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अकादमिक गतिविधियों के लिए रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय रायपुर से हुआ एमओयू

संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय सरगुजा का अकादमिक गतिविधियों के लिए पंडित रवि शंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर के साथ एमओयू हुआ। इसमें दोनों विश्वविद्यालय के कुलपति के समक्ष एमओयू के दस्तावेज पर हस्ताक्षर हुए। इस एमओयू के तहत दोनों ही विश्वविद्यालय के बीच अकादमिक गतिविधियां जैसे एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट, शोध, वर्कशॉप, कांफ्रेंस, सेमिनार, फैकल्टी डवलपमेंट प्रोग्राम, फैकल्टी एक्सचेंज प्रोग्राम आदि पांच वर्षों के लिए संभव हो पायेगा।

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अकादमिक गतिविधियों के लिए रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय रायपुर से हुआ एमओयू

अकादमिक गतिविधियों के लिए रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय रायपुर से हुआ एमओयू

अंबिकापुर। संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय सरगुजा का अकादमिक गतिविधियों के लिए पंडित रवि शंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर के साथ एमओयू हुआ। इसमें दोनों विश्वविद्यालय के कुलपति के समक्ष एमओयू के दस्तावेज पर हस्ताक्षर हुए। इस एमओयू के तहत दोनों ही विश्वविद्यालय के बीच अकादमिक गतिविधियां जैसे एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट, शोध, वर्कशॉप, कांफ्रेंस, सेमिनार, फैकल्टी डवलपमेंट प्रोग्राम, फैकल्टी एक्सचेंज प्रोग्राम आदि पांच वर्षों के लिए संभव हो पायेगा।

संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अशोक सिंह द्वारा विश्वविद्यालय के अकादमिक क्षेत्र में विद्यार्थियों के पक्ष में कई कार्य किए जा रहे हंै, इसमें यह एमओयू भी शामिल है। इससे दोनों विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राएं तथा शिक्षक शिक्षिकाएं लाभान्वित होंगे।

वर्तमान में कुलपति के प्रयास से गुरुघासीदास केन्द्रीय विश्वविद्यालय बिलासपुर, अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय बिलासपुर, इन्फीलिबनेट गांधीनगर गुजरात, राज्य योजना आयोग रायपुर, शहीद नंदकुमार पटेल विश्वविद्यालय रायगढ़ आदि के साथ अकादमिक गतिविधियों के लिए पहले ही विश्वविद्यालय एमओयू हो चुके हैं।


कुलपति प्रो. अशोक सिंह द्वारा रायपुर स्थित छत्तीसगढ़ काउंसिल ऑफ साइंस एण्ड टेक्नोलॉजी रायपुर जाकर विश्वविद्यालय के लिए अलग-अलग तरह के ग्रांट तथा फंड के लिए के छत्तीसगढ़ काउंसिल ऑफ साइंस एण्ड टेक्नोलॉजी अधिकारियों के साथ विस्तार से चर्चा की गई। इस चर्चा में विश्वविद्यालय के आईक्यूएसी के सदस्य भी शामिल रहें।

इसमें त्तीसगढ़ काउंसिल ऑफ साइंस एण्ड टेक्नोलॉजी के अधिकारियों ने अलग-अलग तरह के प्रोजेक्ट के बारे में जानकारी दी गई जिससे विश्वविद्यालय के सभी विभागों के शिक्षकों द्वारा अलग-अलग तरह के प्रोजेक्ट्स पर कार्य कर विस्तार से उन प्रोजेक्ट्स को छत्तीसगढ़ काउंसिल ऑफ साइंस एण्ड टेक्नोलॉजी को भेज कर ग्रांट के लिए आवेदन कर पायेगे। ये ग्रांट पांच लाख से दस लाख रुपए तक के हो सकते हैं।

अधिकारियों ने बताया कि सरगुजा संभाग के ग्रामीण अंचल के ज्वलंत समस्याएं जो यहां के नागरिकों के जीवनचर्या से जुड़े हों, इस पर भी प्रोजेक्ट्स भेज सकते हैं और मान्य होने पर 15 लाख तक के प्रोजेक्ट्स ग्रांट छत्तीसगढ़ काउंसिल ऑफ साइंस एण्ड टेक्नोलॉजी से मिल सकता है।


इस सेल के लिए मिल सकता है ५० हजार तक का फंड
छत्तीसगढ़ काउंसिल ऑफ साइंस एण्ड टेक्नोलॉजी द्वारा कोऑर्डिनेटर सेल तथा इन्टलैक्चुअल प्रॉपर्टी राईटस सेल के लिए भी 50 हजार तक का फंड दिया जा सकता है। यह जानकारी भी कुलपति को छत्तीसगढ़ काउंसिल ऑफ साइंस एण्ड टेक्नोलॉजी के अधिकारियों के द्वारा दी गई। तब कुलपति ने आईक्यूएसी के सदस्यों को निर्देशित किया कि कोऑर्डिनेटर सेल तथा इन्टलैक्चुअल प्रॉपर्टी राइटस् सेल का गठन विश्वविद्यालय में कर इसके लिए प्रपोजल बनाकर छत्तीसगढ़ काउंसिल ऑफ साइंस एण्ड टेक्नोलॉजी को भेजें ताकि विश्वविद्यालय को सेमिनार तथा वर्कशॉप के लिए 50 हजार तक का फंड प्राप्त हो सके और विद्यार्थियों को इसका फायदा मिल सके।


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