
vadodra railway station
सुनील सिंह सिसोदिया
वड़ोदरा (गुजरात)
सेन्ट्रल गुजरात में कहा जाता है कि सेन्ट्रल गुजरात जीतने वाली पार्टी ही सत्ता की सिकंदर बनती है। सीटों के हिसाब से यहां सबसे बड़ा मैदान है। वैसे तो यह क्षेत्र भाजपा का गढ़ माना जाता है। लेकिन अब यहां के 8 जिलों की 61 विधानसभा सीटों पर भाजपा-कांग्रेस के बाद आम आदमी पार्टी ने चुनावी मैदान में कूदकर मुकाबले को रोचक बना दिया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और अशोक गहलोत सहित तमाम बड़े नेताओं के दौरे हो चुके हैं। लेकिन यहां गरीब तबके के लोगों में महंगाई-बेरोजगारी का अंडरकरंट दौड़ रहा है। जो राजनीतिक दल मुफ्त की योजना की घोषणा कर देने की गारंटी दे रहे हैं, उसकी चर्चा भी खूब हो रही है।
भाजपा अपने इस गढ़ को ढहने से बचाने और मजबूती को लेकर प्रचार में कोई कसर नहीं छोड़ रही। वहीं कांग्रेस अपने वजूद को बनाए रखने को लेकर जोर आजमाइश कर रही है तो आम आदमी पार्टी कांग्रेस-भाजपा के वोटों में सेंध लगाने के लिए हर वो प्रयास कर रही है, जिससे वोट मिल सकें। गत विधानसभा चुनाव में दो दर्जन से अधिक सीटों पर हार-जीत का मामूली अंतर रहा था।
इनमें मुख्य रूप से गोधरा, धोलका, छोटा उदेपुर की सीटें हैं। यही वजह है कि भाजपा ने कुछ उम्मीदवार मैदान में नए उतार दिए हैं।
महंगाई-बेरोजगारी का अंडरकरंट तो मोदी ने कर दिया रेल कारखाने का ऐलान
गरीब मोहल्लों में मुफ्त बिजली, पानी, शिक्षा, चिकित्सा और बेरोजगारी भत्ता देने को लेकर अहमदाबाद, वड़ोदरा, गोधरा व अन्य बड़े शहरों में शिविर लगाकर गारंटी कार्ड बांटे गए हैं। इन गारंटी कार्डों की गरीब की जुबान पर चर्चा जरूर सुनाई दे रही है। जब इन लोगों से चुनावी चर्चा होती है तो ये बोटल (गैस सिलेण्डर) की महंगाई का जिक्र करने से भी नहीं चूक रहे। लेकिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बेरोजगारी के मुद्दे पर पानी फेरने के लिए दाहोद में रेलवे के बिजली इंजन बनाने का कारखाना खोलकर क्षेत्र के दस हजार लोगों को रोजगार देने का वादा कर दिया है। यहां वोट दूसरे चरण में 5 दिसंबर को पड़ेंगे और चुनाव प्रचार 1 दिसंबर से और जोर पकड़ेगा।
कांग्रेस : खल रही अहमद पटेल की कमी
गुजरात कांग्रेस को अहमद पटेल की कमी खल रही है। वे पार्टी के प्रमुख रणनीतिकार थे। उनका निधन होने को कांग्रेसी इस चुनाव में बड़ा झटका मान रहे हैं। इस चुनाव में कांग्रेस का ऐसा कोई बड़ा चेहरा नजर नहीं आ रहा जो सभी लोगों को साथ लेकर पार्टी का नेतृत्व कर सके। हालांकि पटेल की बेटी पिता की विरासत को संभालने के लिए मैदान में है। लेकिन पुराने कांग्रेसी मजबूत चुनावी रणनीति बनाने को लेकर अहम पटेल को जरूर याद कर रहे हैं।
आप : गारंटी कार्ड बांट दिखा रही ताकत
