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निगम की आय क्यों नहीं बढ़ पा रही

अलवर. प्रदेश सरकार की ओर से नगर परिषद को नगर निगम बनाए करीब दो माह हो गए लेकिन निगम की आय कैसे बढ़ेगी? इस पर किसी ने मंथन नहीं किया। नेताओं से लेकर अफसर सफाई से लेकर रोड लाइट के ठेकों में ही लगे हैं। अभी ये ही नहीं हो पा रहे हैं। जानकार कहते हैं कि निगम का बजट 300 करोड़ पार पहुंचेगा। ऐसे में आय के साधन बढ़ाने को लेकर अधिकारियों को काम करना चाहिए।

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अलवर

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susheel kumar

Oct 01, 2023

निगम की आय क्यों नहीं बढ़ पा रही

निगम की आय क्यों नहीं बढ़ पा रही

नगर निगम का बजट होगा 300 करोड़ पार, पर आय के साधन गिनती के
- दो माह पहले निगम बन गया, नेताओं से लेकर अफसरों ने इस पर नहीं किया कोई मंथन

- सफाई व्यवस्था, रोड लाइटें ही नहीं छोड़ रहीं पीछा, इनका समाधान नहीं कर पाया कोई

अलवर. प्रदेश सरकार की ओर से नगर परिषद को नगर निगम बनाए करीब दो माह हो गए लेकिन निगम की आय कैसे बढ़ेगी? इस पर किसी ने मंथन नहीं किया। नेताओं से लेकर अफसर सफाई से लेकर रोड लाइट के ठेकों में ही लगे हैं। अभी ये ही नहीं हो पा रहे हैं। जानकार कहते हैं कि निगम का बजट 300 करोड़ पार पहुंचेगा। ऐसे में आय के साधन बढ़ाने को लेकर अधिकारियों को काम करना चाहिए।


45 करोड़ साल में वेतन पर खर्च हो रहे
नगर निगम का बजट अभी 190 करोड़ तक था। ये अधिकांश रकम केंद्र व प्रदेश सरकार के जरिए निगम को मिलती थी। इस रकम में सालाना करीब 45 करोड़ रुपए वेतन के होते हैं। करीब 10 करोड़ रुपए निगम अपने साधनों के जरिए कमाता है। अभी निगम के खाते में करीब 50 करोड़ रुपए हैं। देनदारी निगम के पास किसी की नहीं है। यानी अभी मुनाफे में है। जैसे ही बजट 300 करोड़ पहुंचेगा तो आय के साधनों को बढ़ाना होगा। जानकार कहते हैं कि नगर परिषदों को ही सरकारें बजट अधिक आवंटित करती हैं लेकिन नगर निगम को खुद अपने साधनों के जरिए बजट जुटाना होगा। इस पर काम करने की आवश्यकता है जो अभी तक नहीं हुई है।

इन बिंदुओं के जरिए बढ़ सकती है आय

एक्सपर्ट कहते हैं कि नगर निगम को डोर-टू-डोर कचरा संग्रह हर वार्ड में लागू करना होगा, जिसके जरिए 30 करोड़ रुपए तक सालाना निगम के खाते में कलेक्शन आ सकता है। 50 रुपए से लेकर 100 रुपए तक मासिक शुल्क कचरा संग्रहण का लिया जा सकता है। इसके अलावा हाउस टैक्स के जरिए भी सालाना 10 करोड़ रुपए तक आ सकते हैं। नगर निगम अपने पार्कों में बच्चों के मनोरंजन के साधन जैसे भूलभुलैया आदि विकसित कर सकती है। विज्ञान पार्क से लेकर अन्य थीम के प्रोजेक्ट लाकर करोड़ों रुपए प्रतिवर्ष कमाए जा सकते हैं। दुकानें, बाजार आदि निगम अपने बना सकता है। इससे भी आय होगी। अन्य साधनों पर भी विचार किया जा सकता है।

नगर निगम की आय बढ़ाने के लिए मंथन चल रहा है। जैसे ही प्रस्ताव तैयार होंगे तो बोर्ड के समक्ष रखेंगे।

-- मनीष कुमार, आयुक्त