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दुनिया को उर्दू में श्री मद्भागवत गीता देने वाले अनवर जलालपुरी को लोगों ने ऐसे किया याद

दुनिया को उर्दू में श्री मद्भागवत गीता देने वाले अनवर जलालपुरी को लोगों ने ऐसे किया याद

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ambedkar nagar

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अम्बेडकर नगर. उर्दू अदब और तहजीब का एक बड़ा सितारा जो अब हमारे बीच नहीं रहा, लेकिन इस सितारे की ज्ञान की रौशनी से निकली हर एक लफ्ज हमेशा लोगों के दिलों को रौशन करती रहेगी। जी हां हम बात कर रहे हैं उर्दू के विश्व विख्यात शायर अनवर जलालपुरी की, जिन्होंने उर्दू साहित्य के माध्यम से पूरी दुनिया में न सिर्फ अपना बल्कि अपने कस्बे, अपने जिले, अपने प्रदेश और देश का नाम रौशन किया है। पिछले दिनों अनवर जलालपुरी जलालपुर स्थित अपने घर में बाथरूम में फिसलने से हुए ब्रेन हैम्ब्रेज के कारण इलाज के दौरान लखनऊ में हो गई थी, जिनकी मौत से न सिर्फ उर्दू जगत के लोग बल्कि पूरा साहित्य समाज और अन्य लोग भी गमजदा हुए थे। जिले के इस शानदार व्यक्तित्व के धनी अनवर जलालपुरी को देश और दुनिया के लोगों ने श्रद्धांजलि दी थी। यश भारती और पद्मश्री सम्मन से सम्मानित किये गए अनवर जलालपुरी को याद करते हुए जिले के टांडा कस्बे में एक शाम अनवर जलालपुरी के नाम कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें कई जानी मानी हस्तियों ने अनवर जलालपुरी के योगदान को याद किया।


देश के आजाद होने से ठीक पहले 6 जुलाई 1947 को तत्कालीन जिला फैजाबाद के जलालपुर कस्बे में जन्मे अनवर साहब की प्रारम्भिक शिक्षा जलालपुर में ही हुई थी। बाद में वे उच्च शिक्षा अलीगढ़ मुस्लिम विश्व विद्यालय से अंग्रेजी में स्नातक किया और वहां से वापस होने के बाद जलालपुर के ही एक कॉलेज में अंग्रेजी के लेक्चरार के रूप में नौकरी की, लेकिन उर्दू से उनका ऐसा लगाव था कि उन्होंने मुशायरों महफ़िलों में अपनी रचनाओं से लोगों के दिलों में जगह बनानी शुरू कर दी। जिसमें उनकी ख्याति तब बढ़ी जब उन्होंने अपनी कई किताबों के अलावा रविन्द्र नाथ टैगोर की गीतांजलि और श्री मद्भागवत गीता का उर्दू में अनुवाद कर उर्दू जानने वालों को एक नायाब तोहफा दिया।

बेशकीमती हीरा थे अनवर साहब

नेशनल उर्दू तहरीक नाम से उर्दू साहित्य के विकास के लिए काम कर रही एक संस्था ने टांडा में अनवर जलालपुरी को श्रद्धांजलि देने के लिए एक शाम अनवर जलालपुरी के नाम कार्यक्रम का आयोजन किया, जिसमें उर्दू जगत से जुड़ी कई हस्तियों ने अनवर जलालपुरी के बारे में विस्तार से चर्चा की। अनवर साहब के बारे में बात करते हुए डॉ. जियाउद्दीन ने बताया कि जिस तरह से ढाई अक्षर के प्रेम के शब्द से पूरी दुनिया को अपने साथ किया जा सकता है वैसे ही अनवर जलालपूरी ने पूरी दुनिया को अपने वश में कर लिया था।

उन्होंने बताया कि वे जहां भी जाते थे, लोग उनके मुरीद हो जाते थे। सुलतानपुर जिले में उर्दू विषय की प्रोफेसर डॉ. जेबा महमूद ने उनके एक शेर 'अभी मायूस मत होना, अभी बीमार जिन्दा है' से बात शुरू की और उनके बारे में विस्तार से चर्चा की। इस कार्यक्रम में पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष अजरा सुल्ताना, वर्तमान नगर पालिका अध्यक्ष नसीम रेहाना सहित बहुत से लोगों ने चर्चा कर अनवर जलालपूरी को याद किया। कार्यक्रम आयोजित करने वाली संस्था की तरफ से इस साल से अनवर जलालपुरी के नाम पर सम्मान देने का सिलसिला शुरू किया गया, जिसमें इस बार डॉ ज़ेबा महमूद और नसीम रेहाना को इस सम्मान से सम्मानित किया गया।