का बदला स्वरूप, हाथी की जगह अब ट्रैक्टर

इस रख को पहले चार हाथी खीचते थे। इसमें महाराज बैठकर रावण दहन करते जाते थे। समय के साथ इसमें बदलाव हुआ। इसमें चार की जगह पर दो हाथी लगने लगे। उसके बाद राजा तेज सिंह ने इसे भगवान जगन्नाथ की शोभायात्रा के लिए भेंट कर दिया। पहले भगवान की शोभायात्रा छोटे रथ में निकलती थी। इसमें मुख्य महावत का स्थान आज भी सुरक्षित है।

जगन्नाथ का भात जगत पसारे हाथ, मंदिर में हुआ भात का आयोजन

अलवर. कितना प्यारा है श्रृंगार, तेरी देऊ नजर उतार, कितना प्यारा है, सांवली सूरत पर दिल दिवाना हो गया, बंसी वाले बंसी बजा, तेरे भक्त बुलाते हैं... भजनों पर श्रद्धालुओं के कदम देर तक झूमते रहे । मौका था पुराना कटला स्थित जगन्नाथ मंदिर में आयेाजित किए जा रहे भात का। जिसमें महिलाओं ने भक्ति गीतों पर खूब नृत्य किया। सीमा, बीना, सरोज, वंदना, मोहन आदि ने भजनों की एक से एक प्रस्तुति देकर सबको झूमने पर मजबूर कर दिया।

महिला श्रद्धालुओं ने रात को मंदिर में विवाह के उपलक्ष्य में आज दूल्हो बनो जगदीश रंगीलो रे आदि गाकर खुशी व्यक्त की। महिलाओं ने विवाह के उपलक्ष्य में हाथों में मेंहदी भी लगाई । कार्यक्रम के दौरान सुबह 11 बजे मंदिर पर विधिवत रूप से मंत्रोच्चार के साथ ध्वजारोहण किया गया।

इस अवसर पर मेला कमेटी के अध्यक्ष पंडित राजेंद्र शर्मा, सचिव धमेंद्र शर्मा, मंदिर के महंत पंडित देवेंद्र शर्मा सहित अन्य सदस्य उपस्थित थे। दोपहर में 12 बजे भगवान के पट खुले और महाआरती की गई। इस के बाद भक्तों को पंचामृत और चावल का विशेष प्रसाद वितरित किया गया। इसे लेने के लिए बड़ी भीड़ रही। इसी के साथ ही मंदिर में तीन दिन से चल रहा अखंड कीर्तन का समापन हुआ।

कल से रहेगी सांस्कृतिक धूम


भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा के रूपबास पहुंचने पर रूपबास स्थित मेला स्थल पर पर्यटन विभाग की ओर से 3 जुलाई से तीन दिवसीय सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। मंदिर परिसर में प्रतिदिन शाम को स्थानीय व बाहर के कलाकारों की ओर से लोक संस्कृति से जुडे़ कार्यक्रमों की प्रस्तुति दी जाएगी।

भगवान नारायण है लोगों के बीच मौजूद

भारतीय संस्कृति में अनादिकाल से मूर्ति पूजा का विधान बताया गया है। मूर्ति पूजा आस्था के लिए आधार स्वरूप है। सृष्टि के प्रारम्भ से ही चारों युग मे भगवान नारायण मूर्ति रूप में भक्तो के कल्याणार्थ इस धरती पर स्वयं प्रगट होते है। द्वापर युग के भगवान आराध्य देव जगन्नाथ माने जाते हैं। जो जगत का नायक है स्वामी है उसे ही जगन्नाथ कहा गया है। तथा कलियुग के प्रत्यक्ष देव वेंकटेश भगवान कहलाते है।

