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यूआईटी को ये क्या हो गया

अलवर. शहर के विकास की समुचित जिम्मेदारी नगर विकास न्यास (यूआईटी) की है। करीब छह माह पहले 330 करोड़ का बजट विकास के लिए मंजूर हुआ लेकिन बड़ा विकास कार्य जनता को कहीं नहीं दिख रहा। यूआईटी दावा जरूर कर रही है कि करोड़ों की लागत से कई काम हो गए हैं और जल्द ही तमाम काम नजर आएंगे।

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अलवर

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susheel kumar

Sep 25, 2023

यूआईटी को ये क्या हो गया

यूआईटी को ये क्या हो गया

यूआईटी का 330 करोड़ का बजट, पर बड़ा काम शहर में कहीं नहीं दिख रहा
- शहर के विकास की धुरी यूआईटी पर ही घूमती लेकिन विकास नहीं पकड़ पा रहा गति

- यूआईटी का दावा, कई सड़कें बनाई, कॉलोनियों में लाइटें लगवाईं, कई हुए अन्य काम भी

अलवर. शहर के विकास की समुचित जिम्मेदारी नगर विकास न्यास (यूआईटी) की है। करीब छह माह पहले 330 करोड़ का बजट विकास के लिए मंजूर हुआ लेकिन बड़ा विकास कार्य जनता को कहीं नहीं दिख रहा। यूआईटी दावा जरूर कर रही है कि करोड़ों की लागत से कई काम हो गए हैं और जल्द ही तमाम काम नजर आएंगे।

यूआईटी के पास पिछले साल आए थे खजाने में 182 करोड़ रुपए

330 करोड़ का बजट मार्च में मंजूर किया गया। इस दौरान संकल्प लिया गया था कि अलवर शहर का योजनाबद्ध विकास न्यास की प्राथमिकता होनी चाहिए लेकिन अब तक ऐसा कुछ नहीं दिखा। कुछ बड़े प्रोजेक्टों पर भी काम होने थे लेकिन वह आगे नहीं बढ़ पाए। वित्त वर्ष 2022-23 की संशोधित आय प्राप्तियां 182 करोड रुपए तथा व्यय राशि 192 करोड़ रुपए रही है। वित्त वर्ष 2022-23 के आय-व्यय अनुमानों में प्राप्तियां के मुताबिक ही 330 करोड़ रुपये के व्यय का प्रावधान किया गया। विकास कार्यों पर 207 करोड़ रुपए खर्च होने थे। इसमें 114 करोड़ रुपए यूआईटी अपनी योजनाओं पर खर्च करेगी। इसके अलावा 93 करोड़ रुपए गैर योजना क्षेत्र के कामों पर खर्च होंगे। मालूम हो कि यूआईटी का सालाना सेलरी खर्च चार से पांच करोड़ रुपए तक है।

इस साल ये होने थे विकास कार्य

- सडक निर्माण एवं सुदृढीकरण पर 73 करोड रुपए

- विद्युत एवं रोड लाइट पर 25 करोड रुपए

- नाली व सीवरेज निर्माण पर 19.5 करोड रुपए

- कम्पनी बाग में भूमिगत पार्किंग निर्माण एवं विकास के लिए 23.33 करोड़ रुपए

- पेयजल व जल संरक्षण पर 7.35 करोड रूपए

- पर्यटन स्थल मोती डूंगरी के विकास कार्यों पर 4 करोड रुपए
- पार्कों के विकास एवं वृक्षारोपण पर 15.35 करोड़ रूपए
- मिनी सचिवालय निर्माण में 7.24 करोड रुपए

- इंदिरा गांधी स्टेडियम के विकास पर 2 करोड़ रुपए

- शहर में सौन्दर्यकरण पर 2.7 करोड़ रुपए

- चौराहों के विकास एवं पुरानी धरोहरों के विकास के पर 4.4 करोड रुपए

- यातायात प्रबंधन के साथ अन्य विकास कार्यों पर 5 करोड़ रुपए

इन कामों की रफ्तार नहीं बढ़ी

पुलिस थाना वैशाली नगर में ऑनलाइन एग्जामिनेशन के लिए सुविधायुक्त एग्जामिनेशन सेन्टर, जिला मुख्यालय अलवर पर इंदिरा गांधी वर्किंग वुमेन हॉस्टल एवं जिला मुख्यालय अलवर पर यूथ हॉस्टल आदि के लिए भूमि निःशुल्क आवंटन करवानी थी। अब तक इस दिशा में काफी काम होना बाकी है। कंपनी बाग की पार्किंग का प्रस्ताव ठंडे बस्ते में है। चौराहों का विकास भी अभी तक कागजों में है। शहर की प्रमुख सड़कों का निर्माण भी नहीं हो पाया। लिंक रोड भी खराब पड़े हैं। नाली, सीवरेज के काम, स्टेडियम में काम भी अभी करना बाकी है। जल संरक्षण पर समुचित काम अभी तक यूआईटी नहीं कर पाई।

भूखंडों की बिक्री चल रही धीमी

यूआईटी की ओर से अंबेडकर नगर, विज्ञान नगर, शालीमार आदि योजनाओं में भूखंड बेचे जा रहे हैं। ऑनलाइन ही प्रक्रिया चल रही है। भूखंड खरीद की रफ्तार नहीं बढ़ रही है। हालांकि माह में करीब 15 से 20 करोड़ रुपए जरूर यूआईटी जुटा लेती है।

ये काम करवाने का दावा

यूआईटी के मुख्य अभियंता प्रदीप जैन का कहना है कि शालीमार, विज्ञान नगर में सड़कें बनवाई गई हैं। लाइटों का काम हो रहा है। अंबेडकर नगर की सड़कें बनी हैं। जेल चौराहे के आसपास काम हुआ है। शहर में डिवाइडरों का निर्माण करवाया गया। सुंदरीकरण के कार्य भी किए गए। जयसमंद पाल, मोती डूंगरी, नेहरू पार्क में काम करवाए गए हैं। फतेहगंज गुंबद पर भी काम हुआ है। कार्य तेजी से चल रहे हैं। जल्द पूरे होंगे।

यूआईटी को चाहिए चेयरमैन, पांच साल से नियुक्ति नहीं

प्रदेश सरकार यूआईटी के कामों की मॉनिटरिंग आदि के लिए चेयरमैन नियुक्त करती है लेकिन पिछले पांच साल से ये नियुक्ति नहीं हुई, जिसके चलते कामों की मॉनिटरिंग आदि नहीं हो पाती। चेयरमैन का प्रभार जिला कलक्टरों के पास ही रहा है। उनके पास पहले ही प्रशासनिक से लेकर तमाम कार्य हैं। ऐसे में स्थाई चेयरमैन की तैनाती हो तो कामों की रफ्तार बढ़े। साथ ही खाली चल रहे करीब 60 पदों पर नियुक्तियां की जाएं। इससे भी कामों की रफ्तार बढ़ेगी।