
Childrens in jail
अंबिकापुर. केन्द्रीय जेल (Central jail) अंबिकापुर में ऐसे सैकड़ों कैदी निरूद्ध हैं जिन पर लूट, हत्या डकैती जैसे संगीन मामले दर्ज हैं। लेकिन इनके बीच जेल की सलाखों की पीछे कुछ ऐसे भी कैद जिनका कोई गुनाह नहीं है, ये हैं मासूम बच्चे। उनका दोष इतना है कि उनकी माताओं ने कोई न कोई अपराध किया है।
केन्द्रीय जेल अंबिकापुर में 11 ऐसे मासूम बच्चे हैं जिनका बाहर कोई सहारा न होने के कारण वे जेल में अपनी मां के साथ रहने को विवश हैं। कई ने तो सलाखों के बीच जेल की में ही जन्म लिया है, अब जेल प्रशासन इन बच्चों की जिंदगी में मुस्कान लाने का हर प्रयास कर रहा है।
जेल (Central jail) प्रशासन बच्चों के लिए न सिर्फ कपड़े, खिलौने की व्यवस्था करता है बल्कि उनकी शिक्षा के लिए भी पहल कर रहा है। इसके साथ ही कई कैदी भी सलाखों के पीछे से पढ़ाई कर डिग्री हासिल कर रहे हैं।
बच्चों की उम्र लगभग 3 से 5 वर्ष है। 6 वर्ष पूर्ण नहीं होने के कारण बच्चों को मां से अलग नहीं किया जा सकता है। जेल अधीक्षक राजेनद्र गायकवाड़ ने बताया कि इनकी मासूमियत पर जेल के हर कर्मचारी कायल हैं।
सभी रखते हैं इनका ख्याल
जेल अधीक्षक राजेनद्र गायकवाड़ के मुताबिक अगर कोई महिला किसी जुर्म के आरोप में जेल भेजी जाती है और उस समय उसके बच्चे की उम्र 6 साल से कम हो, तो वह अपने बच्चे को साथ में रख सकती है।
इसके अलावा अगर कोई गर्भवती महिला न्यायिक हिरासत में बच्चे को जन्म देती है, तो वह बच्चा भी मां के साथ जेल में रहता है। इन बच्चों को जेल की महिला बैरक में रखा जाता है। यहां पर उनकी सुरक्षा का विशेष ध्यान रखा जाता है। वे महिला बैरक की सर्किल में ही खेलते हैं।
दो बच्चों ने जेल में ही लिया जन्म
जेल अधीक्षक राजेन्द्र गायकवाड़ ने बताया कि वर्ष 2018 में एक महिला अपराध करने के बाद जेल में आई थी। उस समय महिला 7 माह की गर्भवती थी। महिला ने जेल में ही बच्चे को जन्म दिया।
वहीं वर्ष 219 में एक गर्भवती महिला हत्या के मामले में आई थी। उसने भी जेल में ही एक मासूम बच्ची को जन्म दिया। इस बच्ची का नाम जेल में ही रखा गया है। उसे सब अनन्या कह कर पुकारते हैं। अब इसकी उम्र १ वर्ष हो गई है। वह काफी मासूम है।
स्वास्थ्य का भी पूरा ध्यान
मां के साथ जेल में रह रहे बच्चों के स्वास्थ्य का भी पूरा ध्यान रखा जाता है। बच्चों को समय पर पौष्टिक आहार, दूध दिया जाता है। ताकि बच्चे कुपोषित न हो सकें। वहीं बच्चों के लिए जेल में खेलने के लिए खिलौने उपलब्ध रहते हैं। जेल अधीक्षक ने बताया कि बच्चों का टीकाकरण भी समय-समय पर कराया जाता है।
उंगली पकडक़र नियम कानून का पालन
मां की गोद में या उंगली पकड़ बच्चे भी जेल के कायदे कानून निभाते हैं। मां काम काम करती है तो वह भी उसके साथ होता है। मां जब सलाखों के अंदर जाती है तो वह भी साथ जाता है। इतना ही नहीं अन्य कैदियों का भी बच्चों को प्यार मिलता है।
16 बच्चों का कराया जा चुका है दाखिला
कई अपराधों में जेल आई महिलाओं के बच्चे बिना गुनाह किए सजा काटते हैं। ऐसी कई महिलाएं अपने बच्चों के साथ जेल में आईं है।
इस दौरान अगर बच्चे की उम्र 6 वर्ष से ज्यादा होने पर जेल प्रशासन द्वारा संबंधित जिले के अधिकारियों को सूचना देकर घर के नजदीकी स्कूल, हॉस्टल में बच्चों का नामांकन कराया जाता है और बच्चे पढ़ाई करते हैं। जेल अधीक्षक राजेन्द्र गायकवाड़ ने बताया कि केन्द्रीय जेल अंबिकापुर से 6 वर्ष से अधिक उम्र के १६ बच्चों का नामांकन कराया गया है और बच्चे अपना भविष्य गढ़ रहे हैं।
Published on:
06 Sept 2020 12:56 pm
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