
अस्पतालों में कार्य बहिष्कार आयुर्वेद चिकित्सक संभालेंगे कमान
अलवर. राइट टू हेल्थ बिल के विरोध में बुधवार को सरकारी व निजी अस्पतालों के डॉक्टरों का कार्य बहिष्कार रहेगा। वहीं, जिला प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग ने इसके लिए वैकल्पिक व्यवस्था की है। आयुर्वेद आरबीएस, यूटीओ, सीएचसी और यूपीएचसी के चिकित्सक जिलेभर के सरकारी अस्पतालों में तैनात किए गए हैं। इसी तरह एमआईए स्थित ईएसआईसी अस्पताल दिनभर खुला रहेगा। मरीज यहां जाकर भी इलाज करवा सकेंगे।
अस्पतालों में ये रहेगी व्यवस्थाएं : 95 आयुर्वेद चिकित्सक, आरबीएस व यूटीओ के 74 एवं यूपीएचसी के 6 चिकित्सक अस्पतालों में चिकित्सा सेवाओं में लगाए गए हैं। इसके साथ ही 478 सामूदायिक स्वास्थ्य अधिकारी व 1700 वरिष्ठ नर्सिंग अधिकारियों के साथ ही ग्राम पंचायत के चिकित्सा संस्थानों पर एएनएचएम की ड्यूटी लगाई गई है। जो चिकित्सकों से फोन पर संपर्क में रहेंगे। इसके साथ ही 43 एंबुलेंस एवं बेसिक लाइफ सपोर्ट व एएलएस एंबुलेंस को भिवाड़ी, बहरोड़, बानसूर आदि में अलर्ट मोड पर तैनात की गई हैं।
डॉक्टरों ने भरी हुंकार...बिल वापस लेने तक आंदोलन जारी रहेगा
राइट टू हेल्थ बिल के विरोध में निजी चिकित्सालय पिछले 11 दिन से बंद हैं। आंदोलन लगातार बढ़ रहा है। अब इनके साथ सरकारी अस्पतालों के डॉक्टर भी आ गए हैं। बुधवार को दिनभर कार्य बहिष्कार होगा मंगलवार को सामान्य चिकित्सालय के आईएमए हॉल में चिकित्सकों की बैठक आयोजित हुई। इसमें राइट टू हेल्थ बिल के विरोध में रणनीति पर चर्चा हुई। इस दौरान जिलाध्यक्ष डॉ. विजयपाल यादव ने बताया कि राइट टू हेल्थ बिल के वापस होने तक विरोध जारी रहेगा। सामान्य अस्पताल के डिप्टी कंट्रोलर विजय चौधरी ने बताया कि जयपुर में चिकित्सकों पर पुलिस बर्बरता के विरोध में सरकारी अस्पतालों में 2 घंटे का कार्य बहिष्कार किया जा रहा था। अब अखिल राजस्थान सेवारत चिकित्सक संघ की घोषणा के बाद सभी चिकित्सक बुधवार को सामूहिक अवकाश पर रहेंगे। इसके बाद यदि सरकार व चिकित्सकों के बीच गतिरोध समाप्त नहीं हुआ तो आगे की रणनीति बनाई जाएगी।
चिकित्सा सेवाएं सुचारू रहेंगी
सभी अस्पतालों में वैकल्पिक व्यवस्था करते हुए पर्याप्त स्टॉफ की नियुक्ति की गई है। महिला अस्पतालों में भी सभी व्यवस्थाएं सुचारू रहेगी। आमजन को किसी भी प्रकार की कोई परेशानी नहीं होने दी जाएगी। इसके लिए सभी व्यवस्थाएं पूरी कर ली गई है।
-डॉ. श्रीराम शर्मा, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी।
सरकारी अस्पतालों में मरीजों के इलाज के लिए आयुर्वेद चिकित्सक लगाए गए हैं। इसके अलावा सेना को भी स्वास्थ्य विभाग ने पत्र लिखा है। वहां से भी चिकित्सकों का सहयोग मिलेगा। कोशिश की जा रही है कि मरीजों को परेशानी न हो।
- उत्तम शेखावत, एडीएम प्रथम
कार्य बहिष्कार के दौरान मरीज रहे परेशान
अलवर. स्वास्थ्य का अधिकार (राइट टू हेल्थ) आमजन पर ही भारी पड़ता दिखाई दे रहा है। इस बिल को लेकर चिकित्सकों व सरकार के बीच बने गतिरोध का परिणाम भी आमजन को ही भुगतना पड़ रहा है। निजी चिकित्सालय संचालकों की ओर से पिछले 11 दिन से चिकित्सा सेवाओं का बहिष्कार किया जा रहा है। वहीं सरकारी अस्पतालों में भी सुबह 9 से 11 बजे तक 2 घंटे का कार्य बहिष्कार जारी है। ऐसे में मरीज व उनके परिजनों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
इमरजेंसी में बढ़ रही संख्या : चिकित्सा विभाग के अनुसार मंगलवार को रात 9 बजे तक सामान्य, जनाना व शिशु चिकित्सालय की ओपीडी व इमरजेंसी में मरीजों की संख्या 1777 रही। वहीं सुबह अस्पताल में 2 घंटे के कार्य बहिष्कार के दौरान कई मरीजों को भीषण यातना भरे दौर से भी गुजरना पड़ा।
Published on:
29 Mar 2023 01:15 am
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