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अंबिकापुर. 10 वर्षीय एक बालिका एक सप्ताह पूर्व नहाने के दौरान ढोढ़ी में गिर गई थी। परिजन उसे ढोढ़ी से बाहर निकाल कर इलाज कराने की बजाय घर में ही रखे रहे। ३ दिन पूर्व तबियत बिगडऩे पर परिजन उसे सुरजपुर जिला अस्पताल लेकर पहुंचे।
चिकित्सकों ने स्थिति को गंभीर देखते हुए उसे भर्ती कराने की सलाह दी लेकिन वे उसे भर्ती कराने की बजाय घर ले लाए। जब फिर उसकी तबीयत बिगड़ी तो मेडिकल कॉलेज अस्पताल अंबिकापुर में भर्ती कराया। यहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
सूरजपुर जिले के ओडग़ी थाना क्षेत्र के ग्राम कुप्पी निवासी 10 वर्षीय खुशबू पिता सहदेव पंडो 1 जुलाई की दोपहर अपनी सहेली के साथ गांव की ढोढ़ी में नहाने गई थी। नहाने के दौरान उसका पैर फिसला और वह ढोढ़ी में गिर गई। घटना की जानकारी सहेली ने उसके परिजन को आकर दी।
सूचना मिलते ही उसके माता पिता सहित अन्य परिजन वहां पहुंचे और गांव वालों की मदद से उसे बाहर निकाला। इस दौरान बालिका बातचीत कर रही थी। बेटी की हालत ठीक देख वे उसे अस्पताल में भर्ती कराने के बजाए घर ले गए। हादसे के 3 दिन बाद 4 जुलाई को बालिका की तबियत बिगडऩे पर परिजन उसे इलाज के लिए ओडग़ी स्वास्थ्य केन्द्र लेकर पहुंचे।
यहां डॉक्टरों ने उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे सूरजपुर जिला अस्पताल रेफर कर दिया। इसके बाद उसे सूरजपुर में भर्ती कराया गया। यहां डॉक्टरों ने उसके माता-पिता से कहा कि आपके बेटी की हालत ज्यादा खराब है उसे भर्ती करा दो। यहां उसके माता-पिता ने डॉक्टर की बात न मानकर भूल कर दी। वे बेटी को घर ले गए।
अगले ही दिन बेटी की तबियत फिर बिगड़ गई। इसके बाद परिजन उसे इलाज के लिए भैयाथान अस्पताल में लेकर पहुंचे। इलाज में देर होने के कारण बालिका की स्थिति काफी बिगड़ चुकी थी। यहां से डॉक्टरों ने उसे बेतहर इलाज के लिए अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज अस्पताल रेफर कर दिया। यहां इलाज के दौरान रविवार की सुबह उसकी मौत हो गई।
Published on:
8 Jul 2018, 9:13 PM IST
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