
सरकारी स्कूलों की स्थिति में ऐसा बदलाव देखने को मिल रहा है
अलवर. सरकारी विद्यालयों के गिरते भौतिक स्वरूप के कारण इन स्कूलों का नाम आते ही लोगों के जहन में आता है कि पुराना सा जर्जर भवन होगा, जिसकी वर्षों से पुताई नहीं हुई होगी, छतों से पानी टपकता होगा। अभिभावक अपने बच्चों को निजी स्कूलों में पढ़ाना पसंद करने लगे और सरकारी विद्यालयों में भेजने से गुरैज करने के कारण सरकारी विद्यालयों का नामांकन लगातार घटने भी लगा है, ऐसे में भामाशाहों और स्वंयसेवी स्ंस्थाओं ने शिक्षा के मन्दिरों के विकास में भागीदारी निभाने और विकास के लिए हाथ बढा़ने से सरकारी स्कूलों की स्थिति में ऐसा बदलाव देखने को मिल रहा है कि नौगांवा क्षेत्र में अब निजी स्कूलों से ज्यादा आकर्षक और ज्यादा सुविधाएं इन सरकारी स्कूलों में देखने को मिल रही हैं। नौनिहाल अब निजी विद्यालयों को छोड सरकारी स्कूलों में प्रवेश लेने को आतुर नजर आते हैं।
गौरतलब है कि शहर के चारों ओर लगभग 15 से 20 किलोमीटर का क्षेत्र उमरैण ब्लॉक का है। जिसमें ज़्यादातर गांव के सरकारी विद्यालयों के भवनों की हालत बदत्तर थी। ऐसे में ग्रामीणों के सहयोग से चार वर्षों कंपनियों, गैर सरकारी संस्थाओं और शिक्षकों के साथ मिलकर 10.50 करोड़ से ज्यादा के विकास कार्य और आवश्यक संसाधन सरकारी विद्यालयों को उपलब्ध करा दिए।
उमरैण मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी मधु भार्गव ने बताया कि 4 वर्ष में 984.00 लाख के कार्य हुए हैं। जिसमें स्कूलों का नवीनीकरण, शौचालय, बरसात के पानी के लिए टैंक निर्माण, बच्चों को फर्नीचर, स्कूलों में कम्प्यूटर, प्रिंटर आदि की सुविधाएं मिल रही है। उमरैण ब्लॉक से ही नवीन बने मालाखेड़ा ब्लॉक के सीबीईओ राकेश शर्मा ने बताया कि गत वर्ष 67.00 लाख रुपए के विकास कार्य जन सहयोग से सरकारी विद्यालयों में हुए हैं।
इन संस्थाओं का रहा सहयोग
सरकारी स्कूलों में नवाचार करने वाले समग्र शिक्षा के इंजीनियर राजेश लवानिया ने बताया कि सहगल फ़ाउंडेशन, श्रीराम पिस्टन, सेंट गोवेन, माता श्रीगोमती देवी ट्रस्ट, इब्तिदा संस्था, एमिड संस्था, मेटसो, आरडीएनसी मित्तल फ़ाउंडेशन, रोटेरी क्लब, गणेशी लाल फ़ाउंडेशन, डॉ. गोपाल राय चौधरी चेरिटेबल ट्रस्ट, नारायणी देवी मनोहरलाल छाबड़ा चेरिटेबल ट्रस्ट सहित अनेक संस्थाओं ने ब्लॉक के स्कूलों में सहयोग किया है। इसके साथ ही ग्रामीणों और शिक्षकों का भी अच्छा सहयोग सरकारी स्कूलों को मिला है।
बदल गया स्वरूप
अलवर ग्रामीण के सरकारी विद्यालयों का कायाकल्प होने के बाद वहां का स्वरूप बदल गया है, जिसके कारण बच्चों का नामांकन भी बढा़ है। अन्य स्थानों के लोग भी अलवर ग्रामीण विद्यालयों के विकास का काेपी कर रहे हैं।
टीकाराम जूली
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री, राजस्थान
Published on:
22 May 2023 11:32 pm
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