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ऐसे गांव जहां नहीं है जमीन बिकाऊ

अलवर. वैसे तो विकास की गाथा शहर चाराें ओर ही लिख रहा है पर अगले एक दशक में भजीट रोड पर नजारा कुछ अलग होगा। यह विकास का नया अड्डा होगा। इसका प्रमुख कारण यही है कि इस मार्ग के आखिर छोर पर मत्स्य विश्वविद्यालय के नए भवन की स्थापना हो गई। भजीट रोड पर बिल्डरों ने तीन करोड़ रुपए प्रति बीघा तक जमीनें खरीदी हैं। तमाम किसानों ने बाजार का माहौल देखकर अपनी जमीन खुद सुरक्षित कर लीं ताकि भविष्य में विकास की योजनाएं वह लांच कर सकें। फिलहाल आधा दर्जन गांवों के छह हजार से ज्यादा किसानों को बड़ा फायदा होगा।

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अलवर

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susheel kumar

May 28, 2023

ऐसे गांव जहां नहीं है जमीन बिकाऊ

ऐसे गांव जहां नहीं है जमीन बिकाऊ

अलवर. वैसे तो विकास की गाथा शहर चाराें ओर ही लिख रहा है पर अगले एक दशक में भजीट रोड पर नजारा कुछ अलग होगा। यह विकास का नया अड्डा होगा। इसका प्रमुख कारण यही है कि इस मार्ग के आखिर छोर पर मत्स्य विश्वविद्यालय के नए भवन की स्थापना हो गई। भजीट रोड पर बिल्डरों ने तीन करोड़ रुपए प्रति बीघा तक जमीनें खरीदी हैं। तमाम किसानों ने बाजार का माहौल देखकर अपनी जमीन खुद सुरक्षित कर लीं ताकि भविष्य में विकास की योजनाएं वह लांच कर सकें। फिलहाल आधा दर्जन गांवों के छह हजार से ज्यादा किसानों को बड़ा फायदा होगा। इन क्षेत्रों में जमीनों की रजिस्ट्री भी हो रही हैं।


इन गांवों में डीएलसी दरें प्रति वर्ग मीटर 4800 रुपए
मत्स्य विश्वविद्यालय की नींव 1995 में भजीट रोड िस्थत हल्दीना गांव के पास करीब 200 बीघा सरकारी जमीन पर रखी गई। जैसे ही नींव उधर रखी गई तो देखते ही देखते बिल्डरों की नजर इस मार्ग पर पड़ गई। विश्वविद्यालयों के आसपास या उस मार्ग पर तेजी से विकास होता है। कहीं पर होटल बनते हैं तो कहीं पर अपार्टमेंट। बाजार भी विकसित होते हैं। उसी को देखते हुए बिल्डरों ने इस मार्ग पर महंगी दरों पर जमीनें खरीदी हैं जबकि डीएलसी करीब 4800 रुपए प्रति वर्ग मीटर है। यानी एक बीघा जमीन की कीमत करीब 90 लाख रुपए के आसपास है लेकिन तीन करोड़ तक कुछ जमीनें बिकी हैं। इस मार्ग पर मदनपुरी, भजीट, नंगली झामावत, कैरवाड़ा, हल्दीना गांव लगते हैं। इन गांवों की ऑनरोड जमीन करीब दस हजार एकड़ है। केरवा जाट गांव की सीमा भी इस मार्ग से लगती है। ऐसे में इस गांव के किसानों को भी विकास की हवा लगेगी।


बिल्डरों ने लगाए जगह-जगह बोर्ड, 120 गज का प्लाट 15 लाख तक

भजीट रोड पर बिल्डरों की ओर से जगह-जगह बोर्ड लगाए गए हैं। मदनपुरी के एक बिल्डर से हमने जमीन खरीदने के बहाने से संपर्क किया। उनसे पूछा कि जमीन की यहां क्या दरे हैं? ओनरोड के रेट क्या चल रहे हैं? इस पर बिल्डर का जवाब था कि ओनरोड पर प्रति बीघा जमीनें तीन करोड़ रुपए तक बिकी हैं। रूपबास पुलिया से भजीट तक अब जमीन बिकाऊ नहीं है। कुछ किसानों ने सुरक्षित कर ली तो कुछ बिक गईं। रोड के अंदर के एरिया में चलकर तीन हजार प्रति वर्ग मीटर डीएलसी में जमीन मिल सकती है। रोड से अंदर चलकर 120 गज का प्लाट करीब 14 से 15 लाख तक पड़ेगा। हमने पूछा, इतनी महंगी जमीन? तो बिल्डर बोला, यूनिवर्सिटी इस रास्ते पर है। आगे जाकर ईएसआईसी अस्पताल को भी यह रास्ता जा रहा है। इसलिए महंगाई है। अगले छह माह में यहां जमीन मिलना और मुश्किल हो जाएगा। अभी कई किसान अपनी जमीन नहीं बेचना चाह रहे।

नगर निगम का परिसीमन होगा तो ये गांव आ सकते हैं शहरी क्षेत्र में

भजीट रोड पर लगने वाले आधा दर्जन गांव अभी ग्रामीण इलाके में आते हैं लेकिन शहर के नजदीक हैं। जानकारों का कहना है कि नगर परिषद के नगर निगम बनने के बाद परिसीमन होगा। ऐसे में पहले या दूसरे चरण में यह सभी गांव निगम की सीमा में आ जाएंगे। ऐसे में यह क्षेत्र और विकसित होगा। विश्वविद्यालय तक का एरिया निगम की सीमा में आ जाएगा।

फोरलेन की दरकार

जानकारों का कहना है कि मत्स्य विश्वविद्यालय तक रास्ता टूलेन है। जैसे ही विश्वविद्यालय का संचालन होगा तो वाहनों की संख्या इस मार्ग पर बढ़ेगी। ऐसे में इस मार्ग के फोरलेन की आवश्यकता है। जैसे ही फोरलेन बनेगा तो यहां विकास की रफ्तार अलग होगी।

भजीट मार्ग पर जमीनों की बिक्री हो रही है। साथ ही रजिस्ट्री भी हम कर रहे हैं। कुछ जगहों पर रेट अधिक हैं।
-- अनिल गोयल, उप पंजीयक द्वितीय, पंजीयन कार्यालय अलवर