होलिका दहन के दौरान जलकर बचे लकड़ी के ठूंठ पर तीन सौ मीटर की दूरी से तीर-धनुष से निशाना लगाते हैं। जिसका निशाना लग जाता है वह विजेता बनता है। इसके बदले में उसे गांव वाले एक महुआ का पेड़ सालभर के लिए इनाम में देते हैं। इसके बाद दूसरे साल जब प्रतियोगिता होती है, तो उस समय जो जीतता है, उसे दे दिया जाता है। इस अवधि में महुआ फूल और डोरी को जीतने वाला ही बीनता है।