
CME organized on sickle cell disease
अंबिकापुर. राजमाता देवेन्द्र कुमारी सिंहदेव शासकीय चिकित्सालय अंबिकापुर में बुधवार को सिकल सेल बीमारी के ऊपर सीएमई का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव भी ऑनलाइन जुड़कर कार्यक्रम की सराहना की एव शुभकामनाएं भी दी। इस दौरान उन्होंने कहा कि विशेषज्ञों द्वारा सिकल सेल बीमारी उपचार एवं रोकथाम के लिए जो भी सुझाव दिए जाएंगे उसे प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र जिला अस्पताल एवं मेडिकल कॉलेज अस्पताल में शासन की तरफ से बेहतर सुविधा उपलब्ध कराने की अनुशंसा की जाएगी। ताकि मरीजों को इसका फायदा मिल सके।
कार्यक्रम में बतौर गेस्ट स्पीकर डॉ. मनीषा ठाकुर प्रोफेसर मेडिसिन सफदरजंग हॉस्पिटल न्यू दिल्ली, डॉ.स्मित श्रीवास्तव प्रोफेसर एचओडी एडवांस कार्डियक इंस्टीट्यूट रायपुर, डॉ. संजय वर्मा प्रोफेसर मेडिसिन शंकराचार्य मेडिकल कालेज दुर्ग, डॉ. योगेश जैन एमडी पीडियाट्रिक बिलासपुर (संगवारी), डॉ. तुषार जगजापे एमडी पीडियाट्रिक प्रोफेसर एम्स रायपुर, अंबिकापुर मेडिकल के एक्टिंग डीन डॉ. मधुमिता मूर्ति एचओडी एनेस्थीसिया अंबिकापुर, डॉ. मो. साजिल एमडी मेडिसीन अंबिकापुर , डॉ. अविनाशी कुजूर एचओडी प्रसूति रोग, डॉ योगेश्वर कालकोंडे एमडी मेडिसिन एमडी न्यूरो (संगवारी) ने सिकल सेल के बारे में जानकारी साझा की।
साथ ही अंबिकापुर शहर के विभिन्न अस्पतालों से भी डॉ जेके सिंह, डॉ हर्षप्रीत सिंह टुटेजा, सीएमई का मंच संचालन एव निर्देशन डॉ.अर्पण सिंह चौहान एमडी मेडिसीन मेडिकल कॉलेज अंबिकापुर के द्वारा बेहद खुबसूरत तरीके से किया गया। कार्यक्रम में मेडिकल कॉलेज अंबिकापुर के समस्त विभागाध्यक्ष, सीनियर डॉक्टर, जूनियर डॉक्टर, अस्पताल सलाहकार प्रियंका कुरील, नर्सिंग अधीक्षिका रश्मि मसीह, दूरपति राज, अस्पताल प्रबंधन स्टाफ छोटेलाल शर्मा, प्रिया परीडा, संगवारी की टीम एवं एमबीबीएस के छात्र उपस्थित थे। इसके साथ ही पोषण माह सितंबर के थीम 'फ्लेवर ऑफ इंडियाÓ के अंतर्गत डायटिशियन सुमन सिंह द्वारा विभिन्न राज्यों के डिश को भी प्रदर्शित किया गया।
सिकल सेल के मरीजों को जरूरत के अनुसार ही चढ़ाएं ब्लड
सीएमई कार्यक्रम में शामिल डॉ. मनीषा ठाकुर ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि सिकलसेल आनुवंशिक बीमारी है और यह माता-पिता से ही संतान में आती है। इस बीमारी का जड़ से इलाज संभव नहीं है। उन्होंने सिकल सेल के इलाज के संबंध में पूरी जानकारी चिकित्सकों को दी। उन्होंने कहा कि सिकल सेल के हर मरीजों को ब्लड नहीं चढ़ाना चाहिए। जिसे जरूरी है उसे ही ब्लड चढ़ाना चाहिए। अगर अनावश्यक ब्लड चढ़ाते हैं तो मरीज के लिए नुकसान भी हो सकता है। उन्होंने कहा कि आज सिकल सेल के नई तकनीक की दवाइयां जो दिल्ली-रायपुर में उपलब्ध है, उसका उपयोग करने की सलाह उन्होंने चिकित्सकों को दी।
साउथ अफ्रीका से भी जुड़े थे विशेषज्ञ
सीएमई कार्यक्रम में डॉ. जुली मखानी ने साउथ अफ्रीका से ऑनलाइन सिकल सेल बीमारी के बारे में जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि २२ हजार मरीज हमारे फॉलोअप में हैं। उन्होंने अपने यहां तैयार किए गए सेटअप की जानकारी देते हुए हर मरीजों का रेकॉर्ड मेंटेन करने के तरीके बताए।
सरगुजा में 180 लोग पॉजिटिव
कार्यक्रम में अस्पताल अधीक्षक डॉ. लखन सिंह एमडी ने भी सिकल सेल बीमारी के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सरगुजा में १ हजार लोगों की स्क्रिनिंग की गई है, जिसमें १८० लोग पॉजिटिव मिले हैं। इन मरीजों का शासन के गाइडलाइन के अनुसार मरीजों का उपचार चल रहा है।
Published on:
07 Sept 2022 08:16 pm
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