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लाठी व पाइप के सहारे यहां टिकीं हैं हजारों परिवारों की जिंदगियां, देखकर खड़े हो जाएंगे रोंगटे

रिपेयरिंग के नाम पर एसईसीएल प्रबंधन द्वारा 6 महीने पूर्व फूंके गए थे 50 करोड़ रुपए, हरपल खतरे के साए में रह रहा हजारों परिवार

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SECL quarters on pipe and sticks

SECL quarters on pipe and sticks

चिरमिरी. कोरिया जिले के चिरमिरी स्थित एसईसीएल के हजारों क्वार्टर्स की छतें लाठी व पाइप के सहारे टिकी हुई हैं। ऐसे में यहां रहने वाले हजारों परिवारों की जिंदगियां भी खतरे के साए में हरपल रह रही हैं। जबकि एसईसीएल प्रबंधन द्वारा करीब छह महीने पहले ५० करोड़ खर्च कर 12 हजार 220 माइंस क्वाटर्स की की मरम्मत की गई थी, लेकिन खतरा अब भी बना हुआ है। वर्तमान में कॉलरी वर्कर्स को आवंटित माइंस क्वाटर्स की छत-छज्जा को ढहने से बचाने के लिए अपने जुगाड़ से लाठी-डण्डे लगा दिया गया है।


एसईसीएल द्वारा माइंस क्वार्टर्स की मरम्मत कराने के लिए करीब 50करोड़ का टेंडर जारी किया गया था और ठेकेदार को जल्द मरम्मत कार्य कराने के निर्देश दिए गए थे। मामले में ठेकेदार ने आनन-फानन में जैसे-तैसे मरम्मत कर राशि डकार ली और वर्तमान में मरम्मत वाले माइंस क्वार्टर्स जस की तस पड़ी हुई है। वहीं माइंस के सभी यूनिट में हाऊसिंग कालोनियों की मरम्मत कार्य चलने की बात कही जा रही है। वर्तमान में शहर में एसईसीएल के 12 हजार 220 माइंस क्वाटर्स हैं।

पिछले 6 माह से शहर के अलग अलग एरिया में मरम्मत कराई गई है। जबकि कालोनियों में रहने वाले श्रमिकों को आज भी श्रमिक संगठनो की वेलफेयर कमेटी का इंतजार है। क्योंकि वेल्फेयर कमेटी के माध्यम से कालोनी की दुर्दशा की शिकायत कर जांच कराने की बात कही जा रही है। लेकिन आज तक श्रमिक कालोनियों में एक बार भी यूनिट, एरिया, कंपनी की वेलफेयर कमेटी, एसईसीएल के उच्चाधिकारी नहीं पहुंच पाए। इधर ठेकेदार और श्रमिक नेता के बताए चुनिंदा कालोनियों का जायजा लेकर सहमति देने का आरोप लगाया जा रहा है।

मामले में कॉलरी वर्कर्स ने गोदरीपारा आजाद नगर कॉलोनी के माइंस क्वाटर्स और सीढिय़ों की छत-छज्जा को ढहने से बचाने के लिए अपने जुगाड़ से डण्डा-पाइप का जैक लगा दिया है। वर्तमान में जर्जर माइंस क्वाटर्स में रहने वाले कॉलरी वर्कर्स-परिजन खतरे के साए में अपनी जिंदगी गुजर-बसर करने को मजबूर हो गए हैं।


बरतुंगा में आवास की स्थिति बहुत ही खराब
कॉलरी वर्कर्स के अनुसार स्थानीय ठेकेदार द्वारा मरम्मत कार्यों में भारी लापरवाही बरती जा रही है। एसईसीएल के अधिकारी भी मरम्मत कार्यों की मॉनीटरिंग करने नहीं पहुंचते हैं। इससे ठेकेदार मनमानी कर जैसे-तैसे कार्य को पूरा करने में जुटा है। बरतुंगा के कॉलरी क्वाटर्स की मरम्मत कराने के लिए महज ३ महीने बाद सेप्टिक टैंक, चेंबर सहित पाइप लाइन पूरी तरह से टूट चुकी है और नालियां गंदगी से बजबजा रही हैं।

ऐसे में कॉलरी वर्कर्स को आवासों से बाहर निकलने वाला रास्ता ही टूट कर गिर गया है और श्रमिकों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। मामले में ठेकेदार व प्रबंधन की मिलीभगत की आशंका भी जताई जा रही है। श्रमिकों का कहना है कि कमीशन लेने और एसईसीएल के अधिकारियों को कमीशन देने के चक्कर में गुणवत्ताहीन कार्य कराया जा रहा है।


बड़ी ही गंभीर बात
मुझे इसकी जानकारी नहीं है। अगर कालोनियां गिरने के कगार पर हैं तो उन्हें रोकने के लिए डंडे का उपयोग किया जा रहा है। यह बड़ा आश्चर्य का विषय है। जो कि एक गंभीर बात है। आज ही टीम को भेज कर मामले की जानकारी ली जाएगी। अगर ठेकेदारों द्वारा रिपेयरिंग एवं मरम्मत कार्यों में ऐसे घटिया कार्यों को अंजाम दिया गया है तो उन्हें बाहर जाने के आलावा उनके पास दूसरा कोई विकल्प नहीं होगा।

के सामल, सीजीएम, एसईसीएल चिरिमिरी


शिकायत के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं
मैंने तो पहले ही कहा था कि शहर में जो एसईसीएल द्वारा डिसेंट हाऊसिंग कालोनियों के कार्य को अंजाम दिया जा रहा है, वह बहुत ही घटिया और दयनीय है। इसकी एक-दो बार नही बल्कि अनगिनत बार लिखित शिकायत की गई है। लेकिन आज तक एक भी कार्यवाई, जांच नहीं हुई है। केवल आश्वासन ही मिला है। शहर के बरतुंगा कालरी के कोठारी क्षेत्र, गोदरीपारा बी टाइप, आजाद नगर, एकता नगर, डोमनहिल कालरी के कालोनियों में जो भी कार्य कराए गए हैं। वह इसका जीता जागता सबूत है। मामले में कार्यवाई करने की तो कभी नहीं होगी। यह भी निर्धारित है। हादसा होने के बाद सिर्फ मुआवजा ही मिलता है।
लिंगराज नाहक, क्षेत्रीय महामंत्री एटक चिरिमिरी

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