इस दौरान शिवम अपने परिजनों के साथ गुरुवार की रात कथा स्थल पर ही रुक गया था। अगली सुबह वह 7-8 बजे के बीच बिना किसी को बताए मंगरेलगढ़ स्थित मांड नदी में नहाने चला गया। काफी देर तक जब वह कहीं नजर नहीं आया, तब परिजनों को उसकी चिंता होने लगी। इसके बाद उसके पिता एवं परिजन उसकी तलाश करने लगे।