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अम्बेडकर नगर. प्रदेश सरकार में स्वास्थ्य विभाग को दुरुस्त करने की चाहे जितनी कवायद कर ली जाए और लोगों को स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराने के चाहे जितने दावे किए जाए, लेकिन इन दावों को पूरा कर पाना कोई आसान काम नहीं है और इसका सबसे बड़ा कारण है, सरकारी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेज में तैनात किये गए डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों के सरकारी जॉब होने के बावजूद प्राइवेट प्रैक्टिस में लिप्त होने की लालच।
सरकार द्वारा फरमान जारी किया गया है कि कोई भी सरकारी सेवारत डॉक्टर प्राइवेट प्रेक्टिस नहीं करेगा और जब इस पर सरकार ने कड़ाई शुरू की तो डाक्टर सकते में आ गए। सरकार और मेडिकल काउंसिल अॉफ इण्डिया द्वारा बायो मेट्रिक प्रणाली लागू होने पर डॉक्टर अब इस्तीफा देकर भाग रहे है।
मामला अम्बेडकरनगर जिले के राजकीय महामाया एलोपैथिक मेडिकल कॉलेज का है , जहां अब तक पांच डॉक्टर इस्तीफा देकर जा चुके है और दो अटैच डाक्टरों ने भी आने से मना कर दिया है। डॉक्टर ही नहीं अब तो स्टाफ भी मेडिकल कॉलेज छोड़ कर भाग रहे है। डॉक्टरों की भारी कमी के कारण जहां ये मेडिकल कॉलेज का अस्तित्व खतरे में दिखाई दे रहा है , वही गैर जनपदों से आये मरीजों का बुरा हाल है।
जिले का राजकीय महामाया एलोपैथिक मेडिकल कॉलेज अव्यवस्थाओं का दंस झेलने के साथ-साथ डॉक्टरों की कमी के कारण अपने अबतक के सबसे बुरी स्थिति में पहुंच गया है। यहां रोजाना 1 से 2 हजार मरीज अम्बेडकर नगर के साथ-साथ गैर जनपदों से आते है , लेकिन अव्यवस्थाओं और डॉक्टरों की कमी के कारण या तो वापस चले जाते है या फिर प्राइवेट डॉक्टरों से अपना इलाज कराने को मजबूर है।
सरकार द्वारा हर दावा यहां जमीन पर नजर नहीं आता। सबसे बुरा हाल तो वार्डों में भर्ती मरीजों का जो डॉक्टर तो नहीं वरन जूनियर डॉक्टरों और नर्सों के भरोसे पड़े रहते है। इनको देखने और सुनने वाला कोई नहीं। गंभीर मरीजों को भी यहां जल्दी डॉक्टर नहीं मिल पाते। डॉक्टरों की कमी और मेडिकल कॉलेज की अवयवथाओं का जायजा लिया गया तो जो इस पिछड़े क्षेत्र में स्थापित किये गए इस मेडिकल कॉलेज जो सच्चाई सामने आई।
ये हैं वे डॉक्टर जो दे चुके हैं इस्तीफ़ा
मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस छात्रों की पांच साल की पढाई पूरी हो चुकी है, लेकिन जबसे प्रदेश में योगी सरकार आई है, कड़ाई के कारण इस मेडिकल कॉलेज से अबतक लगभग डेढ़ दर्जन डॉक्टर इस्तीफ़ा देकर जा चुके हैं। अब तक इस्तीफ़ा देकर जाने वालों में प्रमुख रूप से नाक कान गला विभाग के डॉ. डीबी सिंह, टीबी एवं चेस्ट विभाग के डॉ. अभिषेक चंद्र, रेडियोलॉजी की डॉ. वंदना, पीडिया के डॉ फैजुर्रहमान व डॉ. एडी तिवारी, सर्जरी के बीएस तिवारी, मेडिसिन के डॉ. आसिफ अख्तर, पैथालॉजी के डॉ. अरशद अख्तर, बायोकेमिस्ट्री के डॉ गीता जायसवाल, गायनी विभाग की डॉ ऋचा गंगवार और डॉ रेनू सिंघल के अलावा एनाटामी विभाग के डॉ इंद्र कुमार व डॉ आशीष शर्मा प्रमुख रूप से हैं।
