
दवा असली या नकली, क्यूआर कोड स्केन कर पता कर सकेंगे
अलवर. गंभीर बीमारियों से ग्रस्त मरीजों के लिए राहत भरी खबर है। ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (डीसीजीआई) ने कई ब्रांड की दवाओं पर क्यूआर कोड लगाने की अनिवार्यता लागू कर दी है। इसके बाद अब बाजार में कई तरह की दवाओं पर क्यूआर कोड आना शुरू हो गया है। इससे ग्राहक दवाओं पर प्रिंट क्यूआर कोड स्कैन करके असली व नकली दवा का पता लगा सकेगा।
चिकित्सक सिर्फ जेनेरिक दवा ही लिख सकते है : अलवर मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य एवं नियंत्रक लोकेन्द्र शर्मा ने बताया कि नेशनल मेडिकल कौंसिल (एनएमसी ) की गाइड लाइन के अनुसार चिकित्सक केवल जेनेरिक दवाएं ही लिख सकते हैं। यदि कोई चिकित्सक एनएमसी की गाइड लाइन का उल्लंघन करता है, तो उसका 30 दिन तक लाइसेंस निलंबित करने का प्रावधान है। इसके साथ ही चिकित्सक की लिखावट भी स्पष्ट होनी चाहिए। ताकि आसानी से पढ़ने में आ सके। इसके अलावा मरीज को अनावश्यक दवाएं नहीं लिखी जा सकती है। एनएमसी की ओर से जारी ये निर्देश सभी पंजीकृत चिकित्सकों के लिए है। इसके साथ ही फॉर्मासिस्ट के लिए भी नियम बनाए गए हैं। इस इस संबंध में सभी चिकित्सकों को निर्देश भी जारी किए गए हैं।
उल्लेखनीय है कि सरकार के प्रतिबंध के बावजूद भी डॉक्टर ब्रांडेड दवा लिखने से बाज नहीं आ रहे हैं। इस कारण सरकार को नकली दवाइयों की पहचान के लिए क्यूआर कोड का सहारा लेना पड़ा है। इस नई तकनीक का लाभ यह होगा कि आमजन भी इस क्यूआर कोड के माध्यम से नकली और असली दवाई में अंतर जान सकेगा और दवाइयों के नाम पर होने वाले बड़े धोखे से बच सकेगा।
क्यूआर कोड किया अनिवार्य
यह सुविधा देशभर में एक अगस्त से शुरू हो गई है। इसके तहत फिलहाल एलर्जी, अस्थमा, थाइराइड, खांसी-जुकाम, बुखार, गर्भ निरोधक, ब्लड शुगर व हृदय रोग, बीपी आदि करीब 300 ब्रांड की दवाओं पर क्यूआर कोड लगाना अनिवार्य किया है। क्यूआर कोड के माध्यम से संबंधित दवा का जेनेरिक नाम, ब्रांड का नाम, उत्पादक और पता, बैच नंबर, उत्पाद तिथि, एक्सपायरी तिथि एवं निर्माता कंपनी का लाइसेंस नंबर सहित अन्य जानकारी का पता लग सकेगा। वहीं, दवाओं पर क्यूआर कोड नहीं लगाने पर संबंधित निर्माता कंपनी पर जुर्माना की कार्रवाई होगी।
क्यूआर कोड करेगा नकली दवाओं की पहचान
अब बाजार में दवाओं की नई खेप क्यूआर कोड व बार कोड के साथ ही आ रही है। ऐसे में लोग दवा खरीदने से पहले क्यूआर कोड को स्कैन करके पता लगा सकेंगे कि दवा असली है या नकली। इससे मुनाफा कमाने के लिए लोगों की जान से खिलवाड़ करने वालों पर कुछ हद तक अंकुश लग सकेगा। गौरतलब है कि जिले भर में हर महीने एक से दो करोड़ रुपए की दवाओं की बिक्री होती है।
अनियमितता पाए जाने पर कार्रवाई
औषधि नियंत्रक विभाग की ओर से अनियमितताएं पाए जाने पर इस वर्ष अभी तक 450 मेडिकल स्टोर संचालकों का लाइसेंस निलंबित किया जा चुका है। इसके साथ ही 70 मेडिकल स्टोर संचालकों के लाइसेंस रद्द किए गए हैं। वहीं, एनडीपीएस एक्ट में पुलिस के साथ मिलकर 14 कार्रवाई की गई है।
नकली दवाओं की रोक के लिए कुछ ब्रांड की दवाओं पर क्यूआर कोड अनिवार्य कर दिया गया है। अब बाजार में आने वाली दवा पर कोड आना शुरू हो गया है। इससे मरीजों को असली नकली दवा की पहचान कर सकेगा। नकली दवा बिक्री करने वालों पर कार्रवाई हो सकेगी।
-जितेन्द्र मीणा, सहायक औषधि नियंत्रक।
Published on:
20 Aug 2023 11:31 am
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