
Alwar @ स्वामी विवेकानंद ने क्या लिखा पत्रों में आप भी जानिए
अलवर. १८९१ में स्वामीजी ने लाला गोविन्द सहाय को पत्र में लिखा कि प्रिय गोविंद सहाय, मन की गति चाहे जैसी भी क्यों न हो, तुम नियमित रूप से जप करते रहना। हरबक्स से कहना कि पहले वाम नासिका तदनन्तर दक्षिण एवं पुन: वाम नासिका इस क्रम में प्राणायाम करते रहें। विशेष परिश्रम के साथ संस्कृत में अभ्यास करो। १८९४ में स्वामीजी ने पत्र में लिखा कि कलकत्ते के मेरे गुरु भाइयों के साथ तुम्हारा पत्र व्यवहार है या नहीं। चरित्र, आध्यात्मिकता व सांसारिक विषयों में तुम्हारी उन्नति तो भली-भांति हो रही होगी। तुमने संभवतया सुना होगा कि किस प्रकार से एक वर्ष से भी अधिक समय से अमरीका में हिन्दू धर्म का प्रचार कर रहा हूं। मैं यहां कुशल हूं। जितना शीघ्र हो सके तुम मुझे पत्र भेजना। ३० अप्रेल १८९४ में अमरीका से लिखा कि साधुता ही श्रेष्ठ नीति है तथा धार्मिक व्यक्ति की विजय अवश्य होगी। वत्स, सदा इस बात को याद रखना कि मैं कितना भी व्यस्त, कितनी भी दूरी पर अथवा कितने भी उच्च वर्ग के लोगों के साथ क्यों न रहूं। फिर भी मैं अपने बंधु वर्ग के प्रत्येक व्यक्ति के लिए चाहे उनमें से अत्यधिक साधारण स्थिति का ही क्यों न हो, उनके लिए भी सदा प्रार्थना कर रहा हूं। उनको मैं भूला नहीं हूं। उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य की प्राप्ति न हो जाए। जिस समय जिस काम के लिए प्रतिज्ञा करो, ठीक उसी समय उसे करना ही चाहिए, नहीं तो लोगों का आप पर से विश्वास उठ जाता है। जब तक आप खुद पर विश्वास नहीं करते तब तक आप भगवान पर विश्वास नहीं कर सकते।
स्वामीजी ने अलवर के लोगों को दिए संदेश
स्वामीजी तीन बार अलवर आए। अपने शिकागो प्रवास के दौरान भी उन्होंने कई पत्र अलवरवासियों को लिखे हैं। शहर के अशोका टाकीज के निकट गोविन्द सहाय के मकान का एक कक्ष स्वामीजी की यादों के रूप में संजोया हुआ है। नियमित रूप से वहां पूजा-पाठ की जाती है। एक तरह से अलवर स्वामीजी का पंसदीदा स्थल रहा है। राजस्थान प्रवास के दौरान स्वामीजी फरवरी १८९३ में अलवर आए थे। अलवर पूर्व रियासत के दीवान मेजर रामचन्द्र और पंसारी बाजार में मोहन भोला के आतिथ्य में कुछ दिन रुके भी। इसके बाद गोविन्द सहाय से मिले। अशोका टाकीज के निकट रह रहे राजा राममोहन गुप्ता बताते हैं कि उनके दादा गोविन्द सहाय और स्वामीजी की भेंट कम्पनी बाग में हुई। मंगलांसर रेजीमेंट में हैड क्लर्क रहे गोविन्द सहाय और स्वामी विवेकानंद में काफी अधिक घनिष्ठता रही। जिसके कारण स्वामीजी १८९३ और १८९७ में दो बार अलवर आए। एक बार तो करीब दस दिन तक उनके घर पर ही रुके।
स्वामीजी के ११ पत्र शोधार्थी ले गए
स्वामीजी के अलवर में प्रमुख शिष्य लाला गोविन्द सहाय विजयवर्गीय परिवार के पास उनके दो पत्र अभी मौजूद हैं। पण्डित शम्भूनाथ इंजीनियर, डॉ. गुरुचरण लश्कर, मुंशी जगमोहन, फैज अली, नारायण दास शास्त्री थानागाजी वाले, दीवान कर्नल रामचन्द्र परिवार के पास स्वामीजी के कुछ पत्र थे जो शोधार्थी ले गए (लगभग 11 पत्र), जो वापस नहीं हुए। उस दौरान स्वामीजी के 10-12 नौजवान शिष्य बनें।
Published on:
12 Jan 2020 01:40 am
बड़ी खबरें
View Allअलवर
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