आम आदमी पार्टी गुजरात में पैर पसारने के लिए दिल्ली-पंजाब जैसी लुभावनी घोषणाओं का दांव चल रही है। इसके लिए जनता के बीच गारंटी कार्ड जारी किए गए हैं। इस गारंटी कार्ड का मुस्लिम और गरीब तबके के लोगों में अंडरकरंट दिखाई दे रहा है। आप की ओर से गारंटी कार्ड में नि:शुल्क बिजली, चिकित्सा, शिक्षा और हर परिवार को बेरोजगारी भत्ता देने का दावा किया जा रहा है। गारंटी कार्ड कुछ विशेष इलकों में शिविर लगाकर बांटे गए हैं। ऑटो, रिक्शा चालक और चाय की थड़ी वालों की जुबान पर भी यह चर्चा है।
भाजपा : मोदी के सहारे करेगी चुनावी वैतरणी पार
वड़ोदरा के अल्पेश कहते हैं कि भाजपा को 70 टका (फीसदी) वोट प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के चेहरे पर ही मिलता है। उम्मीदवार कौन है और राज्य सरकार ने क्या काम किए, इस पर 30 टका ही भाजपा के वोटर ध्यान देते हैं। इसलिए यहां मोदी का ही जोर चल रहा है। भाजपा नेता भी मोदी सरकार के कामों को गिनाते हुए वोट मांग रहे हैं। भाजपा अपने गढ़ को बचाए रखने को लेकर यहां आश्वस्त नजर आ रही है। लेकिन प्रचार में कोई कमी नहीं छोडऩा चाहते।
यों समझे जिलों की चुनावी गणित...
वड़ोदरा : वाघोडिय़ा सीट पर बिगड़ा समीकरण
2017 के विधानसभा चुनाव में वड़ोदरा जिले की 10 में से 8 भाजपा ने जीती थी। 2 सीट करजण और पादरा पर कांग्रेस ने बाजी मारी थी। लेकिन करजण सीट से कांग्रेस के टिकट पर जीते अक्षय पटेल भाजपा में चले गए और फिर उप चुनाव में वे भाजपा के टिकट पर जीत गए। इस चुनाव में जिले की ग्रामीण क्षेत्र की वाघोडिय़ा सीट खासी चर्चा में है। 6 बार विधायक रहे मधु श्रीवास्तव का इस बार भाजपा ने टिकट काटकर अश्विन पटेल को दिया है। इससे नाराज मधु श्रीवास्तव निर्दलीय मैदान में उतर गए हैं। वैसे पूरे जिले में अब तक भाजपा की पकड़ मजबूत रही है। भाजपा इस गढ़ को बनाए रखने के लिए जोर लगा रही है। वहीं कांग्रेस के साथ इस बार आम आदमी पार्टी ने एन्ट्री कर मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया है।
पंचमहाल : कालोल त्रिकोणीय मुकाबले में फंसी
पंचमहाल (गोधरा) जिले की 5 विधानसभा सीटों में से ज्यादातर पर भाजपा की स्थिति मजबूत बताई जा रही है, लेकिन कालोल सीट भाजपा, कांग्रेस और आप उम्मीदवार के बीच त्रिकोणीय मुकाबले में फंस गई है। यहां भाजपा ने फतेसिंह चौहाण को टिकट दिया है, तो वहीं कांग्रेस ने प्रभातसिंह चौहाण को उम्मीदवार बनाया है। आप ने दिनेश बारिया को मैदान में उतारा है। इसी प्रकार दाहोद की मोडवाहडफ विधानसभा सीट पर भी भाजपा को कांग्रेस टक्कर दे रही है।
अहमदाबाद : मणिनगर-विरमगाम में रोचक मुकाबला
भाजपा अहमदाबाद को अपना गढ़ मान रही है। गत चुनाव में करीब 75 फीसदी सीटों पर काबिज भी हुई तो शेष पर कांग्रेस। इस बार भाजपा को कांग्रेस ही नहीं आम आदमी पार्टी से भी मुकाबला करना पड़ रहा है। तो कांग्रेस भी कड़े मुकाबले में फंसी नजर आ रही है। कांग्रेस के कब्जे वाली विरमगाम सीट पर भाजपा के हार्दिक कड़ा मुकाबला दे रहे हैं। इसी प्रकार कभी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सीट रही मणिनगर विधानसभा पर भी सभी की नजर है। यहां करीब 27 साल से काबिज भाजपा ने गत चुनाव में विधायक चुने गए सुरेश पटेल को टिकट न देकर अमूलभाई भट्ट को उम्मीदवार बनाया है। यहां कांग्रेस-आप भी जोर लगा रही हैं।