OPD के लिए ठोकरें खा रहे हैं मरीज
यहां के मेडसिन विभाग का हाल देखिये जहां पर सैकड़ों की संख्या में लोग गैर जनपदों से भी अपने इलाज के लिए आते है। मेडिकल कॉलेज में 16 अलग-अलग बीमारियों के लिए OPD के अलग-अलग डॉक्टरों के लिए चैंबर बनाये गए है, लेकिन यहां केवल दो ही चैम्बरों में डॉक्टर मौजूद मिले और मरीजों की भीड़ लगी हुई थी। अपने मरीजों को दिखाने के लिए तीमारदार सुबह से ही लाइन लगा कर अपनी बारी का इंतजार करते दिखाए पड़े।
इनमे से जब एक से पूंछा गया तो बताया की अव्यवस्था के साथ साथ डॉक्टरों की भारी कमी है , तीमारदार ने बताया की भीड़ ज्यादा होने के कारण जब हम नहीं दिखा पाते तो प्राइवेंट में दिखाना हमारी मजबूरी बन जाती है।
रेडियोलॉज़ी की तरफ का नजारा भी कुछ ऐसा ही देखने को मिला। यहां की स्थिति तो और भी भयावह थी। वार्डो में भर्ती मरीज और उनके तीमारदार भटक रहे थे। मरीजों के कई तीमारदार तो ऐसे मिले जो कई दिनों से अल्ट्रा साउंड कराने के लिए दौड़ रहे थे , वार्डों में भर्ती उनके मरीजों को डॉक्टर ने अल्ट्रासाउंड के लिए भेजा पर अल्ट्रा साउंड करने वाला डॉक्टर ही इस्तीफा देकर चला गया है। अब बिना अल्ट्रासाउंड के मरीज वार्डों में बिना इलाज के ही पड़ा है। जब वहां बैठे रेडियोलॉजी विभाग के इंचार्ज से पूछा गया तो चौंकाने वाला जबाब मिला वीडियो में आप भी सुन लीजिये।
बायोमैट्रिक व्यवस्था से डॉक्टरों में दहशत
सरकार की मंशा है कि प्रदेश में मरीजों को मुफ्त में स्वास्थ सुविधा मिले और इसके लिए सबसे आवश्यक है कि डॉक्टर अपनी ड्यूटी समय से करें, लेकिन इस मेडिकल कालेज में जितने भी अच्छे डॉक्टर तैनात हैं सब के सब कहीं न कहीं प्राइवेट प्रैक्टिस में लिप्त रहे हैं और जब सरकार की तरफ से इन्हें राइट टाइम करने के लिए बायोमैट्रिक मशीन लगाईं गई तो सिवाय मेडिकल कॉलेज छोड़कर भागने के इनके पास कोई चारा नहीं था। डॉक्टरों के अचानक दिए गए इस्तीफे के बारे में जब मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल साहब से बात किया गया तो उनका अलग ही तर्क था।
प्रिंसिपल साहब इस इस्तीफे को सरकार की कड़ाई के बजाय इसे दकताओं के निजी कारण से जोड़कर देख रहे हैं।उन्होंने बताया कि जिन डॉक्टरों ने इस्तीफा दिया है ये उनका निजी कारण है और मेडिकल कॉलेज में डाक्टरों की कमी का रोना रोने के साथ साथ शासन को लिखा पढ़ी की बात भी कर रहें है।
कुछ भी हो लेकिन स्वास्थ विभाग के साथ साथ मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों की भारी लापरवाही के कारण ही मरीजों को परेशानी का सामना कराना पड़ रहा है। डॉक्टर्स हमेशा लेट आते है और जल्दी चले जाते है। जब से वायो मेट्रिक प्रणाली लागू हुई है तभी से सभी डॉक्टरों के होश उड़े है और निजी कारण बता कर इस्तीफा देकर भाग रहे है।
Published on:
04 Aug 2017 12:18 pm
