
Anurag Singhdeo
अंबिकापुर. चक्काजाम के 15 वर्ष पुराने मामले में जारी स्थायी वारंट पर अंबिकापुर विधानसभा से भाजपा प्रत्याशी अनुराग सिंहदेव ने बुधवार को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के न्यायालय में आत्मसमर्पण किया। यहां से उन्हें न्यायालय ने कस्टडी में लेते हुए न्यायिक अभिरक्षा में मेडिकल करवाने के बाद जेल भेज दिया। शाम को 40 हजार के जमानत व मुचलका पर उन्हें रिहा कर दिया गया।
वर्ष 2003 में कांग्रेस के शासनकाल में बनारस मार्ग की खस्ताहाल स्थिति को लेकर भाजपाइयों द्वारा अंबेडकर चौक के समीप चक्काजाम कर आंदोलन किया गया था। आंदोलन के दौरान भाजयुमो नेता अनुराग सिंहदेव सहित भाजपा के कई वरिष्ठ पदाधिकारियों के खिलाफ गांधीनगर थाना में धारा 341, 147 व 34 के तहत जुर्म भी दर्ज किया गया था।
गांधीनगर पुलिस ने सभी भाजपा पदाधिकारियों के खिलाफ फरारी में न्यायालय में मामले से संबंधित चालान भी पेश कर दिया था, लेकिन इसकी कोई जानकारी अनुराग सिंहदेव को नहीं थी। इसकी वजह से वे न्यायालय में उपस्थित नहीं हुए थे।
न्यायालय में सुनवाई के दौरान लगातार अनुपस्थित रहने की वजह से वर्ष 2006 में अनुराग सिंहदेव व अन्य के खिलाफ सीजेएम न्यायालय द्वारा स्थायी वारंट जारी किया गया था। स्थायी वारंट की जानकारी लगते ही नामांकन दाखिल करने से पूर्व बुधवार को भाजपा प्रत्याशी अनुराग सिंहदेव ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अमित राठौर के न्यायालय में बुधवार को सीआरपीसी की धारा 70(2) व 437 के तहत आत्मसमर्पण कर दिया।
उन्होंने आवेदन पेश कर स्थायी वारंट निरस्त करने की मांग करते हुए जमानत दिए जाने का निवेदन किया था। आत्मसमर्पण करने के बाद सीजेएम द्वारा उन्हें कस्टडी में लिया गया और पुलिस को आदेशित करते हुए मेडिकल परीक्षण के लिए मेडिकल कॉलेज अस्पताल भेज दिया गया।
दोपहर 2 बजे के बाद मेडिकल कराने पुलिस द्वारा उन्हें ले जाया गया। यहां समय लगने की वजह से शाम को पुलिस उन्हें केंद्रीय जेल लेकर पहुंची। इस दौरान काफी संख्या में उनके समर्थकों की भीड़ लगी हुई थी।
40 हजार के जमानत व मुचलका पर किया रिहा
सीजेएम अमित राठौर ने जमानत आवेदन पर लंच के बाद 3 बजे सुनवाई की। शाम लगभग ५ बजे सीजेएम ने जमानत आवेदन पर आदेश जारी किया। सीजेएम अमित राठौर ने 40 हजार के जमानत व मुचलका पर रिहा करने का आदेश सुनाया।
केंद्रीय जेल से रिहा हुए अनुराग
मेडिकल कराने के बाद भाजपा प्रत्याशी अनुराग सिंहदेव को पुलिस ने न्यायालय के आदेश पर केंद्रीय जेल पहुंचा दिया था। न्यायालय के रिलीज वारंट जारी करने के बाद वे जेल से रिहा हुए। लगभग आधे घंटे का समय उन्हें जेल में बिताना पड़ा।
Published on:
24 Oct 2018 06:08 pm
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