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४०० की आबादी वाले ग्राम में मूलभूत सुविधाएं कोसों दूर, कोई बीमार पड़ा तो खाट पर ढोकर ले जाते हैं लोग

बलरामपुर विकासखंड के ग्राम पंचायत सिंदूर के आश्रित ग्राम जवराही आजादी के 76 वर्षों के बाद भी मूलभूत सुविधाओं से कोसों दूर है। इसकी वजह से जवराही ग्राम के लोग कई परेशानियों से जूझ रहे है, लेकिन उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं है।

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४०० की आबादी वाले ग्राम में मूलभूत सुविधाएं कोसों दूर, कोई बीमार पड़ा तो खाट पर ढोकर ले जाते हैं लोग

४०० की आबादी वाले ग्राम में मूलभूत सुविधाएं कोसों दूर, कोई बीमार पड़ा तो खाट पर ढोकर ले जाते हैं लोग

अंबिकापुर। बलरामपुर विकासखंड के ग्राम पंचायत सिंदूर के आश्रित ग्राम जवराही आजादी के 76 वर्षों के बाद भी मूलभूत सुविधाओं से कोसों दूर है। इसकी वजह से जवराही ग्राम के लोग कई परेशानियों से जूझ रहे है, लेकिन उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं है। जानकारी के अनुसार बलरामपुर जिला मुख्यालय से लगभग 9 किलोमीटर दूर ग्राम पंचायत सिंदूर का आश्रित ग्राम जवराही स्थित है। इस ग्राम में लगभग 400 की आसपास जनसंख्या निवास करती है। इस 400 की जनसंख्या में 75 प्रतिशत से ऊपर आदिवासी लोग निवास करते हैं और 25 प्रतिशत में अन्य जाति के लोग हैं। इन लोगों के लिए सबसे बड़ी एवं पहली समस्या सडक़ का नहीं होना है। ग्रामवासियों के लिए गांव से मुख्य मार्ग तक आने के लिए सडक़ की व्यवस्था नहीं है।

यदि किसी व्यक्ति की तबियत खराब हो जाती है तो उसे लोग खाट या झेलगी में बैठाकर लगभग 5 किलोमीटर की दूरी तय कर मुख्य मार्ग तक लाते हैं। इसके बाद वहां से कोई गाड़ी व्यवस्था कर अथवा एंबुलेंस के माध्यम से अस्पताल पहुंचते हैं। तब तक मरीज की स्थिति और बिगड़ जाती है जिससे उसकी जान पर बन आती है।

इसी दौरान यदि बारिश के दिनों में बारिश हो रही हो तो इस 5 किलोमीटर के दायरे में तीन छोटे-बड़े नदी नालों को पार करना पड़ता है। इसमें भी यदि बारिश का पानी ज्यादा है तो लोगों को घंटों इंतजार करना पड़ता है, जब नाले का पानी कम होता है तब लोग पार होते हैं। इसकी वजह से लोगों को समय पर स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पाता है और मरीज की जान पर बना आती है।

5 किलोमीटर के दायरे में पूरा पगडंडीनुमा रास्ता है, इसमें सिर्फ पैदल और बाइक ही आ जा सकता है। चार पहिया गाड़ी, एंबुलेंस आदि वाहन वहां तक नहीं जा पाते हैं। ग्रामीणों द्वारा सडक़ बनवाने के लिए सरपंच, सचिव, स्थानीय जनप्रतिनिधि से लेकर जिला प्रशासन एवं नेता, विधायकों तक गुहार लगाई जा चुकी है। लेकिन आजादी के 76 साल गुजर गए 5 किलोमीटर का सडक़ निर्माण कार्य नहीं हो पाया है। वहीं इस ग्राम की दूसरी सबसे बड़ी समस्या बिजली का न होना है।

