
अम्बेडकर नगर. एक पुरानी कहावत है कि नीम हकीम खतरे जान। मतलब किसी भी चलते फिरते हकीम, वैद्य या डॉक्टर, जिसके पास न कोई डिग्री होती है और न ही जानकारी होती है, ऐसे लोगों से इलाज कराना जान जोखिम में डालना है। ऐसा ही एक मामला सामने आया है, जिसमें बुखार से पीड़ित एक महिला का इलाज गांव के एक झोलाछाप डॉक्टर ने ऐसा किया कि बाद में जान बचाने के लिए महिला को अपना हाथ कटवाना पड़ा।
मामला जिले के हंसवर थानाक्षेत्र का है। इस थाना क्षेत्र के बकड़ापुर लखनपुर गांव की महिला इन्द्रावती पत्नी इन्द्रेस कुमार को कुछ दिन पहले बुखार था, जिसका इलाज कराने वह अपने पति के साथ गांव में ही एक झोलाछाप डॉक्टर नईम के पास पहुंच गई। आरोप है कि नईम ने इस महिला को एक एक्सपाइरी डेट की सिरिंज से इंजेक्शन लगा दिया, जिसमें इंजेक्शन लगाते समय ही सिरिंज महिला के हाथ में ही टूट गई। काफी कोशिशों के बावजूद यह झोलाछाप डॉक्टर महिला के हाथ से टूटी सिरिंज नहीं निकल सका तो ऐसे ही वापस भेज दिया और बाद में आने के लिए कहा।
इस तरह हाथ कटाने की आई नौबत
बुखार से पीड़ित महिला अपने बुखार के साथ साथ हाथ में टूटी सिरिंज के उपचार के लिए फिर से उसी डॉक्टर के पास दूसरे दिन भी पहुंची तो आरोपी डॉक्टर ने उसे ग्लूकोस लगा दिया। हाथ में टूटी सिरिंज के कारण महिला का हाथ भी काला पड़ने लगा था। महिला की हालत लगातार खराब होता देख आरोपी डॉक्टर ने उसे जावाब दे दिया और कहाकि अब उसके बस का मामला नहीं है, उसे किसी और डॉक्टर को दिखाना पड़ेगा। लगातार खराब होती हालत देख महिला के पति इन्द्रेश कुमार अपनी पत्नी को लेकर ट्रामा सेंटर लखनऊ इलाज के लिए भी गए वहां कुछ समय तक इलाज कराने के बाद वापस आये तो फिर महिला के हाथ की हालत खराब होने लगे। जिसके बाद महिला को जिला अस्पताल में भारती कराया गया। जिला अस्पताल में हाथ की सदन को देखते हुए डाक्टरों ने उनके हाथ को काटे जाने की सलाह देते कहाकि अगर हाथ नहीं काटा गया तो जान भी जा सकती है । मजबूरन जान बचाने के लिए महिला को अपना एक हाथ कटवाना पड़ा ।
आरोपी डॉक्टर के खिलाफ दर्ज हुआ मुकदमा
महिला के हाथ काटे जाने के बाद पीड़ित महिला के पति इन्द्रेस कुमार ने आरोपी झोलाछाप डॉक्टर नईम के खिलाफ हंसवर थाने में तहरीर देकर मुकदमा दर्ज कराया है। पुलिस ने बताया कि गलत उपचार करने से महिला को हाथ कटवाने की नौबत आई है। इस मामले में आरोपी डॉक्टर के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है और जल्द ही इस मामले में अग्रिम कार्रवाई भी अमल में लाई जायेगी।
जिस तरह से गांवों और शहरों में झोलाछाप डॉक्टरों का जाल फैला हुआ है और लोग इन झोलाछाप डॉक्टरों के झांसे में आकर अपनी जिन्दगी के साथ खिलवाड़ कर लेते हैं। सरकार की तरफ से भी तमाम दावों के बावजूद इस पर नियंत्रण नहीं हो पा रहा है। ऐसे में लगता है कि अगर लोग स्वयं सचेत न हुए तो इस तरह की घटनाएं आगे भी होती रहेंगी।
Published on:
17 May 2018 11:25 am
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