छोटा उदयपुर : नेता प्रतिपक्ष सुखराम का भविष्य दांव पर
आदिवासी जिले छोटा उदयपुर में तीनों ही सीटों पर कांग्रेस-भाजपा में सीधा मुकाबला है, एसटी के लिए आऱक्षित हैं। यहां आप ने भी पूरी ताकत झौंक रखी है। प्रचार में भी आप पीछे नहीं है। रैलियां निकाली जा रही हैं। भाजपा, कांग्रेस और आप के अलावा बीटीपी ने भी उम्मीदवार उतारे हैं, सबसे रोचक मुकाबला जेतपुर सीट पर माना जा रहा है। यहां कांग्रेस से नेता प्रतिपक्ष सुखराम राठवा मैदान में हैं। उन्हें भाजपा के जयंती राठवा सीधी टक्कर दे रहे हैं।
दाहोद : देवगढ़ बारिया में आप बिगाड़ रही गणित
आदिवासी जिले दाहोद में 6 में से 5 सीट एसटी के लिए आऱक्षित हैं। यहां कांग्रेस-भाजपा बराबरी के मुकाबले पर रही है। लेकिन दाहोद शहर की सीट लंबे समय से कांग्रेस के कब्जे में रही है। लेकिन इस बार कांग्रेस विधायक के मैदान में नहीं होने से सीट कांग्रेस के लिए निकाला किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है। यहां भाजपा ने बेरोजगारी के मुद्दे पर रेलवे के बिजली इंजन की मैन्यूफैक्चरिंग का जनता से वादा कर दिया है। देवगढ़ बारिया सीट पर भाजपा सीधे तौर पर आप से मुकाबले में बताई जा रही है।
आणंद : कांग्रेस की मजबूत पकड़ कायम
सेन्ट्रल गुजरात में एक मात्र जिला आणंद है, जहां कांग्रेस सबसे आगे नजर आ रही है। भाजपा अब तक इस जिले में कांग्रेस के किले को ढहा नहीं सकी है। जिले की सात में से ज्यादातर सीटों पर कांग्रेस मजबूत नजर आ रही है। इसमें कोई बड़ा उलटफेर नजर नहीं आ रहा। पूर्व मुख्यमंत्री माधव सिंह सोलंकी इसी जिले से थे। अब उनके पुत्र भरत सिंह सोलंकी ने कमान संभाल रखी है। यहां गांवों में दूध मंडलियों की बहुतायत है, जिनमें से ज्यादातर कांग्रेसी हैं।
खेड़ा : कांग्रेस की बढ़ती दिख रही मुश्किल
खेड़ा जिले की 6 सीटों पर गत चुनाव में भाजपा-कांग्रेस का बराबरी को मुकाबला रहा था। लेकिन इस बार जिले में कांग्रेस की आप ने गणित बिगाड़ दिया है। वहीं कांग्रेस के प्रमुख नेता दिनशा पटेल भी ही सक्रिय नजर आ रहे हैं। इससे भी कांग्रेस को अपने गढ़ को बचाने के लिए कड़ा संघर्ष करना पड़ रहा है। यहां ज्यादातर पटेल हैं जिनमें से काफी विदेश में रहते हैं।
सेन्ट्रल गुजरात में 2017 में रही स्थिति
जिला - कुल सीट - भाजपा - यूपीए - अन्य
अहमदाबाद - 21 - 15 - 6 - 0
आणंद - 7 - 2 - 5 - 0
खेड़ा - 7 - 3 - 4 - 0
महीसागर - 2 - 1 - 0 - 1
पंचमहाल - 5 - 4 - 0 - 1
दाहोद - 6 - 3 - 3 - 0
वड़ोदरा
Published on:
04 Dec 2022 08:07 pm
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