बिजली नहीं होने की वजह से ग्राम वासियों को लालटेन युग में जीना पड़ रहा है। ग्राम वासियों ने बताया कि 2018 के विधानसभा चुनाव में शासन द्वारा सोलर के माध्यम से बिजली पहुंचाने की कोशिश की गई और कई लोगों को तीन बल्ब जलाने की यूनिट के हिसाब से एक प्लेट सोलर एवं एक बैटरी दी गई, लेकिन यह इतनी घटिया निकली कि कुछ महीने बाद ही खराब हो गई। इसकी वजह से सोलर के माध्यम से बिजली पहुंचाने की योजना फेल हो गई। गांव में बिजली नहीं होने की वजह से सिंचाई के लिए लोगों को दिक्कत होती है। पढऩे वाले छात्र-छात्राओं को भी परेशानियां उठानी पड़ती है, मोबाइल आदि चार्ज करने के लिए 5 किलोमीटर दूर आना पड़ता है।

वहीं क्षेत्र के जनपद सदस्य संजय सिंह ने कहा कि मैंने प्रशासन को जावराही की समस्याओं से विभिन्न माध्यम से अवगत कराया है। अपने मद की राशि से जो बन पड़ता है, वह कार्य कराता हूं। समस्याओं का समाधान करना प्रशासन-सरकार का काम है, हम सिर्फ अवगत करा सकते हैं।


कुएं व ढोढ़ी का पानी पीने को मजबूर
जवराही के निवासी कुआं एवं ढोढ़ी का पानी पीने को मजबूर हैं। इससे ग्राम वासियों को स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है। ग्रामीणों ने बताया कि जब चुनाव का माहौल आता है तब यहां पर कई नेता विधायक पहुंचते हैं हर आश्वासन देते हैं की सारी सुविधाएं मुहैया कराई जाएगी, लेकिन चुनाव हो जाने के बाद हमारी सुध लेने वाला कोई नहीं रहता है। यहां पर विधानसभा, लोकसभा चुनाव के लिए मतदान केंद्र भी है जिसमें उच्च अधिकारी निरीक्षण के दौरान पहुंचते हैं लेकिन उन्हें कच्चा रास्ता व अन्य आवश्यक सुविधाओं की कमी नजर नहीं आती है। उक्त मतदान केंद्र जाने के लिए सडक़ नहीं है। ग्रामीणों ने बताया कि लगभग प्रतिवर्ष बिजली लगाने के लिए विभाग द्वारा सर्वे किया जाता लेकिन इसके आगे की प्रक्रिया बढ़ती ही नहीं है।


शिक्षा व्यवस्था का भी बुरा हाल
जवराही में प्राथमिक विद्यालय है और यहां दो टीचर पदस्थ हैं। दोनों ही शिक्षक दिव्यांग हैं। एक शिक्षक मुख्यालय से प्रतिदिन ड्राइवर के माध्यम से विद्यालय आना-जाना करते हैं। यदि बारिश के दिनों में ज्यादा बारिश हो रही होती है तो मुख्यालय से वह टीचर स्कूल नहीं आ पाते। दूसरे शिक्षक अधिकांश दिन विद्यालय से नदारद रहते हैं। इससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। आंगनबाड़ी भवन भी भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया है। अब आंगनबाड़ी इसी प्राथमिक शाला भवन में लगती है, टीचरों के नहीं आने से आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ही विद्यालय को खोलती। वह आंगनबाड़ी के बच्चों के साथ विद्यालय के बच्चों को पढ़ाती है। ग्रामीणों ने बताया कि राशन लेने के लिए भी ५ किलोमीटर दूर पैदल जाना पड़ता है।


जवराही के निवासियों द्वारा मेरे कार्यालय में कुछ दिन पहले आवेदन दिया गया है, मामला मेरे संज्ञान में हे। जितनी भी समस्याएं बिंदुवार बताई गई है, समाधान शीघ्र हो, इस हेतु आवश्यक पहल की जाएगी। रिमिजियुस एक्का, कलेक्टर, बलरामपुर-रामानुजगंज


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