
Agent in RTO office
अंबिकापुर. आरटीओ के रिकॉर्ड रूम में अफसरों की नहीं एजेंटों की भी सीधी पहुंच हैं। मंत्री द्वारा आरटीओ कार्यालय को एजेंट मुक्त करने की घोषणा के बावजूद अंबिकापुर के आरटीओ कार्यालय में एजेंट बेरोक-टोक कार्यालय में न केवल घूमते हैं, बल्कि रिकॉर्ड रूम सहित अन्य शाखाओं में फाइल खंगालते भी नजर आते हैं। खासकर लाइसेंस, नवीनीकरण, स्थायी लाइसेंस, डुप्लीकेट व पता बदलवाने से संबंधित फाइलों को एजेंट लेकर घूमते रहते हैं। इन कामों के लिए वे लोगों से मोटी रकम वसूलते हैं।
लाइसेंस नवीनीकरण का काम 200 रुपए मेें होता है। एजेंट इसके लिए व्यक्ति देखकर 1500 से 2000 रुपए तक वसूलते हैं। यह सब काम परिवहन कार्यालय के अधिकारियों और कर्मचारियों के सामने होता है। परिवहन मंत्री राजेश मूणत के आरटीओ कार्यालयों को एजेंट मुक्त करने के आदेश की धज्जियां उड़ रहीं है। मंत्री के निर्देश के बाद भी अंबिकापुर आरटीओ कार्यालय में बेरोक-टोक एजेंट घूमते नजर आते हैं।
लेकिन व्यवस्था सुधारने के लिए आरटीओ व प्रशासन ने अब तक कोई पहल नहीं की है। परिवहन कार्यालय में आम नागरिकों की बजाए ज्यादातर एजेंट ही नजर आते हैं। आम नागरिक यहां अपना काम आसानी से नहीं करा सकता है। अगर फाइल पर एजेंट का नाम नहीं लिखा हो तो कोई भी काम निर्धारित समय पर कर्मचारियों द्वारा कर कर नहीं दिया जाता है।
फाइल पर बाकायदा एजेंटों के नाम लिखे होते हैं, इसके साथ ही कुछ बड़े एजेंटों के नाम की छपी हुई फाइल भी कार्यालय के शाखाओं में नजर आतीं हैं। इसे देख कहीं से नहीं लगता है कि आरटीओ कार्यालय कभी भी एजेंट मुक्त हो सकेगा।
दो वर्ष पूर्व कार्रवाई से मचा था हडकंप
दो वर्ष पूर्व अंबिकापुर में भी आरटीओ कार्यालय को एजेंट मुक्त कराने के लिए तात्कालीन कलक्टर ऋतु सेन के निर्देश पर प्रशिक्षु आईएएस अभिषेक सिंह ने कार्यालय का गेट बंद करके बड़ी कार्रवाई की थी। इसके बाद काफी दिनों तक आरटीओ कार्यालय में कोई भी एजेंट नजर नहीं आया था। लेकिन जैसे ही कार्यालय पुराना बस स्टैंड से हटकर सरगवां में शिफ्ट हुआ वहां फिर से एजेंटों का कब्जा हो गया।
एजेंटों से सम्पर्क करने पर जल्दी होता है काम
पत्रिका संवाददाता द्वारा हकीकत जानने आरटीओ ऑफिस पहुंचकर लर्निंग ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने की बात एजेंट से की गई तो। उसने इसके लिए 2000 रुपए की मांग की। इसके साथ ही रिन्यूअल की बात एक नागरिक ने उससे की तो उसे भी 1500 रुपए में कराने की बात कही। उसने दस्तावेज नहीं होने की बात कही तो लर्निंग लाइसेंस के आधार पर कार्यालय से दस्तावेज निकाल लेने की बात कही।
एजेंट खुद निकाल लाते हैं दस्तावेज
आरटीओ कार्यालय में एजेंट खुद फाइल लेकर विभिन्न शाखाओं में पहुंच जाते हैं। वहां पर अगर कर्मचारी उपस्थित नहीं होता है तो खुद ही सील-ठप्पा लगाकर फाइल जमा कर देते हैं।
कार्यालय के बाहर ही सजे हैं दुकान
परिवहन मंत्री के निर्देश के बावजूद कार्यालय में तो एजेंटों का तो कब्जा है। लेकिन कार्यालय के बाहर बाकायदा दुकान लगाकर आने-जाने वालों को बुलाकर उनके काम कराने का दावा एजेंटों द्वारा किया जाता है। लोगों के पास समय नहीं होने का एजेंटों द्वारा जमकर फायदा उठाया जाता है। लेकिन इनके खिलाफ कार्रवाई करने वाला कोई नहीं है।
एजेंटों के नाम फाइल होने की जानकारी नहीं
कार्यालय में कौन आ रहा है, हम कैसे बता सकते हैं। कोई भी आ सकता है। एजेंटों के नाम फाइल में लिखे होने की जानकारी मुझे नहीं है।
रमेश केरकेट्टा, सहायक अधीक्षक
दफ्तर बनाया जाएगा एजेंट मुक्त
समय अभाव की वजह से लोग एजेंटों के चक्कर में पड़ते हैं। कार्यालय को पूर्णत: एजेंट मुक्त बनाया जाएगा। इस पर कार्रवाई भी की जा रही है।
एसएस कौशल, आरटीओ
Updated on:
16 Sept 2017 09:29 pm
Published on:
16 Sept 2017 08:15 pm
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