चैत्र शुक्ल पक्ष प्रतिपदा के साथ ही पवित्र नवरात्र शुक्रवार को प्रारम्भ हो गया। शक्तिपीठ महामाया मंदिर, दुर्गा मंदिर, संत हरकेवल मंदिर, प्राचीन काली मंदिर में अखण्ड मनोकामना ज्योति कलश स्थापना के साथ मां की पूजा-अर्चना शुरू हो गई।
सुबह से ही महामाया मंदिर, दुर्गा मंदिर सहित अन्य देवी मंदिरों में श्रद्धालु पूजा-अर्चना करने पहुंचे। मंत्रोच्चारण के बीच घंटी की आवाज से मंदिर परिसर गूंज उठा। इसके साथ ही चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को हिंदू नववर्ष का भी स्वागत किया गया। वहीं शक्ति पीठ महामाया मंदिर में घी के 2600 और तेल के 1500, दुर्गा मंदिर में 3000 और संत हरकेवल मंदिर में 1600 ज्योति कलश प्रज्ज्वलित किए जाएंगे।
कलश की तैयारियों में कलश गृह की साफ-सफाई पहले से ही कर दी गई है। गुरुवार को आस्थावानों ने घी और तेल कलश के दीये में भरा। सभी ज्योति कलशों को सजा दिया गया है।
हुई घट की स्थापना
चैत्र नवरात्र का शुभारंभ शुक्रवार को चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के साथ होगा। देवी का आह्वान और घट स्थापना के लिए देवी पुराण में प्रात: काल का समय सर्वश्रेष्ठ है। सुबह 6 बजकर 29 मिनट पर घट स्थापना की गई। इसके साथ ही पूजा-पाठ का दौर भी शुरू हो गया।
अग्निकोण में रखें अंखड ज्योति
आचार्य एसएस त्रिपाठी ने बताया कि मनोकामना पूर्ति के लिए घट स्थापना विशेष अनुष्ठान है। इस दौरान शुद्धता के साथ नियम व संयम का पालन करना होता है। नवरात्र में अखंड ज्योति का विशेष महत्व है। इससे धन यश की वृद्धि होती है। अखंड ज्योति अग्निकोण में प्रज्ज्वलित करना चाहिए।
चैत्र नवरात्र के अवसर पर श्रीराम मंदिर, दुर्गा मंदिर और कुण्डला सिटी के शिव मंदिर में भागवत कथा का आयोजन किया जाएगा। दुर्गा मंदिर में वेद प्रकाश तिवारी कथा का वाचन करेंगे।