
potatoes washed from dirty water
अंबिकापुर. नये लाल आलू के नाम पर बाजार में जहर परोसा जा रहा है। नगर के ही अलग-अलग क्षेत्रों में सस्ते आलू को लाल रंग से रंग कर महंगे दर पर बेचने का खेल खुलेआम चल रहा है। लेकिन इसकी भनक न तो प्रशासन को है और न ही जिम्मेदार विभाग के अधिकारियोंं को है।
विभाग के अधिकारी कार्रवाई के लिए जहां शिकायत का इंतजार कर रहे हैं, वहीं इसका सीधा असर लोगों के स्वास्थ्य पर भी पड़ रहा है। रंग चढ़े आलू को खाने से किडनी पर इसका असर पड़ता है।
शहर में इन दिनों नए आलू की काफी ज्यादा मांग है। बाजार में आलू भी महंगे दर पर सब्जी विक्रेताओं द्वारा बेचा जा रहा है। लेकिन यह आलू सेहत के लिए कितना फायदेमंद है, यह तय करना एक बड़ी समस्या है। अभी तक फलों को ताजा रखने के लिए कलर करने का प्रचलन देखने को मिला था।
लेकिन अब शहर के अंदर कुछ जगहों पर बिचौलियों द्वारा सस्ते दर में सफेद आलू को खरीदकर रंग चढ़ाया जा रहा है। फिर उसे मार्केट में ऊंचे दामों पर बेचने का काम किया जा रहा है। ऐसा ही कुछ नजारा बौरीपारा तालाब व ठनगनपारा में देखने को मिल रहा है। चिकित्सकों के अनुसार रंग किए गए किसी भी खाद्य सामग्री का सीधा असर इंसान के शरीर पर पड़ता है।
इसका सबसे अधिक प्रभाव लोगों की किडऩी पर पड़ता है। यह पूरी तरह से गलत है। सबसे अधिक कलर किए गए आलू की खपत रविवार को साप्ताहिक बाजार में किया जाता है। इसके साथ ही गुदरी बाजार सहित आसपास के क्षेत्रों में भी कलर किए गए आलूओं को खपाया जा रहा है।
इसकी जानकारी होने के बावजूद अधिकारियों द्वारा इस तरफ कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। इधर जिम्मेदार विभाग के अधिकारी कार्रवाई करने के लिए शिकायत का इंतजार कर रहे हैं।
सेहत पर होता है सीधा असर
मेडिकल कॉलेज अस्पताल के एमडी डॉ अनिल प्रसाद के अनुसार कलर की गई किसी भी खाद्य सामग्री का किसी भी व्यक्ति के शरीर पर कितना असर पड़ता है। इसकी जानकारी अध्ययन करने पर ही पता चलेगा। लेकिन यह पूरी तरह से गलत है। कलर की गई खाद्य सामग्री के खाने से सबसे अधिक असर किडनी के साथ-साथ अन्य हिस्सों पर ही पड़ता है। इसे पूरी तरह से बंद कराया जाना चाहिए।
महंगे दर पर बेचने किया जा रहा है खेल
शहर में लाल आलू की डिमांड काफी ज्यादा है। इसी का फायदा इन दिनों बिचौलियों द्वारा उठाया जा रहा है। सस्ते दर पर सफेद आलू खरीदकर उसे पहले साबुन पानी से धोया जाता है। इसके बाद उसे लाल करने के लिए रंग में डाला जाता है। इसे मिलाने के लिए पैर से दबाया जाता है।
इसकी वजह से आलू में पूरी तरह से रंग घुस जाता है। आलू के छिलके को निकालने के बाद भी रंग का असर आलू पर रहता है। रंगने के लिए पूरी तरह से केमिकल का उपयोग बिचौलियों द्वारा किया जाता है। बड़े सब्जी विक्रेता भी इस रंगे आलू को बेचने का काम कर रहे हैं, लेकिन इस संबंध में जब भी उनसे पूछा जाता है वे भड़क जाते हैं।
जानकारी लेकर की जाएगी सख्त कार्रवाई
इसकी शिकायत अब तक किसी ने नहीं की है। लेकिन इसकी जानकारी लेकर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
विनोद गुप्ता, जिला खाद्य एवं औषधि प्रशासन अधिकारी
स्वास्थ्य पर पड़ता है सीधा असर
कलर का कितना असर शरीर पर पड़ रहा है। इसकी जानकारी लेेने के लिए उसका अध्ययन करना पहले जरूरी है। लेकिन स्वास्थ्य पर इसका सीधा असर पड़ता है। किसी व्यक्ति को किसी केमिकल व रंग से एलर्जी हो तो उसका किडनी इससे इफेक्टेड हो सकती है।
डॉ. अनिल प्रसाद, एमडी, मेडिकल कॉलेज अस्पताल
Published on:
12 Oct 2017 03:19 pm

बड़ी खबरें
View Allअंबिकापुर
छत्तीसगढ़
ट्रेंडिंग
