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फोटो स्टोरी देखें …… बाजार में छाने लगा होली का उल्लास …

अलवर. होली का पर्व नजदीक आते ही बाजार में होली के रंग दिखाई देने लगे हैं। बाजार में ठाकुर जी से होली खेलने के लिए डिज़ाइनर प्लेट आई हैं जिसमें रंग घोलने के लिए छोटी सी बाल्टी, गुलाल और पिचकारी है।

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फोटो स्टोरी देखें ...... बाजार में छाने लगा होली का उल्लास ...

फोटो स्टोरी देखें ...... बाजार में छाने लगा होली का उल्लास ...

अलवर. होली का पर्व नजदीक आते ही बाजार में होली के रंग दिखाई देने लगे हैं। बाजार में ठाकुर जी से होली खेलने के लिए डिज़ाइनर प्लेट आई हैं जिसमें रंग घोलने के लिए छोटी सी बाल्टी, गुलाल और पिचकारी है। मेटल से निर्मित सिल्वर और गोल्डन रंग की ये प्लेट दिखने में काफी सुंदर है। पान के पत्ते के आकार के आलावा अन्य कई आकार में आई हंै। इन्हें घर के मंदिर या फागोत्सव के दौरान भगवान से होली खेलने के लिए ख़ास तौर से तैयार किया गया है। वहीं विभिन्न रंगों की गुलाल भी बनाई जा रही है। इसके अलवा बिकने के लिए अनेक डिजाइन की पिचकारी और सिर पर पहनने के लिए रंग-बिरंगे साफे, टॉपी और मुखेटे भी बाजार में बिकने के लिए आ गए हैं। फोटो अंशुम आहूजा

आंगनबाड़ी केंद्रों पर न बिजली न पानी, कैसे संवरे नौनिहालों का भविष्य!
अलवर. राज्य सरकार की ओर से नौनिहाल को स्कूल पूर्व अध्ययन के लिए आंगनबाड़ी केंद्र खोले, लेकिन मूलभूत सुविधाओं का इंतजाम करना भूल बैठी। इस कारण केंद्रों पर नौनिहालों का ठहरना मुश्किल हो रहा है। जिले के अनेक आंगनबाडी केंद्रों पर अभी न तो बिजली पहुंची है और न ही पानी का इंतजाम हो पाया है।
इसके चलते केंद्र पर आने वाले बच्चों को पानी के लिए या तो बोतल लानी पड़ती हैं या फिर आसपास के घरों से पानी मांगकर पीना पड़ता हैं। बिजली नहीं होने से तेज गर्मी व उमस के दौरान बच्चों को परेशानी होती हैं। राजस्थान पत्रिका की टीम ने जब सोमवार को शहर के केंद्रों का निरीक्षण किया तो पानी व बिजली नहीं मिलने से केंद्रों पर बच्चे नदारद नजर आए।
बजट मिला, काम फिर भी अधूरा: राज्य सरकार की पिछले साल की बजट घोषणा में बिजली की सुविधा से वंचित आंगनबाड़ी केंद्रों पर विद्युतीकरण कार्य करने के लिए करीब 28 लाख का बजट दिया था। इस बजट से जिले के 560 आंगनबाड़ी केंद्रों पर विद्युत कनेक्शन दिया जाना था, लेकिन इसमें से अभी तक 454 पर विद्युत कनेक्शन ही हो पाएं हैं।