
अलवर के युवराज प्रताप सिंह की मौत से हर शख्स की आंखें हो गई थी नम, जानिए उस समय क्या हुआ था?
27 मार्च का वह दिन अलवर वासी कभी नहीं भूल पाएंगे। इस दिन अलवर राजघराने के युवराज प्रताप ङ्क्षसह की हुई मौत ने पूरे अलवर को झकझौर दिया था। इस पुराने मुद्दे को अलवर के पुराने लोग तो अभी तक भूले नहीं थे जो अब भी समय-समय पर याद करते हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अलवर में जनसभा के दौरान अलवर में युवराज प्रताप सिंह की मौत को कांग्रेस से जोडकऱ इस मुद्दे को फिर जीवित कर दिया है। इस मामले में शहर के कई प्रत्यक्षदर्शी लोगों ने अपने संस्मरण इस प्रकार बताए।
मैंने युवराज प्रताप सिंह को कई बार देखा था। विधार्थी काल में युवराज ने मुझे सम्मानित भी किया था। अट्टा मंदिर में हिंडोले में वे स्वयं उपस्थित होते थे। जब उनके निधन का समाचार मिला तो हर इंसान की आंखों में आंसू थे। शहर में हजारों की संख्या में एेसे घर में जिनके घरों में अंतिम संस्कार होने तक चूल्हे ही नहीं जले। - हरिकिशन खत्री, अलवर निवासी शिक्षक
&युवराज प्रताप सिंह के अंतिम संस्कार में इतने शामिल हुए कि लोगों को पहाड़ पर चढऩा पड़ा। मैंने इस पूरे दृश्य को देखा तो लगता है कि यह ही एक ऐसी घटना था जिससे पूरे अलवरवासियों को झकझोर कर रख दिया। अलवर में लोग रो रहे थे, हर कोई उनके दर्शन करना चाहता था। उनके साथ आए घोड़े और हाथी की भी आंखों में आंसू थे।
-हरिप्रसाद सैन, अलवर निवासी
युवराज प्रताप सिंह अलवर वासियों में बहुत लोकप्रिय और धार्मिक प्रवृत्ति के थे। इस समय युवराज पर सरकार का काफी दवाब था। ऐसे में उनकी सम्पत्ति जब्त कर उन्हें फूलबाग पैलेस में नजरबंद कर दिया गया। यही नहीं महल का बिजली और पानी का कनेक्शन काट दिया गया। यहां बाघ, चीता, हाथी और कुत्ते भी भूखे मरने लगे। प्रशासन ने उन पर मीसा लगा दिया था। 24 मार्च 1976 के दिन फूलबाग जाने वाले सभी रास्ते बंद कर दिए गए। शहर में कई तरह की अफवाह फैल गई थी। इसके बाद 27 मार्च, 1976 को अचानक युवराज प्रताप सिंह के देहांत का समाचार आया तो पूरा शहर दहल गया। हर किसी को यह विश्वास ही नहीं हो रहा था। रात के समय पूरे शहर की लाइट बंद कर दी गई। इस समय सभी की आंखे नम थी । - मास्टर प्यारे सिंह, इतिहासविद्
Published on:
29 Nov 2018 04:04 pm
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