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अलवर के जिस बहादुर अफसर को शौर्य सम्मान से नवाजा, उस शहीद की पत्नी को 20 साल से लगाने पड़ रहे हैं चक्कर

अलवर के बहादुर अफसर को शौर्य के लिए सरकार की ओर से शौर्य चक्र से नवाजा गया, आज उसकी पत्नी को सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।

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अलवर

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Prem Pathak

May 10, 2018

Wife of Shaurya Chakra Mahipal Yadav Struggling for Rights

अलवर. देश के सम्मान की खातिर जान गंवा चुके पेटी अफसर महिपाल यादव को भारत सरकार ने बहादुरी के लिए शौय चक्र से नवाजा, लेकिन शहीद की विधवा को सम्मान भत्ते के लिए दो दशक से सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। इतना ही नहीं सरकारी कार्यालयों से इन दो दशकों में शहीद वीरांगना को सम्मान भत्ता मिलना तो दूर, सरकारी कारिंदों की ओर से कभी सम्मान के दो शब्द भी नहीं मिल पाए।

जिले के खिजूरीबास क्षेत्र के गांव ततारपुर निवासी महिपाल यादव ने भारतीय नौ सेना में पेटी अफसर पद पर सेवाएं दी। वर्ष 1996 में ऑपरेशन आईएनएस सावित्री में साहस का परिचय देते हुए महिपाल देश के लिए शहीद हो गए। बकायदा उनकी बहादुरी को रक्षा मंत्रालय ने सराहा और उनके निधन पर दुख जताया।

राष्ट्रपति ने मरणोपरांत शौर्य चक्र से नवाजा

महिपाल की बहादुरी पर भारत के राष्ट्रपति ने उन्हें शौर्य चक्र प्रदान किया और कहा कि उन्होंने भारतीय नौ सेना की उच्चतम परम्पराओं के अनुरूप उच्च कोटि का साहस का प्रदर्शन कर अपने जीवन का बलिदान दिया।

सम्मान को तरसी शहीद वीरांगना

शहीद वीरांगना मीना देवी की पीड़ा है कि उनके पति देश के लिए शहीद हो गए, उम्मीद थी कि उनकी वीरता पर पूरे परिवार को सम्मान मिलेगा, लेकिन हुआ उलट, नौ सेना, सरकार व राष्ट्रपति ने उनके पति की वीरता को सराहा और शौय च्रक प्रदान किया, लेकिन शहीद की वीरांगना को मिलने वाला सम्मान भत्ता उसे अब तक नहीं मिल पाया है। उनके पति महिपाल यादव को शहीद हुए करीब 22 साल हो गए। वह सम्मान भत्ता के लिए सरकारी कार्यालयों में चक्कर लगाकर थक चुकी है। इतनी मशक्कत के बाद भी उसे सम्मान भत्ता अब तक नहीं मिल पाया है। कभी नियमों का हवाला देकर तो कभी धमकी भरे लहजे में उसे दुत्कार ही मिली है। मीना देवी ने बताया कि सरकार की ओर से हर महीने शहीद वीरांगना को 1500 रुपए सम्मान भत्ता दिए जाने का प्रावधान है।

कागजात लेकर कार्यालय बुलाया है

शहीद वीरांगना को मामले के कागजात लेकर जिला सैनिक कल्याण अधिकारी कार्यालय बुलाया गया है। कागजात देखने के बाद मामले में कार्रवाई की जाएगी।
कर्नल हरेन्द्र सिंह, जिला सैनिक कल्याण अधिकारी अलवर।