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15 हिरणों की हिरणों की मौत के बाद अधिकारियों पर गिरी गाज, प्रभारी समेत 4 कर्मचारी निलंबित…

Ambikapur Deer Death Case: छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर जिले में संजय वन वाटिका में आवारा कुत्तों के हमले में 15 हिरणों की मौत के मामले में वन विभाग ने सख्त रुख अपनाया है।

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15 हिरणों की हिरणों की मौत के बाद अधिकारियों पर गिरी गाज, प्रभारी समेत 4 कर्मचारी निलंबित...(photo-patrika)

15 हिरणों की हिरणों की मौत के बाद अधिकारियों पर गिरी गाज, प्रभारी समेत 4 कर्मचारी निलंबित...(photo-patrika)

Ambikapur Deer Death Case: छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर जिले में संजय वन वाटिका में आवारा कुत्तों के हमले में 15 हिरणों की मौत के मामले में वन विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। मुख्य वन संरक्षक सरगुजा वनवृत्त दिलराज प्रभाकर ने गंभीर लापरवाही मानते हुए वन वाटिका के प्रभारी सहित तीन सहायकों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।

जारी आदेश के अनुसार उपवनक्षेत्रपाल (एससीएफओ) एवं प्रभारी अशोक सिन्हा, सहायक वनपाल ममता परते, प्रतिमा लकड़ा और बिंदु सिंह को छत्तीसगढ़ सिविल सेवा आचरण नियम 1965 के तहत निलंबित किया गया है। अधिकारियों पर वन्य प्राणियों के संरक्षण में घोर उदासीनता का आरोप है।

Ambikapur Deer Death Case: कोटरा, चीतल और चौसिंघा की हुई मौत

घटना में कुल 15 हिरणों की मौत हुई, जिनमें कोटरा, चीतल और चौसिंघा प्रजाति शामिल हैं। मृतकों में नर और मादा दोनों शामिल हैं। घटना के बाद एक और हिरण की मौत होने की भी पुष्टि हुई है। जानकारी के मुताबिक, 4-5 आवारा कुत्ते बाड़े में घुस गए और हिरणों पर हमला कर दिया। इस हमले में बड़ी संख्या में वन्यजीवों की मौत हो गई, जिससे वन वाटिका की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं।

घटना छिपाने की कोशिश!

मामले में गंभीर बात यह सामने आई कि वाटिका प्रबंधन ने घटना को छिपाने की कोशिश की। 14 हिरणों के शव को जंगल के पीछे ले जाकर जलाने के सबूत मिले हैं, जिससे मामले ने और तूल पकड़ लिया है। घटना की जानकारी मिलने पर डीएफओ अभिषेक जोगावत मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने इस पूरे मामले की जांच के लिए एसडीओ के नेतृत्व में टीम गठित की है, जिसे दो दिन के भीतर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।

वन विभाग पर उठे सवाल

इस घटना ने वन्यजीव संरक्षण और सुरक्षा व्यवस्था की गंभीर खामियों को उजागर कर दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते प्रभावी सुरक्षा उपाय और निगरानी व्यवस्था सुनिश्चित की जाती, तो इस तरह की घटना को रोका जा सकता था। अब जरूरत है कि वन विभाग सुरक्षा प्रबंधन को और सख्त बनाए, बाड़ों की निगरानी बढ़ाए और वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए ठोस एवं स्थायी कदम उठाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो सके।