
Police force in Searching
अंबिकापुर/कुसमी. लंबे अरसे के बाद माओवादियों ने बलरामपुर-रामानुजगंज जिले में बड़ी घटना को अंजाम दिया है। दरअसल पिछले 15 दिन से झारखंड व छत्तीसगढ़ पुलिस द्वारा चलाए जा रहे अंतरराज्यीय माओवाद उन्मूलन ऑपरेशन के तहत गुरुवार को झारखंड के 218 सीआरपीएफ बटालियन के जवान सामरी थाना क्षेत्र के ग्राम चरहू पीपरढाबा के जंगल में हुए आईईडी ब्लास्ट की चपेट में आ गए।
इससे 7 जवान जख्मी हो गए। उन्हें हेलीकॉप्टर से रांची ले जाया गया। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार फोर्स की माओवादियों के साथ मुठभेड़ भी हुई है। इसमें एक माओवादी के भी मारे जाने की भी जानकारी सामने आ रही है। इस घटना की जानकारी मिलते ही एसपी सहित अन्य आला अधिकारी देर शाम मौके पर पहुंचे।
गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ व झारखंड बार्डर पर स्थित बूढ़ापहाड़ का जंगल घोर माओवाद प्रभावित क्षेत्र है। ये इलाका माओवादियों का गढ़ माना जाता है। यहीं बीच जंगल में माओवादियों का बेस कैंप है, जहां अक्सर झारखंड पुलिस से उनकी मुठभेड़ भी होती रहती है। लेकिन पुलिस यहां कभी अंदर तक नहीं घुस पाई है।
अभी एक महीने से यहां माओवादी गतिविधियों में तेजी आने के बाद झारखंड व छत्तीसगढ़ पुलिस द्वारा २९ अक्टूबर से अंतरराज्यीय माओवाद उन्नमूलन ऑपरेशन चलाया जा रहा है। इसमें दोनों राज्यों की जिला बल, सीआरपीएफ व अद्र्धसैनिक बल के 300-400 जवान शामिल हैं। सर्च ऑपरेशन झारखंड के भंडरिया, बाड़ेसांड़ व बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के सामरी थाना क्षेत्र अंतर्गत चलाया जा रहा है।
गुरूवार को दोपहर लगभग ३ बजे ज्वाइंट सर्च ऑपरेशन के बीच बूढ़ापहाड़ से लगे सामरी थाना क्षेत्र के चरहू पीपरढाबा के जंगल में हुए आईईडी ब्लास्ट की चपेट में आने से झारखंड के सीआरपीएफ 218 बटालियन के 7 जवान घायल हो गए। इसमें दो को ज्यादा चोट आई। इससे मौके पर हड़कंप मच गया।
घायल जवानों को प्राथमिक उपचार के बाद हेलीकॉप्टर से रांची के अस्पताल ले जाया गया। इस घटना के बाद चरहू पीपरढाबा व बूढ़ापहाड़ के पास सर्चिंग तेज कर दी गई है। घटना की जानकारी मिलने पर बलरामपुर एसपी डीआर आंचला अन्य अधिकारियों के साथ देर शाम को सामरी पहुंचे।
मुठभेड़ में एक माओवादी के मारे जाने की खबर
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार बूढ़ापहाड़ में छत्तीसगढ़ व झारखंड की संयुक्त पुलिस पार्टी व माओवादियों के बीच मुठभेड़ भी हुई है। इसमें एक माओवादी के मारे जाने की भी खबर है। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है।
बेस कैंप के चारों ओर बिछा रखी है सुरंग
झारखंड व छत्तीसगढ़ के बार्डर पर पडऩे वाला बूढ़ापहाड़ माओवादियों का गढ़ है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार यहां माओवादियों का एक बेस कैंप भी है। फोर्स इस बेस कैंप तक न पहुंच पाए, इसके लिए माओवादियों ने घने जंगल में चारों तरफ बारूदी सुरंग बिछा रखी है। फोर्स ने जंगल के बाहरी क्षेत्र को तो चारों ओर से तो घेर लिया है लेकिन माओवादियों द्वारा जगह-जगह बारूदी सुरंग बिछाए जाने से अंदर घुसने में दिक्कत आ रही है।
छत्तीसगढ़ के ये गांव हैं प्रभावित
बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के सामरी थाना क्षेत्र अंतर्गत आने वाले ग्राम चरहू, पीपरढाबा, पचपेढ़ी, पुन्दाग, चुनचुना, सबाग व अन्य ग्राम वर्षों से माओवाद प्रभावित रहे हैं। इन गांवों में माओवादियों के आमद-रफ्त की खबर अक्सर आती रहती है। बूढ़ापहाड़ में बेस कैंप होने की वजह से यहां माओवादियों को अपनी गतिविधियां संचालित करने में आसानी होती है।
लंबे समय बाद जिले में हुई घटना
बलरामपुर-रामानुजगंज जिले में लंबे समय बाद माओवादियों द्वारा किसी बड़ी घटना को अंजाम दिया गया है। एक समय पूरा जिला माओवाद प्रभावित था लेकिन माओवादियों के सफाए के बाद 7-8 साल से क्षेत्र शांत था। इस दौरान सामरी थाना क्षेत्र के गांवों में माओवादियों द्वारा छिटपुट घटना को अंजाम देने की ही बात सामने आती थी।
Published on:
16 Nov 2017 08:47 pm
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