
sterilization
अंबिकापुर. आज समाज में महिलाओं को हक दिलाने में लोगों की सोच निश्चित ही बदली है, पर नसबंदी के प्रति सोच जस की तस है। आज भी पुरूष नसबंदी कराने में आगे नहीं आ रहे हैं। नसबंदी के प्रति पुरूष आज भी डरे हुए हैं।
परिवार नियोजन का जिम्मा महिलाओं ने ही उठा रखा है। पुरूष इस भागीदारी से आज भी कोसों दूर हैं। एक ओर पूरे संभाग में वर्ष 2018 में 4065 महिलाओं ने नसबंदी कराई है। वहीं इसके अपेक्षा पुरूषों की संख्या काफी कम मात्र 86 है।
गौरतलब है कि छोटा परिवार-सुखी परिवार का जिम्मा केवल महिलाओं ने ही उठा रखी है। इसके प्रति पुरूषों का दायित्व काफी कम है। मेडिकल कॉलेज अस्पताल के आंकड़े के अनुसार पूरे संभाग में वर्ष 2018 में अपै्रल से अब तक 4065 महिलाओं ने नसबंदी कराकर परिवार नियोजन के प्रति अहम भूमिका निभाई हैं।
वहीं इसके प्रति पुरूषों की संख्या काफी कम है। संभाग के मात्र 86 पुरूषों ने नसबंदी कराई है। इससे पता चलता है कि छोटे परिवार का जिम्मा महिलाओं पर ही निर्भर है। सिर्फ सरगुजा जिले में 3000 से ज्यादा महिलाओं ने मेडिकल कॉलेज अस्पताल में आकर नसबंदी कराई हैं।
मिलती है प्रोत्साहन राशि
स्वास्थ्य विभाग द्वारा नसबंदी के लिए तरह-तरह की योजनाएं चलाई जा रही है। इसके बाद भी पुरूषों पर इसका असर नहीं पड़ रहा है। नसबंदी के लिए प्रति महिला को स्वास्थ्य विभाग द्वारा 2000 रुपए प्रोत्साहन राशि के रूप में दी जाती है। वहीं पुरूषों को प्रोत्साहन राशि के रूप में 3000 रुपए दिए जाते हंै।
लाने-ले जाने की व्यवस्था
नसबंदी के लिए अस्पताल तक लाने व घर पहुंचाने तक की भी व्यवस्था स्वास्थ्य विभाग द्वारा की जाती है। वहीं महिलाओं को नसबंदी के लिए प्रेरित कर लाने वालों को भी प्रोत्साहन राशि के रूप में 300 रुपए व पुरूष को प्रेरित कर लाने वालों को 400 रुपए दिए जाते हैं।
Published on:
02 Mar 2019 03:50 pm
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