अलवर. शहर के बाला किला में बनाया जा रहा राज्य का पहला शस्त्र संग्रहालय सितंबर माह तक बनकर तैयार होगा। इसके बाद पर्यटक इस संग्रहालय में रियासतकालीन अस्त्र-शस्त्रों को देख सकेंगे।शस्त्र संग्रहालय के लिए बजट मिलने के बाद काम शुरू कर दिया गया है। इसको बनाने में करीब पचास लाख की लागत आएगी। बाला किला के प्रथम तल पर बने बरामदों में इन हथियारों को प्रदर्शित किया जाएगा। हथियारों के स्टैंड आदि बनाने के लिए खासतौर से आइवरीटेक लकड़ी का प्रयोग किया गया है। यह शीशम की तरह मजबूत होती है। इससे बनाया गया सामान अधिक समय तक सुरक्षित रहता है।मई माह के अंतिम सप्ताह में बाला किला में हथियार आदि को प्रदर्शित करने के लिए केबिनेट बनाने का काम शुरू कर दिया था। फिलहाल बरामदों में तोप आदि का रंग-रोगन व सफाई के बाद इसे स्टैंड पर लगा दिया गया है। बरामदे के बाहर लकड़ी के फ्रेम लगाकर इन पर टफन ग्लास चढ़ाया जाएगा। जिससे की पर्यटक इन ऐतिहासिक वस्तुओं को छू ना पाएं और इन्हें अधिक समय तक सुरक्षित रखा जा सके।
क्या कहते हैं यूआईटी के इंजीनियर
यूआईटी के अधिशाषी अभियंता प्रमोद शर्मा ने बताया कि शस्त्र संग्रहालय में ज्यादातर लकड़ी का ही काम किया गया है। करीब 8 छोटी तोपें और 32 अन्य छोटे बडे रियासतकालीन दुर्लभ हथियारों को प्रदर्शित किया जाएगा। इसमें बंदूक, राइफल, तलवार आदि शामिल हैं। सितंबर माह में काम पूरा होने के बाद इसे पुरातत्व व संग्रहालय विभाग को सौंप दिया जाएगा।