
villagers hostage officers
सूरजपुर। भैयाथान के ग्राम सुदामानगर में शौचालय निर्माण में अनियमितता की जांच के लिए पहुंचे आरईएस के एसडीओ और जिला पंचायत उपाध्यक्ष समेत पांच लोगों को नाराज ग्रामीणों ने 7 घंटे तक गांव में ही बंधक बनाये रखा। जब तक मौके पर पुलिस व जिम्मेदार अधिकारी नहीं पहुंचे तब तक उन्हें गांव में ही रोके रखा और जब पुलिस की मौजूदगी में भैयाथान जनपद सीईओ वहां पहुंचे तो उन्होंने ग्रामीणों को समझाइश दी और सरपंच व सचिव के कार्यों की जांच का आश्वासन दिया तब जाकर शाम 6 बजे उन्हें वापस जाने दिया।
गौरतलब है कि गत मंगलवार को जनदर्शन के दौरान सुदामानगर के ग्रामीणों ने लामबंद होकर पंचायत के सरपंच व सचिव की कार्यशैली और कार्यों में अनियमितता की शिकायत की थी। इस पर कलक्टर केसी देव सेनापति एवं जिपं सीईओ संजीव कुमार झा ने भैयाथान के आरईएस एसडीओ मनोज सिंह को जांच अधिकारी नियुक्त करते हुए शिकायत की जांच व कार्रवाई प्रतिवेदन हेतु अधिकृत किया था।
इसी आदेश के तहत एसडीओ मनोज सिंह अपने सहयोगी उपयंत्रियों के साथ सुबह लगभग साढ़े 9 बजे ग्राम सुदामानगर पहुंचे थे। उनके पहुंचते ही सुदामानगर के ग्रामीणों ने अधूरे शौचालयों और पंचायत की नियम विपरित गतिविधियों की शिकायत करनी शुरू कर दी। इसी दौरान वहां जिला पंचायत उपाध्यक्ष गिरीश गुप्ता भी पहुंच गये। गिरीश गुप्ता के साथ एसडीओ मनोज सिंह व उपयंत्रियों को गांव का भ्रमण कराया और एक-एक घर के शौचालय दिखाए।
निराकरण करो, तब गांव से जाने देंगे
जिला पंचायत उपाध्यक्ष गिरीश गुप्ता ने बताया कि सरपंच और सचिव की मनमानी से आक्रोशित ग्रामीणों का गुस्सा वहां पहुंचे एसडीओ मनोज सिंह और उपयंत्रियों के साथ- साथ मुझ पर निकला। ग्रामीणों ने पहले तो पूरा गांव घुमाया और फिर जब जाने लगे तो बिना निराकरण किये किसी को भी जाने नहीं दिया गया। ग्रामीणों ने पंचायत सरपंच व सचिव की मनमानी के अलावा निर्माण कार्यों में अनियमितता, शासकीय राशि का गबन, पुलिया निर्माण में धांधली, शौचालय निर्माण में भर्राशाही समेत कई अनियमितता गिनाईं।
ग्रामीणों के आक्रोश को देखते हुए जब इस बात की जानकारी पुलिस और कलक्टर को दी गई तब मौके पर पहुंची पुलिस और भैयाथान के जनपद सीईओ अनिल अग्निहोत्री ने ग्रामीणों की शिकायत सुनकर सरपंच सचिव के विरूद्ध कार्रवाई और शौचालय निर्माण कार्य को प्राथमिकता से कराने का आश्वासन दिया तब जाकर 5 बजे वहां का माहौल सामान्य हुआ और उन्हें जाने दिया गया।
सचिव ने लिखित में स्वीकारी गलती
मौके पर मौजूद ग्राम पंचायत के सचिव से इस बारे में पूछा गया तो उसने अपनी गलती स्वीकार की। उसने अपने द्वारा किये गए कारनामे को एक कागज में लिखकर निरीक्षण करने आये अधिकारियो एवं जिला पंचायत उपाध्यक्ष को सौंपा। इसमें यह उल्लेखित था कि निरीक्षण के दौरान जितने भी शौचालय देखे गए कोई भी शौचालय पूर्ण नहीं पाया गया। मेरे द्वारा जनपद पंचायत एवं जिला पंचायत को शौचालय निर्माण की पूर्ण होने की झूठी जानकारी दी गई है।
मेरे कार्यकाल में कभी पंचायत बैठक नहीं हुई है और न राशि आहरण के पूर्व न बाद में किसी भी प्रकार का प्रस्ताव पंचों की सहमति से बनाया हूं। जो स्वयं शौचालय बनाये हैं उनकी राशि नहीं दी है। मैंने और सरपंच ने मनमाने ढंग से घटिया शौचालय निर्माण कराया है और पंचायत ओडीएफ घोषित हो चुका है। पंचायत के आय-व्यय का हिसाब नहीं है।
समझाइश पर माने ग्रामीण
सुदामानगर के ग्रामीणों ने जिला पंचायत उपाध्यक्ष व आरईएस के एसडीओ समेत प्रशासनिक दल को 5-6 घंटे तक गांव में रोक के रखा था। ग्रामीण गांव के सरपंच व सचिव की शिकायत कर रहे थे और आक्रोशित होकर बगैर कार्रवाई के वापस नहीं जाने देंगे की बात करने लगे थे, इस पूरे घटनाक्रम की सूचना जब कलक्टर को दी गई तो उन्होंने पुलिस अधीक्षक एवं जिपं सीईओ को आवश्यक दिशा निर्देश दिये, जिस पर वहां पुलिस टीम और जनपद सीईओ ने पहुंचकर हालातों को नियंत्रित किया और ग्रामीणों को समझाइश दी। इस दौरान जनपद सीईओ ने शिकायत की निष्पक्ष जांच और पंचायत अधिनियम के तहत कार्रवाई करने का आश्वासन दिया और शौचालय निर्माण का कार्य प्राथमिकता के साथ पूरा करने के आश्वासन पर ग्रामीण शांत हुए और वहां गये सभी अधिकारी व जनप्रतिनिधि वापस लौट आये हैं।
विजेन्द्र सिंह पाटले, एसडीए
Published on:
23 Sept 2017 09:26 pm

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