वामी कौषलेन्द्र प्रपन्नाचार्य फलाहारी वेंकटेश बालाजी दिव्य धाम ने बताया कि उड़ीसा में निकलने वाली भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा के संबन्ध में ऐसी किंवदन्ति है कि भगवान श्री कृष्ण की प्रिय बहन सुभद्रा ने नगर भ्रमण करने की इच्छा प्रगट की तब भगवान स्वयं अपनी बहन सुभद्रा को रथ पर विराजमान कराकर नगर भ्रमण कराए तभी से जगन्नाथ भगवान की रथयात्रा निकाली जाती है। इसी तरह से अलवर में निकलने वाली भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा में भी यही क्विदंति है कि माता जानकी भगवान जगन्नाथ से रूठ जाती है और भगवान जगन्नाथ उन्हें मनाकर वापस लाते हैं।

जिस जगह पर भगवान का विवाह होता है वह स्थान रूपबास है। जिसे पहले रूपनगर के नाम से जाना जाता था। यह नाम यहां बने रूपहरि मंदिर के नाम से ही पड़ा है। जब मानव पवित्र हो तो भगवान भक्त की पुकार अवश्य सुनते है। और भक्तों की प्रत्येक इच्छा की पूर्ति करते हैं। क्योंकि परमात्मा को सत्य संकल्प कहा गया है संकल्प मात्र से भगवान जीव मात्र का कल्याण करने के लिए धरती पर मूर्ति रूप् में विराजमान होते है। भगवान जगन्नाथ जगत का कल्याण करें रथयात्रा के अवसर पर यही प्रभु चरणो में प्रार्थना की जाती है।

अलवर की संस्कृति और इतिहास की जीवंत धरोहर जगन्नाथ महोत्सव

राजन विशाल जिला कलक्टर अलवर ने बताया कि भगवान जगन्नाथ महोत्सव अलवर की संस्कृति और इतिहास की जीवंत धरोहर है। इसको सहेज कर रखने की जरूरत है। महोत्सव में जिले के लोग शांतिपूर्वक तरीके से शामिल होकर इसे आनंद और उत्साह के साथ मनाएं। मेले और त्योहार हमारी संस्कृति में महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं। ये हमारी सांस्कृतिक एकता का परिचायक है। सभी खुशियों के साथ समारोह को मनाएं।

अलवरवासियों को इस शुभ अवसर पर शुभकामनाएं


राहुल प्रकाश जिला पुलिस अधीक्षक अलवर ने बताया कि जगन्नाथ महोत्सव का अलवरवासियों के लिए विशेष महत्व है। यह महोत्सव जिले की सांस्कृतिक विरासत है, इसे सहेजने की जरूरत है। जिलेवासी शांतिपूर्वक तरीके से मेले व महोत्सव में शामिल होकर सांस्कृतिक विरासत का आनंद उठाएं। महोत्सव में हर वर्ष की भांति मेले के दौरान पुलिसबल की पर्याप्त व्यवस्था रहेगी। श्रद्धालु व नागरिकों से अपेक्षा है कि वे भी व्यवस्था बनाए रखने में अपना सहयोग देंगे। इस शुभ अवसर पर अलवरवासियों को शुभकामनाएं।


समय के साथ बदला स्वरूप


नरेन्द्र सिंह पूर्व राजपरिवार सदस्य ने बताया कि पहले राज परिवार की तरफ से रथ यात्रा व मेले का आयोजन किया जाता था। इसमें बड़ी संख्या में ग्रामीण क्षेत्र के लोग शामिल होते हैं। पहले सड़कें चौड़ी थी व मेला स्थान खुला होने के कारण बड़ा मेला भरता था। लेकिन अब अतिक्रमण के चलते जगह कम हो गई है। हाथी घोड़ों की जगह ट्रैक्टर व अन्य आधुनिक उपकरणों ने ले ली है। पहले शाही अंदाज में रथ यात्रा निकलती थी। राजा खुद पूजा करके रथ यात्रा को रवाना करते थे।

ये भी पढ़ें

image